एक्टोपिक प्रेगनेंसी (अस्थानिक गर्भावस्था) के कारण लक्षण और इलाज

Ectopic pregnancy को एक्टोपिक प्रेगनेंसी या अस्थानिक गर्भावस्था भी कहते हैं, जानिये के अस्थानिक गर्भावस्था के कारण, लक्षण और एक्टोपिक प्रेगनेंसी ट्रीटमेंट इन हिंदी ectopic pregnancy treatment in hindi.

एक्टोपिक प्रेगनेंसी को अस्थानिक गर्भावस्था, ट्यूबल गर्भावस्था Tubal pregnancy, Cervical pregnancy, Tubal ligation – ectopic pregnancy आदि के नाम से जानते हैं। इसमें गर्भावस्था गर्भाशय के बाहर होती है।

अस्थानिक गर्भावस्था क्या है?

अस्थानिक गर्भावस्था (एक्टोपिक प्रेग्नेंसी) फैलोपियन ट्यूब के भीतर है हो सकती है लेकिन कई मामलों में यह अंडाशय, पेट, या गर्भाशय ग्रीवा में हो सकती है। ट्यूब के अंदर होने वाली गर्भावस्था ट्यूबल प्रेग्नेंसी कहलाती है। सामान्य प्रेगनेंसी गर्भाशय में होती है।

ओवरी से निकलने वाला अंडाणु फैलोपियन ट्यूब में निषेचित होकर गर्भाशय में चला जाता है और फिर गर्भाशय में इम्प्लांट होकर बढ़ने लगता है। इस दौरान गर्भाशय का आकर अपने सामान्य आकार से कई गुना बढ़ जाता है और बच्चा आराम से इसमें विकसित होता है।

लेकिन अस्थानिक गर्भावस्था में ऐसा नहीं हो पाता। निषेचित भ्रूण गर्भाशय छोड़ कर कहीं ओर विकसित होने लगता है। मेडिकल टर्म में इसे ही एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy) कहते हैं। इसमें गर्भ तो ठहरता है लेकिन यूट्रेस में न होकर कहीं और होता है। इस प्रकार की गर्भावस्था महिला के जीवन को खतरे में डाल सकती है। एक हजार में से करीब पांच गर्भावास्थायें एक्टोपिक हो सकती हैं। इस तरह की गर्भावस्था को चलने नहीं दिया जा सकता और भ्रूण को नष्ट कर दिया जाता है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy) के लक्षण

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शुरू में अस्थानिक गर्भावस्था के सभी लक्षण सामान्य होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे भ्रूण विकसित होता जाता है और उसका आकार बढ़ने लगता है, ट्यूब के क्षति होने की संभावना बढ़ जाती है। योनि से खून आता है जो की मिसकैरिज जैसा लगता है। इसके अतिरिक्त इसमें निम्न लक्षण भी होते हैं:

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यदि अस्थानिक गर्भावस्था में, किसी भी प्रकार की क्षति होती हैं तो निम्न लक्षण भी हो सकते हैं:

  • बेहोशी होना
  • मलाशय में तीव्र दबाव
  • कम रक्त दबाव
  • कंधे क्षेत्र में दर्द
  • पेट के निचले हिस्से में, गंभीर तेज, और अचानक दर्द

एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लिए टेस्ट्स

गर्भावस्था की परीक्षण के लिए यूरिन टेस्ट और योनि अल्ट्रासाउंड किया जाता है। यदि एचसीजी हार्मोन काफी तेजी से नहीं बढ़ रहा है, तो अस्थानिक गर्भावस्था हो सकती है।

  • पेल्विस का एग्जामिनेशन
  • ब्लड टेस्ट
  • अल्ट्रासाउंड
  • लेप्रोस्कोपी

अल्ट्रासाउंड के अतिरिक्त कोई तरीका नहीं है जिससे इस प्रकार की गर्भावस्था का सटीक पता लग सके। यदि एचसीजी human chorionic gonadotropin, or hCG का लेवल तो बढ़ रहा हो लेकिन गर्भाशय में कोई भ्रूण न हो तो एक्टोपिक प्रेगनेंसी होती है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी (ectopic pregnancy) के कारण

  • फैलोपियन ट्यूब में जन्मजात दोष
  • अपेंडिक्स के कारण चोट
  • एन्डोमेट्रीओसिस (गर्भाशय के टिश्यू गर्भाशय की बाहरी परत में विकसित) endometriosis
  • पहले हुई अस्थानिक गर्भावस्था
  • पहले हुआ प्रजनन अंगों का संक्रमण या सर्जरी से चोट

