शुक्राणु की गतिशीलता में कमी (स्पर्म में गति की कमी) Asthenozoospermia in Hindi

अस्थानोजोस्पर्मिया कम शुक्राणु गतिशीलता के लिए चिकित्सा शब्द है। संपूर्ण एस्थेनोज़ोस्पर्मिया, अर्थात, स्खलन में 100% निल शुक्राणु गतिशीलता, 5000 पुरुषों में से 1 की आवृत्ति पर सूचित किया जाता है। जानिये शुक्राणु गतिशीलता की कमी के कारण, लक्षण और उपचार क्या हैं।

अस्थानोजोस्पर्मिया (एस्टेनोजोस्पर्मिया, एस्थेनोज़ूस्पर्मिया), एक मेडिकल टर्म है जिसे शुक्राणुओं की कम गतिशीलता के लिए प्रयोग किया जाता है। आम तौर पर, कम से कम 50% शुक्राणुओं को प्रगतिशील गतिशील होना चाहिए।

Loading...

एस्थेनोज़ूस्पर्मिया (शुक्राणु की गतिशीलता) से पुरुषों में बांझपन या कम प्रजनन क्षमता होती है। किसी पुरुष को एस्थेनोज़ूस्पर्मिया है या नहीं, इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए 3 sperm analysis परीक्षणों (जो अलग अलग समय पर डॉक्टर के द्वारा निर्देशित होने पर किये जाते हैं) द्वारा एक जैसा रिजल्ट पाने पर कहा जा सकता है। एस्थेनोज़ूस्पर्मिया होने की पुष्टि होने के बाद, यह संभावना नहीं के बराबर है कि पुरुष स्वाभाविक रूप से पिता बन सकता है। intracytoplasmic sperm injection (ICSI) नामक विधि का इस्तेमाल प्रुरुष को पिता बनने का सुख दे सकता है।

इसे भी पढ़ें: Low Sperm Count शुक्राणुओं की कमी जानकारी, दवाएं, उपचार

अस्थानोजोस्पर्मिया क्या है?

एस्थेनोज़ोस्पर्मिया में स्खलित वीर्य में शुक्राणु कोशिकाओं की गतिशीलता कम होती है। कम्पलीट एस्थेनोज़ोस्पर्मिया अर्थात स्खलन में 100% immotile स्पर्म की स्थिति 5000 पुरुषों में से 1 में देखी जाती है।

Asthenozoospermia (or asthenospermia) is the medical term for reduced sperm motility। Complete asthenozoospermia, that is, 100% immotile spermatozoa in the ejaculate, is reported at a frequency of 1 of 5000 men.

एस्थेनोज़ूस्पर्मिया में शुक्राणु बहुत अच्छी तरह से आगे नहीं बढ़ते जिससे प्रजनन क्षमता पर बड़ा असर हो सकता है। पुरुष प्रजनन क्षमता के लिए स्पर्म की गतिशीलता एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है क्योंकि आगे बढ़ते हुए स्पर्म योनि के माध्यम से घुस फैलोपियन ट्यूब में होते हुए अंडे तक पहुँच कर उसे निषेचित करता है। यदि स्पर्म आगे की और नहीं बढ़ते तो अंडे तक पहुंचना संभव नहीं है जिससे मेल इनफर्टिलिटी की समस्या हो सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) मैनुअल मानदंडों के मुताबिक गतिशीलता को ए से डी में ग्रेड किया गया है।

  • ग्रेड एक (तेजी से प्रगतिशील) शुक्राणु: शुक्राणु जो एक सीधी रेखा में तेजी से आगे बढ़ते हैं – जैसे कि निर्देशित मिसाइलें।
  • ग्रेड बी (धीमे प्रगतिशील) शुक्राणु: शुक्राणु जो आगे तैरते हैं, लेकिन या तो एक घुमावदार तरीके से या धीरे-धीरे (धीमी गति से रैखिक या गैर रेखीय गतिशीलता) में।
  • ग्रेड सी (गैर-प्रगतिशील) शुक्राणु: शुक्राणु जिनमें केवल पूँछ हिलती है, पर यह आगे नहीं बढ़ते।
  • ग्रेड डी (इम्मोटाइल) शुक्राणु: शुक्राणु जो बिल्कुल आगे नहीं बढ़ता है।
इसे भी पढ़ें -  ब्रेस्ट इम्प्लांट Breast Implants in Hindi

ग्रेड सी और डी के शुक्राणु को खराब माना जाता है।

अस्थानोजोस्पर्मिया कैसे पता लगाते हैं?

