योनि से बदबू आने के कारण और इलाज़ Fishy Smell from Vagina

जानिये योनि से बदबू या दुर्गन्ध क्यों आती है? इसके कई कारण हो सकते हैं, कभी कभी योनी में इन्फेक्शन की वजह से दुर्गन्ध आती है, जानिये योनि से बदबू रोकने के कुछ घरेलु उपाय।

बहुत बार लड़कियों-महिलायों द्वारा योनि से बदबू आने की समस्या देखी जाती है। कई कारण हैं जिससे योनि में से बदबू foul smell from Vagina in Hindi आने लगती है। यह बदबू नार्मल नहीं है और संक्रमण का संकेत है। यह गंध कई बार फिशी या मछली जैसी होती है। क्योंकि यह गुप्तांगों की समस्या है इसलिए महिलायें इसे डॉक्टर को दिखाने में शर्माती हैं लेकिन यदि समस्या का समाधान नहीं किया जाए तो यह बढ़ सकती है और आंतरिक प्रजनन अंगों जैसे गर्भाशय तक पहुँच सकती है।

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योनि में से कुछ गंध हमेशा आती है। योनि से आने वाली नार्मल गंध बहुत हल्की होती है और परेशान करने वाली नहीं होती। यह गंध ऐसी बिलकुल नहीं होती जो आस-पास के किसी दूसरे व्यक्ति को पता लग सके। पसीने से भी योनि से अलग गंध आ सकती है।

अगर आपको गुप्तांगों में किसी भी तरह का लक्षण दिखता है जो नार्मल नहीं है और घरेलू उपचार से ठीक नहीं हो पा रहा तो आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए और सही कारण पता लगा कर सही इलाज करवाना चाहिए।

योनि से दुर्गन्ध आने के कुछ कारण और उपचार

नीचे योनि से बदबू आने के कुछ संभावित कारण और निवारण दिए गए हैं:

बैक्टीरियल वेजिनोसिस (BV)

योनि में बहुत से बैक्टीरिया पाए जाते हैं। इसमें से कुछ अच्छे बक्टेरिया माने जाते हैं और कुछ बुरे। अच्छे बैक्टीरिया बुरे बैक्टीरिया को कण्ट्रोल रखते हैं। बैक्टीरियल वेजिनोसिस होने पर योनि में बुरे बक्टेरिया बढ़ जाते हैं जिससे योनि में केमिकल्स का संतुलन गड़बड़ा जाता है।

उपचार: योनि की साफ़-सफाई रखने से, बहुत तेज गंध के साबुन न इस्तेमाल करके, और बार बार साबुन से न धोने से, इसके होने की संभावना को कम किया जा सकता है।

दवा: इसके इलाज़ के लिए एंटीबायोटिक टेबलेट और जेल का प्रयोग किया जाता है।

ट्राइकोमोनिएसिस Trichomoniasis

ट्राइकोमोनिएसिस या ट्रिच Trichomoniasis or trich एक संक्रामक परजीवी ट्रायकॉमोनास वेजिनेलिस के कारण होता है। ट्राइकोमोनिएसिस एक एसटीडी या यौन संचारित रोग है जो सेक्स के माध्यम से इन्फेक्टेड व्यक्ति से स्वस्थ्य व्यक्ति को हो जाता है। महिलाओं में, शरीर का सबसे अधिक संक्रमित हिस्सा लोअर जननांग पथ (वल्वा, योनि, गर्भाशय ग्रीवा, मूत्रमार्ग) है।

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लक्षण: ट्राइकोमोनिएसिस के लक्षण में जननांगों की खुजली, जलन, लाली या पीड़ा, पेशाब में दिक्कत, योनि स्राव में परिवर्तन (योनि से सफ़ेद, पीले या ग्रीनिश रंग का मछली की गंध का बदबूदार स्राव होना) आदि शामिल है।  ट्राइकोमोनिएसिस होने पर यौन संबंध बनाना अच्छा नहीं लगता। उपचार के बिना, संक्रमण महीने या यहां तक कि कई वर्षों तक रह सकता है।