निम्नलिखित कारणों से भी अस्थानिक गर्भावस्था के खतरे बढ़ जाते हैं

  • महिला की उम्र 35 से अधिक
  • अंतर्गर्भाशयी डिवाइस (आईयूडी) IUD लगे होने पर गर्भावस्था
  • हॉर्मोन निकालने वाली आईयूडी
  • प्रोजेस्टोजन वाली या मिनी पिल लेने से
  • नसबंदी के लिए फैलोपियन ट्यूब का ऑपरेशन कराने के बाद
  • सर्जरी द्वारा फैलोपियन ट्यूब को खोलने के बाद
  • बांझपन के उपचार के बाद
  • अज्ञात कारणों से

एक्टोपिक गर्भावस्था का इलाज / एक्टोपिक प्रेगनेंसी ट्रीटमेंट इन हिंदी

एक्टोपिक प्रेगनेंसी को पता लगते ही हटा देते हैं, इसे आगे नहीं बढ़ने दिया जा सकता क्योंकि यह आगे और कोम्प्लिकेशन का कारण बन सकती है। महिला में फलोपियन ट्यूब खराब हो सकती हैं जो उसकी भविष्य में उसे बच्चे होने में परेशानी हो सकती है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी को दवा या सर्जरी करके शरीर से हटा दिया जाता है। ट्यूब के फट जाने पर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है। यदि यह पहले ही पता लग जाए और इमरजेंसी की स्थिति न हो तो दवाओं के द्वारा भी इसे हटाया जा सकता है।

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सर्जरी द्वारा चिकित्सा Surgical Management

सर्जिकल मैनेजमेंट एक्टोपिक प्रेगनेंसी के इलाज़ का सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला तरीका है। इसमें एक्टोपिक गर्भधारण को हटाने के लिए ऑपरेशन किया जाता है। ऑपरेशन जेनेरल एनेस्थीसिया दे कर करते हैं।

यदि हार्मोन बीटा एचसीजी (ह्यूमन क्रोनिक गॉनेडोट्रोपिन) ज्यादा है, इंटरनल ब्लीडिंग हो रही है या एक्टोपिक प्रेगनेंसी बड़ी है तो ऑपरेशन ही किया जाता है। क्योंकि ऐसे में महिला की जान पर जोखिम हो सकता है और इसलिए सर्जरी एकमात्र विकल्प उपलब्ध हो जाता है।

लैपरोटॉमी

बहुत इमरजेंसी की स्थिति में लैपरोटॉमी Laparotomy की जाती है जिसमें बड़ा चीरा सी सेक्शन के लिए कट लगाने वाली जगह, पर लगाते हैं। यह बड़ा ऑपरेशन और कम ही किया जाता है।

लैपरोस्कोपी Laparoscopic surgery

ज्यादातर परिस्थितियों में लैपरोस्कोपी (कीहोल सर्जरी) नामक एक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें नाभि के माध्यम से लैप्रोस्कोप डाला जाता है और निचले पेट में दो छोटे कट के माध्यम से इंस्ट्रूमेंट डालते हैं। सर्जन को पेट के अंदर दिखाई दे इसके लिए इसे पेट को फुलाने के लिए थोड़ी मात्रा में गैस डाल दी जाती है।

सर्जन भावित ट्यूब के नुकसान और अन्य ट्यूब की स्थिति को देखते हैं। यदि दूसरी ट्यूब सामान्य होती है तो सबसे अधिक संभावना यह है कि एक्टोपिक गर्भावस्था के साथ ट्यूब निकाल दी जाती है (salpingectomy)।

यदि अन्य ट्यूब सामान्य नहीं है तो सबसे अधिक संभावना है कि ट्यूब से एक्टोपिक गर्भधारण को एक छोटे से कट कर निकाल दें (सलपिंगोटमी salpingotomy)।

ऑपरेशन के बाद महिला को 2-3 दिन अस्पताल में रहना पड़ सकता है। अधिकांश महिलाओं को सर्जरी के पहले 1-2 सप्ताह के दौरान दर्द का अनुभव होता है जो दर्द निवारक के साथ इलाज किया जा सकता है। आपको लगभग 2 सप्ताह तक किसी भी भारी उठाने या अधिक घर का काम नहीं करना चाहिए और त्वचा के घावों को ठीक करने के बाद ही घूमने और हल्के व्यायाम करने चाहिए।

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पैल्विक फ्लोर (केगल) अभ्यास के बारे में जानना चाहिए, जिससे पेट और मूत्राशय को ठीक करने में मदद हो सके।