Loading...

शुक्राणु की गतिशीलता में कमी का पता एक वीर्य विश्लेषण से लगता है।

सीमन एनालिसिस परीक्षण में, लैब में सीमन सैंपल दिया जाता है। टेस्ट के द्वारा शुक्राणुओं की संख्या और आकृति विज्ञान के साथ, शुक्राणु कोशिकाओं की गतिशीलता का परीक्षण किया जाता है। आम तौर पर, अगर किसी दिए गए नमूने में शुक्राणु कोशिकाओं का 32% से कम हिस्सा ठीक से आगे नहीं बढ़ता है, तो व्यक्ति को एस्थेनोज़ोस्पर्मिया माना जाता है।

एस्थेनोज़ूस्पर्मिया का क्या कारण है?

डॉक्टरों को पूरी तरह से नहीं पता की ऐसा क्यों होता है। क्यों कुछ पुरुषोंमें शुक्राणुओं की गतिशीलता दूसरों की तुलना में बेहतर है। अध्ययनों से पता चलता है कि अस्थानोजोस्पर्मिया आनुवांशिक हो सकता है।

अन्य मामलों में, अंतर्निहित स्वास्थ्य और जीवन शैली कारक एक भूमिका निभाते हैं इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • बुरी आदतें
  • तनाव
  • अत्यंत थकावट
  • विटामिन की कमी
  • व्यायाम की कमी
  • अस्वास्थ्यकर भोजन
  • धूम्रपान
  • शराब
  • कीटनाशकों, सॉल्वैंट्स और भारी धातुओं का एक्सपोजर
  • वृषण के तापमान में वृद्धि जैसे कि गर्म टब या सौना के उपयोग से
  • वैरीकोसील (वैरिकाज़ नसों) वृषणों में रक्त
  • जननांगों या मूत्रजनन पथ में संक्रमण
  • Antisperm एंटीबॉडी आदि।

अधिकांश शोधकर्ताओं ने यह पाया है कि asthenozoospermia होने के कारण संचयी होते हैं। इसका अर्थ है कि एक व्यक्ति को केवल एक कारण (उदाहरण के लिए धूम्रपान) से अस्थेनोजोस्पर्मिया नहीं हो सकता है, यह कम से कम 2-3 कारणों के एक साथ होने पर हो सकता है।

वैरिकोसेले शल्यक्रिया केवल 60% रोगियों में गतिशीलता और शुक्राणुओं की गिनती में सुधार ला पाती है और यह संभव नहीं है कि चिकित्सक भविष्यवाणी करें कि किस मरीज की मदद हो पाएगी ।

एस्थेनोज़ूस्पर्मिया का उपचार और रोकथाम क्या है?

अस्थानोजोस्पर्मिया के लिए कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। इसके इलाज के लिए कोई दवा नहीं है।

इसे भी पढ़ें -  पेनिस पंप Penis Pump जानकारी और इस्तेमाल का तरीका

इसे रोकने के लिए जीवन शैली और भोजन पर ध्यान देना चाहिए। जो आदतें पूरे शरीर पर बुरा असर डालती हैं वे प्रजनन क्षमता को भी कम करती हैं।

जीवनशैली में परिवर्तन शुक्राणु पैरामीटरों को सुधारने के मामले में कुछ मदद कर सकता है। स्वस्थ्य जीवनशैली पूरे स्वास्थ्य को बेहतर करने में मददगार है।

अच्छा पोषण स्वस्थ प्रजनन प्रणाली के लिए ज़रूरी है। विविध और पौष्टिक आहार का सेवन फर्टिलिटी को इम्प्रूव कर सकता है।

जिंक, विटामिन सी और ई अच्छे स्पर्म में मदद कर सकते हैं।

शुक्राणु की गुणवत्ता के कारण बांझपन, एस्थेनोज़ूस्पर्मिया में जिंक / जस्ता, सप्लीमेंट मदद कर सकता है। एक अध्ययन में अस्थोनोजोस्पर्मिया वाले पुरुषों को 250 मिलीग्राम दो बार दैनिक जस्ता थेरेपी 3 महीने के लिए दी गई। उपचार के पहले और बाद में एंटीस्पर्म एंटीबॉडी, सेक्स हार्मोन और टी हेल्पर साइटोकिन्स को परिचालित करने का मूल्यांकन किया गया। परिणाम में देखा गया की जींच देने से शुक्राणु की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ। शुक्राणुओं की संख्या, प्रगतिशील गतिशीलता, उर्वरक क्षमताऔर antisperm एंटीबॉडी की घटनाओं में कमी देखी गई। अध्ययन से निष्कर्ष निकाला गया जस्ता थेरेपी अस्थेनोजोस्पर्मिया में शुक्राणु मापदंडों में सुधार कर सकती है।