इलाज: ट्राइकोमोनीसिस का इलाज दवाओं either metronidazole or tinidazole के साथ किया जा सकता है।

यीस्ट इन्फेक्शन Candidiasis

कैंडिडिआसिस गुप्तांगों में होने वाला एक आम संक्रमण है। यह एक फंगल इन्फेक्शन है। गुप्तांगों private parts में जब यीस्ट (फफूंद) yeast कैंडिडा एल्बिकस, की संख्या अधिक बढ़ जाती है तब यह संक्रमण होता है। अक्सर ऐसा ठीक से साफ़-सफाई न रखने से, किसी अन्य रोग के कारण या योनि के पी एच के बढ़ जाने के कारण होता है।

लक्षण: कैंडिडा के इन्फेक्शन में योनिछिद्र पर खुजली होने लगती है। यह खुजली बहुत ज्यादा होती है। इसे बार-बार करने की इच्छा होती है। कुछ स्त्रियों में योनि में कुछ दर्द और सूजन भी देखी जा सकती है। योनि डिस्चार्ज जोकि आमतौर पर पानी जैसा होता है उसकी मात्रा और रंग सभी में परिवर्तन दिखता है। यह स्राव अधिक गाढ़ा और दूध जैसा थक्केदार सफ़ेद दिखता है।

इलाज़: इसका इलाज़ आप घर पर कर सकती हैं। योनि के आस-पास एंटीफंगल क्रीम लगायें।

डॉक्टर की सलाह पर एंटीफंगल गोली fluconazole की एक गोली Single Dose भी ली जा सकती है।

पेल्विक इन्फ्लेमेटरी बीमारी (पीआईडी) Pelvic inflammatory disease (PID)

पेल्विक इन्फ्लेमेटरी बीमारी (पीआईडी) Pelvic inflammatory disease (PID) एक संक्रमण हैं जिसमें महिला प्रजनन अंगों (गर्भाशय, अंडाशय, और अन्य महिला प्रजनन अंगों) में सूजन हो जाती है। इससे इन अंगों में घाव हो जाता है जिससे बांझपन, अस्थानिक गर्भावस्था, पैल्विक दर्द, फोड़े और अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

कारण: पेल्विक इन्फ्लेमेटरी बीमारी, मुख्य रूप से यौन संक्रमण से होती है। यह गोनोरिया या क्लैमाइडिया से ग्रस्त व्यक्ति के साथ सेक्स करने से होता है। क्लैमाइडिया, गोनोरिया, बैक्टीरियल वेजिनोसिस का संक्रमण जब बढ़ जाता है तो पेल्विक इन्फ्लेमेटरी बीमारी हो जाती है।

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यह किसी अन्य बैक्टीरियल संक्रमण के कारण भी हो सकता हैं जो यौन रूप से संचारित न हो।

इलाज़: यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है और इसके लिए मुख्य रूप से दो प्रकार की एंटीबायोटिक दी जाती हैं जो कई प्रकार के बैक्टीरिया पर काम करती हैं।

पसीना Sweat की वजह से योनि से बदबू

पसीना योनि में बदबू कर सकता है। सेबेशियस ग्रंथियां से निकलने वाला तेल, पसीना और त्वचा पर जीवाणु जब यह सब मिल जाता है तो चयापचय से अलग गंध का उत्सर्जन होता हैं। यदि किसी को बहुत पसीना आता है तो यह गंध और ज्यादा हो सकती है।

इलाज़: ऐसे में अंडरवियर दिन में कई बार बदलें। योनि धोने के लिए मिलने वाले उत्पाद जैसे वी वाश, लैक्टिसीड आदि का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

पीरियड के दौरान साफ़-सफाई नहीं रखने से

यदि पीरियड के दुरान साफ़ सफाई नहीं रखी जाती, समय पर पैड नहीं बदले जाते तो योनि से बदबू आती है। यह बदबू गंदे पैड या गन्दी पैंटी से आती है। यदि टैम्पून को अंदर लम्बे समय तक छोड़ देती हैं तो भी बदबू आती और इन्फेक्शन हो जाता है। इसलिए पीरियड में अच्छी साफ़ सफाई ज़रूरी है।