दवा मेथोट्रेक्सेट (Methotrexate) द्वारा चिकित्सा Medical management

एक्टोपिक प्रेगनेंसी में दवा मेथोट्रेक्सेट का इस्तेमाल किया जाता है।

मेथोट्रेक्सेट का प्रयोग गंभीर सोराइसिस में किया जाता है जब कोई अन्य दवा प्रयोग करने से लाभ नहीं हो रहा। मेथोट्रेक्सेट का उपयोग गहन सक्रिय संधिशोथ rheumatoid arthritis, जिसे अन्य दवाओं से नियंत्रित नहीं किया जा पा रहा में भी अन्य दवाओं के साथ प्रयोग किया जाता है।

मेथोट्रेक्सेट को कभी-कभी क्रोहन की बीमारी का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

मेथोट्रेक्सेट एंटीमेटाबोलिट्स antimetabolites नामक दवाओं के एक वर्ग से है। यह शरीर में सेल्स की ग्रोथ को रोकने और इम्यून सिस्टम को दबाने वाली दवा है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी में मेथोट्रेक्सेट देने से प्रेगनेंसी का बढ़ना रुक सकता है। उपचार इंजेक्शन के माध्यम से दिया जाता है, आमतौर पर पेशी में एक इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है। डोज़ की ऊंचाई और वजन के अनुसार गणना की जाती है। इंजेक्शन से पहले, यकृत और गुर्दा फंक्शन की जांच के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है।

फोलेट गर्भावस्था में कोशिकाओं को तेजी से विभाजित करने में मदद करने के लिए आवश्यक एक आवश्यक विटामिन है और मेथोट्रेक्सेट एक शक्तिशाली दवा है जो अस्थायी रूप से फॉलेट के शरीर में प्रसंस्करण से दखल देती है। दवा आगे बढ़ने वाली गर्भावस्था को रोक देती है और धीरे-धीरे शरीर को फैलोपियन ट्यूब से टिश्यू का शरीर में अवशोषण हो जाता है।

गर्भधारण के पहले चरण में गर्भधारण के पहले चरण में मेथोट्रेक्सेट सबसे प्रभावी होती है। आमतौर पर तब, जब गर्भावस्था हार्मोन ‘बीटा एचसीजी’ का लेवल 5000 एमआईयू / एमएल से नीचे होता है। शरीर में एचसीजी के उच्च स्तर में दवा द्वारा इलाज़ ठीक नहीं होता है।

हालांकि सर्जरी से बचने के लिए दवा दी जाती है, लेकिन इस दवा के बहुत सारे साइड इफेक्ट्स हैं और इसलिए सावधानीपूर्वक निगरानी और फॉलो-अप की आवश्यकता होती है।

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 इसके अतिरिक्त परीक्षण के नकारात्मक होने तक आपको अपने एचसीजी स्तरों पर नज़र रखने के लिए ब्लड टेस्ट्स के लिए नियमित रूप से अस्पताल में टेस्ट कराने होंगे। इसमें कई सप्ताह लग सकते हैं।

इंजेक्शन के कुछ दिनों बाद, ब्लीडिंग होती है और यह रक्तस्राव कुछ दिनों के बीच और 6 सप्ताह के बीच जारी रह सकता है।

हर 3-7 दिनों में बीटा एचसीजी के स्तरों पर नजर रखे जाने के लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे उचित रूप से गिर रहे हैं। अधिकांश महिलाओं को केवल एक इंजेक्शन की आवश्यकता होती है लेकिन एक चौथाई मामलों में सीरम एचसीजी के स्तर कम नहीं होने पर एक और इंजेक्शन की आवश्यकता हो सकती है।

दवा के द्वारा इलाज में रिस्क

दवा द्वारा चिकित्सीय उपचार के इलाज का रिस्क यह हो सकता है कि भ्रूण की सेल्स बढ़ती रहें और इसके परिणामस्वरूप सर्जरी करानी पड़े।

सफलता की दर के हिसाब से यह में परिस्थितियों के आधार पर भिन्नता होती है। रिपोर्ट के अनुसार सफलता की दर 65-95% है।

दवा के द्वारा इलाज के दुष्प्रभाव

मेथोट्रेक्सेट का सबसे आम दुष्प्रभाव हैं:

  • आंख के कवर झिल्ली की सूजन
  • गंभीर लो ब्लड काउंट, बोन मेरो के दब जाने से
  • थकान – बहुत सी महिलायें बहुत थका हुआ महसूस करती हैं।
  • पेट में पेट लगना (पेट) दर्द सबसे आम साइड इफेक्ट है, और यह आमतौर पर उपचार के पहले 2 से 3 दिनों के दौरान होता है।
  • फेफड़े की सूजन (न्यूमोनिटिस)
  • बालों का झड़ना
  • सूर्य के प्रकाश की त्वचा की संवेदनशीलता
  • हल्का सिरदर्द या चक्कर आना

