गर्भपात के भारत में कानून Termination of Pregnancy Law India

जानिये इंडिया में गर्भपात के क्या कानून हैं? किन किन परिस्थितियों में गर्भपात करना अपराध होता है, किन किन परिस्थितियों में गर्भपात कराया जा सकता है.

गर्भपात कुछ परिस्थितियों में ज़रूरी हो जाता है। अनचाही प्रेगनेंसी से होने वाला बच्चा, अक्सर समस्याएं लाता है। कई बार एबॉर्शन का निर्णय शारीरिक, मानसिक अथवा सामजिक कारणों से हो सकता है। बिना शादी के यदि बच्चा ठहर जाए तो समस्या और अधिक हो जाती है।

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यह ज़रूरी है की सभी वयस्कों को गर्भनिरोधन के तरीकों के बारे में जानकारी हो और सेक्स के समय वे कोई न कोई प्रोटेक्शन प्रयोग में लायें। लेकिन कई बार परिस्थितियोंवश बच्चा ठहर जाता है। आजकल तो प्रेगनेंसी डिटेक्शन कार्ड उपलब्ध हैं जो की घर की प्राइवेसी में ही गर्भ है की नहीं बता देते हैं। यह कार्ड पीरियड के आने की एक्सपेक्टेड डेट के, करीब सात दिन बाद प्रयोग किये जाएँ तो सटीक रिजल्ट दे सकते हैं। यदि न चाहते हुए भी गर्भ हो गया है तो एबॉर्शन कराना एक उपाय है।

देश में हर साल करीब 40 लाख महिलाऍं गर्भपात करवाती है। कई एबॉर्शन गलत तरीकों से किये जाते है, झोला छाप, दाई द्वारा होते हैं या डर और शर्म के कारण नीम-हकीम से ही करा लिए जाते हैं। लेकिन यह प्रेग्नेंट महिला के लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकते हैं। बार-बार कराए गए गर्भपात, महिला के प्रजनन अंगों को खराब कर सकते हैं जिससे भविष्य में बच्चा होने की सम्भावना ही नहीं रह जाती।

गर्भ का चिकित्‍सकीय समापन अधिनियम, 1971

सरकार ने गर्भ समापन abortion, को आर्थिक, सामाजिक एवं मानवीय दृष्टिकोण से देखा है और इसे एक कल्‍याणकारी कदम माना है। सन् 1971 में चिकित्‍सकीय गर्भ समापन कानून Medical Termination of Pregnancy | MTP  बनाया गया है तथा वर्ष 2002 में कानून में आवश्‍यक संशोधन किये गये हैं।

इस कानून के अन्‍तर्गत महिलायें कुछ विशेष परिस्थितियों में सरकारी अस्‍पताल में या सरकार की ओर से अधिकृत किसी से भी चिकित्‍सा केन्‍द्र में अधिकृत व प्रशिक्षित डॉक्‍टर द्वारा गर्भपात करा सकती है।

  1. 18 वर्ष से कम आयु की लड़की को माता-पिता या पति (यदि कोई नाबालिक लडकी की शादी हो गई हो) की लिखित इजाजत की जरूरत होती है।
  2. 18 वर्ष से अधिक आयु की स्त्री, जिसका मानसिक संतुलन ठीक न हो, मेंटली चैलेंज्ड हो को माता-पिता या पति से लिखित इजाजत की जरूरत होती है।
  3. 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं का केवल स्‍वयं की लिखित स्‍वीकृति ही देनी जरूरी है।
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The Medical Termination of Pregnancy Act, 1971 (Act No. 34 of 1971), The MTP Act, 1971 preamble states” an Act to provide for the termination of certain pregnancies by registered medical practitioners and for matters connected therewith or incidental thereto“. This allows termination of pregnancy in certain cases only.

The cases in which the termination is permitted are elaborated in the Act. Only a registered medical practitioner who is defined in Sec.2(d) of the Act as “a medical practitioner who possess any recognize medical qualification as defined in Cl.(h) of sec.2 of the Indian Medical Register and who has such experience or training in gynecology and Obstetrics as may be prescribed by rules made under this Act” is permitted to conduct the termination of pregnancy.

A pregnancy, may be terminated by a registered medical practitioner:

(a) Where the length of the pregnancy does not exceed 12 weeks if such medical practitioner is, or

(b) Where the length of the pregnancy exceeds 12 weeks but does not exceed 20 weeks, if not less than 2 registered medical practitioners are of opinion, formed in good faith that.

  1. The continuance of the pregnancy would involve a risk to the life of the pregnant women or
  2. A risk of grave injury to her physical or mental health or
  3. If the pregnancy is caused by rape; or
  4. There exist a substantial risk that, if the child were born it would suffer from some physical or mental abnormalities so as to be seriously handicapped; or
  5. Failure of any device or method used by the married couple for the purpose of limiting the number of children; or

6; Risk to the health of the pregnant woman by the reason of her actual or reasonably foreseeable environment.

The termination of pregnancy after 20 weeks is not permitted by the Act. Section 3(4) of MTPA clarifies as to whose consent would be necessary for termination of pregnancy.