एल – कार्निटाइन, एमिनो एसिड कंपोजिट है जो लाइसिन और मेथियोनीन से बना है। यह ऊर्जा चयापचय और माइटोकॉन्ड्रियल सुरक्षा में शामिल है। यह शरीर के लगभग सभी कोशिकाओं में पाया जाता है।  यह सामान्य स्वास्थ्य के लिए, मिटोकॉन्ड्रियल फ़ंक्शन को लाभ पहुंचाता है और मिटोकोडायड्रल ग्रोथ और हेल्थ को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

एल-कार्निटाइन इडियोपैथिक एस्थेनोज़ोस्पर्मिया L-carnitine में लाभप्रद है। एल कार्निटाइन मात्रात्मक और गुणात्मक तरीके से शुक्राणुजन्य गतिशीलता को बढ़ाने में सक्षम है। अध्ययन द्वारा यह निष्कर्ष निकाला गया है कि एल-कार्निटाइन के ओरल इस्तेमाल से मरीजों में शुक्राणु की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।  एक अध्ययन में 21 दिन के लिए हर दिन 3 ग्राम एल कार्निटाइन की सुरक्षा की जांच की गई। अध्ययन के आरंभ और अंत में प्रत्येक भागीदार के लिए एक व्यापक ब्लड टेस्ट किया गया और कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं देखा गया। एल-कार्निटाइन की प्रति दिन लगभग 2 ग्राम की डोज़ लंबी अवधि के उपयोग के लिए सुरक्षित है। ज्यादातर लोगों के लिए 2 ग्राम या उससे कम की मात्रा प्रति दिन अच्छी तरह से सहन की जाती है और सुरक्षित है। कुछ लोगों में मतली या अन्य पाचन दुष्प्रभावों की सूचना दी है, लेकिन कोई गंभीर समस्याएं नहीं है।

इसे भी पढ़ें -  स्तन पकड़ना और दूध पीना बच्चे को कैसे सिखाएं

प्रेजरवेटिव, केमिकल, सॉल्वैंट्स, कीटनाशकों जैसे औद्योगिक रसायनों, के एक्स्पोसर से बचा जाना चाहिए।  धूम्रपान और अल्कोहल छोड़ना, अन्य सकारात्मक कदम है। व्यक्ति को नियमित व्यायाम, योग और प्राणायाम करना चाहिए। साथ ही ढीले ढाले अंडर वियर पहनने चाहिए।

अगर जीवनशैली में बदलाव के बाद भी आपके वीर्य मापदंडों में सुधार नहीं होता, तो भी इसका मतलब यह नहीं है कि आप पिता नहीं बन सकते। असिस्टेड प्रजनन प्रौद्योगिकियों intracytoplasmic sperm injection (ICSI) के द्वारा स्त्री अंडाणु में शुक्राणु को सीधे सूक्ष्म सुई का इस्तेमाल कर निषेचित कर सकते हैं। इस निषेचित भ्रूण को स्त्री के गर्भ डाल कर स्वस्थ्य संतान की जा सकती है।

Asthenozoospermia (sometimes called Asthenospermia) refers to percentage of progressively motile (PR) spermatozoa below the lower reference limit.

Asthenozoospermia is the medical term for reduced sperm motility: the percentage of progressively motile sperm is below 32%. Causes of asthenozoospermia are insufficient liquefaction, autoantibodies, inflammation and disorders of the sperm tails. Causes of false-negative asthenozoospermia are cold sperm, old sperm or sperm collection with contamination (e.g. soap).

Complete asthenozoospermia, i.e. 100% immotile spermatozoa in the ejaculate, is reported at a frequency of 1 of 5000 men. Its diagnosis implies a poor fertility prognosis even with ICSI.

There is no medicine availabale for this condition. Vitamin C, Vitamin E, Zinc and L-carnitine ma be herlpful fro some men.

Different type of treatment may be required in order to achieve pregnancy. The most successful is ICSI (intracytoplasmic sperm injection) because it ensures that the sperm gets into the egg.

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.