मेथोट्रेक्सेट अस्थि मज्जा द्वारा बनाई गई रक्त कोशिकाओं की संख्या में कमी का कारण हो सकता है अगर आपके रक्त कोशिकाओं के साथ किसी भी प्रकार के रक्त कोशिकाओं की कोई कम संख्या या किसी अन्य समस्या हो गई हो तो अपने चिकित्सक को बताएं। गर आपको निम्न लक्षणों में से कोई भी अनुभव होता है, तो तत्काल अपने चिकित्सक को कॉल करें: गले में खराश, ठंड लगना, बु; पीली त्वचा; या सांस की तकलीफ। मेथोट्रेक्सेट आपके मुँह, पेट या आंतों के अस्तर को नुकसान पहुंचा सकती है। मेथोट्रेक्सेट गंभीर या जीवन-धमकी वाली त्वचा प्रतिक्रियाओं का कारण हो सकता है। मेथोट्रेक्सेट आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधि को कम कर सकता है, और आप गंभीर संक्रमण विकसित कर सकते हैं। अगर आपके पास किसी भी प्रकार का संक्रमण हो, तो अपने चिकित्सक से कहें।

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मेथोटेरेक्सेट के साथ अस्थानिक गर्भावस्था का उपचार उपयुक्त नहीं है यदि आप निम्न में से किसी भी स्थिति से पीड़ित हैं:

  • संक्रमण
  • गंभीर रक्तचाप या अन्य रक्त कोशिकाओं की कमी
  • गुर्दे से संबंधित समस्याएं
  • यकृत की समस्याएं
  • सक्रिय संक्रमण
  • एचआईवी / एड्स
  • पेप्टिक अल्सर या अल्सरेटिव कोलाइटिस

जिन महिलायों में एक बार एक्टोपिक प्रेगनेंसी हो जाती है उनमे दुबारा यह प्रेगनेंसी होने के असार बढ़ जाते हैं। कुछ मामलों में महिला दुबारा गर्भधारण नहीं होता। एक्टोपिक प्रेगनेंसी के कारण फालोपियन ट्यूब में नुकसान से आगे प्रेगनेंसी होने की सम्भावना की दर 60 प्रतिशत रह जाती है।

यदि एक्टोपिक प्रेगनेंसी को न हटाया जाए तो फैलोपियन ट्यूब फट सकती हैं, महिला को बहुत अधिक दर्द और ब्लीडिंग होती है और तब उपचार अधिक जटिल होता है। इसमें फैलोपियन ट्यूब को हटा दिया जाता है। इसलिए जैसे ही पता चले, अल्ट्रासाउंड द्वारा भ्रूण की जगह का ज़रूर पता करें।

यदि गर्भावस्था का पता है, और ब्लीडिंग हो रही है, साथ में पेट में एक साइड दर्द, पीठ में दर्द या अन्य लक्षण हैं तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ। करीब 15 प्रतिशत केसेस में महिला ट्यूब के फट जाने पर इमरजेंसी में अस्पताल पहुँचती हैं और तब पेट में सी सेक्शन जैसा कट लगा कर ऑपरेशन किया जाता है और ट्यूब को काट कर हटा देते हैं। इसमें खून भी चढ़ाना पड़ता है। इसलिए स्थिति को समय रहते ठीक किया जा सके, स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखा लें।

Ectopic pregnancy is a pregnancy occurring outside the uterus. It is usually in one of the fallopian tubes, but can also occur in the cervix (entrance to the womb), the abdominal cavity and the ovary but such cases are rare. Around 5 in 1,000 pregnancies are ectopic.

Any pregnancy which develops outside the uterus ends in termination. Such pregnancy is threat to woman’s life and should be removed from the body as soon as possible.

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In 15% cases, the tube ruptures causing pain, internal bleeding and shock. This is a medical emergency needing immediate surgery and, in some cases, a blood transfusion.

The symptoms of ectopic pregnancy are like miscarriage, pelvic inflammatory disease (PID) or endometriosis. There is pain, vaginal bleeding and cramping. Ectopic pregnancy can be diagnosed using a range of tests including pelvic examination, blood tests ultrasound and laparoscopy (‘keyhole’ surgery). Treatment for ectopic pregnancy is done using surgery or medicine. Surgery is generally done.

Most women who have had an ectopic pregnancy can become pregnant again, but they will need careful follow up, as theirrisk of ectopic pregnancy is higher.

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