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(a) No pregnancy of a woman, who has not attained the age of 18 years, or who having attained the age of 18 years, is a lunatic, shall be terminated except with the consent in writing of her guardian.

(b) Save as otherwise provided in cl (a), no pregnancy shall be terminated except with the consent of the pregnant woman.

The consent of the woman is the essential for termination of her pregnancy. When wife wants an abortion but her husband’s objects to it, the abortion can be done. But, when wife does not want an abortion but her husband wants, it cannot be done. The consent of the guardians is needed in the case of minors or lunatics.

गर्भ समापन की परिस्थितियाँ

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यदि चिकित्‍सा-व्‍यवसायी / चिकित्‍सा व्‍यवसायियों न सद्भभावना पूर्वक यह राय कायम की हो कि.-

गर्भ के बने रहने से गर्भवती स्‍त्री का जीवन जोखिम में पडेगा अथवा उसके शारिरीक या मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को गम्‍भीर क्षति की जाखिम होगी अथवा

यदि इस बात की पर्याप्‍त जोखिम है कि यदि बच्‍चा पैदा हुआ तो वह ऐसी शारीरकि या मानसिक असामान्‍यताओं से पीडित होगा कि वह गम्‍भीर रूप से विकलांग हो, तो वह गर्भ रजिस्‍ट्रीकृत चिकित्‍सा-व्‍यवसायी द्वारा समाप्‍त किया जा सकेगा।

सेवायें कहाँ व किससे ली जा सकती हैं?

कानून में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि केवल सरकार द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त अस्‍पतालों में ही गर्भ समापन सेवायें प्राप्‍त की जा सकती हैं इन अस्‍पतालों में पूरी सुविधायें होने पर ही इन्‍हें इस काय्र के लिए अधिकृत किया जाता है।

प्रसूति विज्ञान और स्‍त्री रोग विज्ञान में स्‍नातकोतर डिग्री प्राप्‍त कर चुका हो।

प्रसूति विज्ञान ओर स्‍त्री रोग विज्ञान के व्‍यवसाय में तीन वर्ष का अनुभव हो।

वे डॉक्‍टर जिन्‍होंने प्रसूति विज्ञान एवं स्‍त्री रोग विज्ञान में छः महीने तक हाऊस जॉब किया हो या अधिकृत अस्‍पताल में गर्भ समापन का प्रशिक्षण लिया हो।

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सेवाये निःशुल्‍क एवं गोपनीय हैं

सरकार द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त सरकारी अस्‍पताल में अधिकृत डॉक्‍टर द्वारा गर्भ समापन सेवायें निःशुल्‍क हैं। इन केन्‍द्रो में गर्भ समापन सम्‍बन्‍धी रिकार्ड गोपनीय रखे जाते हैं।

गर्भपात और ज़रूरी सावधनियाँ

गर्भपात कराने वाली माताओं का निम्‍न सावधानियॉं रखनी चाहिये.-

सरकारी अस्‍पताल अथवा सरकार द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त अस्‍पताल के अधिकृत डॉक्‍टर से ही सेवायें लें। किसी भी स्थिति में नीम हकीम के पास न जावें।

बार-बार गर्भपात करवाना हानिकारक है। इससे मॉं के स्‍वास्‍थ्‍य को खतरा भी हो सकता है। इसकी वजह से अगले बच्‍चे के जन्‍म के समय रक्‍त स्‍त्राव ओर दर्द की तकलीफ हो सकती है। इसे परिवार नियोजन का साधन नहीं समझना चाहिए।

यदि गर्भ समापन जरूरी है तो इसमें देरी नहीं करनी चाहिए। 12 सप्‍ताह के बाद गर्भपात कराया जाना जोखिमपूर्ण होता है इस हालत में पेट का ऑपरेशन करना होता है और यह दो डॉक्‍टरों की सलाह से ही किया जा सकता है। इस समय अस्‍पताल मे भर्ती भी रहना पडता है।

अनचाहे गर्भ से मुक्ति पानी हो तो गर्भ के पहले तीन महीनों में ही अधिकृत केन्‍द्र पर गर्भपात करा लें। इसमें देरी करना खतरनाक है।

जैसे ही महिला को गर्भ का ज्ञान हो, यह निश्चित कर लेना चाहिए कि क्‍या गर्भपात कराना है? यदि कोई महिला गर्भपात कराना चाहती है तो देरी करना ठीक नहीं।

12 सप्‍ताह तक के गर्भ को गिराना एक आसान प्रक्रिया है इसमें अस्‍पताल में नहीं रहना पडता है।

चिकित्‍सकीय गर्भ समापन अधिनियम, 1971 एवं संशोधित अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के अनुसार इस कानून का उल्‍लंघन करने पर 2 से 7 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। कुछ परिस्थितियॉं जिन्‍हे अधिनियम के अन्‍तर्गत कानून का उल्‍लंघन माना गया है, निम्‍न प्रकार है.-

गैर पंजीकृत चिकित्‍सक द्वारा समापन का कार्य किया जाना।

सरकारी अस्‍पताल या सरकार की ओर से अधिकृत चिकित्‍सा केन्‍द्रो के अतिरिक्‍त किसी भी अन्‍य स्‍थान पर गर्भ समापन किया जाना।

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