इलाज़: पैड समय पर बदलें। पैटी भी बदलें और योनि की सफाई का विशेष ध्यान रखें।

योनी की बदबू के घरेलू उपचार Home Remedies for Vaginal Smell

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योनि शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेंदनशील हिस्सा है। यह हमेशा नमी युक्त रहता है इसलिए थोड़ी सी असावधानी से इसमें संक्रमण आसानी से हो सकते हैं। निम्न घरेलू तरीकों से योनि से बदबू आने की समस्या और संक्रमण से बच सकते हैं:

योनि वस्ति या डूशिंग Douching नहीं करें। डूशिंग में योनि के अंदर पानी या किसी और लिक्विड को डाल कर साफ़ किया जाता है। डूशिंग से स्वस्थ जीवाणु नष्ट हो सकते हैं या संक्रमण गर्भाशय में धकेला जा सकते हैं।

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गुप्तांगों को धोने के लिए या केवल पानी का इस्तेमाल करें या बिना तेज गंध वाला माइल्ड साबुन या इंटिमेट वाश प्रयोग करें।

खुशबूदार साबुन, डियो, सुगंधित पैड या टॉयलेट पेपर, क्रीम, टब में नहाना, स्प्रे, आदि का इस्तेमाल न करें।

धोने के लिए स्पेशल योनि के लिए बनाए गए उत्पाद (LACTACYD, V Wash etc.) का इस्तेमाल करके देखें। इन उत्पादों में लैक्टिक एसिड, एसिडिक होता है और इसका पी एच कम होता है जिससे यह योनि में संक्रमण करने वाले बैक्टीरिया और फंगस को नहीं बढ़ने देता। इससे धोने से योनि में पीएच 3.5 से 4.5 के करीब पाया जाता है। कम पीएच यानि एसिडिक मीडियम में बैक्टीरिया या फंगस की वृद्धि नहीं होती है। लेकिन मीडियम जैसे ही कम एसिडिक होता है, पैथोजेनिक बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए उपयुक्त कंडीशन बन जाती है। इन\ प्रोडक्ट की सहायता से वेजिनल एरिया का पी एच सही रखा जा सकता है।

  • बार-बार गुप्तांग न धोएं। 1-2 बार धोना ही काफी है।
  • साफ़ पैड का इस्तेमाल करें।
  • नहाने के बाद गुप्तांगों को पोंछें।
  • शौच के बाद गुप्तांगों को साफ़ पानी से रिंस करें।

बहुत टाइट अंडरवियर न पहने। चुस्त अंडरवियर बैक्टीरिया और पसीने का कारण बनता है जिससे बदबू पीड़ा होती है। ऐसा होने से रोकने के लिए ढीला-ढाले अंडरवियर पहनें। सूती जाँघिया पहनें (कोई कृत्रिम कपड़े नहीं), और हर दिन अपनी अंडरवियर बदलें।

  • शिशु लड़कियों के डायपर को नियमित रूप से बदलें।
  • प्रजनन अंगों के आस-पास पाउडर न लगाएं।
  • सेक्स के बाद पानी से धो लें।

दही खाएं। दही में प्राकृतिक प्रोबायोटिक है और खमीर संक्रमण रोकने में मदद कर सकता है। इस उपाय में समय लगेगा, लेकिन यह अच्छे और बुरे जीवाणुओं के संतुलन को बनाए रखेगा।

  • यौन संचारित रोगों को रोकने के लिए संभोग के दौरान कंडोम का प्रयोग करें।
  • यदि आप योनि सूखापन का अनुभव कर रहे हैं, तो योनि मॉइस्चराइज़र का प्रयोग करें।
  • जब तक कोई योनि संक्रमण हो तब तक संभोग से बचें।
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