अवसाद डिप्रेशन की दवा और लक्षण | depression in hindi

Mental depression treatment in hindi. जानिये डिप्रेशन के प्रकार, लक्षण, दवा और डिप्रेशन से बचने के उपाय और डिप्रेशन की दवा के साइड इफेक्ट्स। अवसाद से बचने के उपाय और इलाज।

अवसाद को इंग्लिश में डिप्रेशन depression कहते हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक विकार psychological  disorder है जिसमें व्यक्ति में नकारात्मक सोच, दुःख और निराशा की भावना बहुत बढ़ जाती है। व्यक्ति को हर तरह दिक्कतें ही नजर आती हैं। डिप्रेशन होने पर डॉक्टर को दिखा कर डिप्रेशन की दवा लेनी चाहिए।

सभी को कभी न कभी depression का अहसास होता है। लेकिन जब लम्बे समय तक है समस्या रहती है व्यक्ति के सामान्य गतिविधियाँ, जीवन के प्रति नज़रिया, व्यवहार, तथा जीने की इच्छा सभी प्रभावित हो जाता है। डिप्रेशन को लम्बे समय तक उदासी की तरह समझा जा सकता है।

अवसाद हल्का या गंभीर हो सकता है। अवसाद से ग्रसित व्यक्ति या तो बहुत कम खाने लगता है या बहुत अधिक। कुछ लोग अवसाद के कारण बहुत मोटे हो जाते हैं। अवसाद दिमाग के अतिरिक्त शारीरिक लक्षण भी दिखते हैं। व्यक्ति का पेट खराब रहता है, सिर में दर्द बना रहता है और निद्रा सम्बन्धी समस्याएं होने लगती हैं।

अवसाद के होने के सटीक कारण तो नहीं बताये जा सकते लेकिन यह जीवन में घटित घटनाओं, रोगों, स्ट्रेस, मनोवैज्ञानिक कारणों आदि से हो सकता है। कुछ मामलों में इसका पारिवारिक इतिहास होता है। यह अनुवांशिक कारणों से एक ही परिवार के कई सदस्यों में देखा जा सकता है। थाइरोइड के कम होने पर, भी अवसाद हो सकता है। लम्बी बीमारी, व्यक्ति का अधिक तनाव में रहना, हारा हुआ सा महसूस करना आदि अवसाद को बढ़ा देता है।

अवसाद में दिमाग में न्यूरोट्रांसमिटर सही से काम नहीं करते जिससे मूड सही नहीं रहता। न्यूरोट्रांसमिटर का संतुलन बिगड़ जाता है और अवसाद हो जाता है। न्यूरोट्रांसमिटर केमिकल norepinephrine तथा serotonin की भूमिका अवसाद में बहुत महत्वपूर्ण है। इन केमिकल की कमी से डिप्रेशन होने की सम्भावना बढ़ जाती है। कुछ दवाओं का सेवन शरीर में इन केमिकल्स का स्तर कम कर सकता है। उदाहरण के लिए ब्लड प्रेशर कम करने की दवा Reserpine से नॉरपिनेफ्रीन और सेरोटोनिन केमिकल दिमाग में कम हो जाता है और व्यक्ति में अवसाद के लक्षण विकसित हो जाते हैं।

इसे भी पढ़ें -  तनाव और हृदय रोग

डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति में कम रक्तचाप, कम तापमान, उत्तेजना, कँपकपी, चेहरे पर दुःख-उदासी, निराशा, सुस्ती, उदासी आदि लक्षण देखे जा सकते हैं। अवसाद में व्यक्ति आत्महत्या के बारे में सोचने लगता है। कुछ लोग ऐसा कर भी लेते हैं।

अवसाद या डिप्रेशन के उपचार के लिए एलॉपथी में डिप्रेशन की दवा दी जाती है जिन्हें इंग्लिश में एंटीडिप्रेसेंट antidepressant कहते हैं। एंटीडिप्रेसेंट को तंत्रिका जनित दर्द, भूख न लगना, बहुत भूख लगना, नींद न आना, शराब जनित अवसाद, माइग्रेन, आदि तथा अन्य रोगों जिनमें दिमाग में न्यूरोट्रांसमिटर के मात्रा को संतुलित करना होता है, में भी दिया जाता है।

डिप्रेशन की दवा का सेवन रोग के लक्षणों में आराम पहुंचता है लेकिन उसका इलाज़ नहीं करता। इन दवाओं का सेवन स्वास्थ्य पर कई दुष्प्रभाव भी डालता है।

अवसाद क्या है?

अवसाद या डिप्रेशन, वो मेडिकल कंडीशन है जिसमें व्यक्ति कम से कम दो सप्ताह तक अवसादित अवस्था मे या डिप्रेस्ड होता है। उसमें किसी भी काम करने में रूचि नहीं रहती, प्रसन्नता-ख़ुशी का अभाव रहता है। व्यक्ति की भूख और वज़न पर असर पड़ता है। शरीर में किसी काम करने की एनर्जी नहीं रहती। मन में अपराध भाव, सोचने की क्षमता प्रभावित होती है तथा मन में आत्महत्या के विचार आते हैं।

अवसाद को बढ़ाने वाले रिस्क फैक्टर्स क्या है?

  1. महिलाओं में डिप्रेशन अधिक देखा जाता है।
  2. पीरियड से पहले, प्रसव के बाद डिप्रेशन हो सकता है।
  3. मन में अयोग्यता का भाव और कॉन्फिडेंस की कमी से भी डिप्रेशन हो सकता है।
  4. सर्दी का मौसम, अँधेरे कमरे (मेलाटोनिन के अधिक स्राव के कारण)
  5. अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकार
  6. गंभीर या पुरानी बीमारी
  7. कुछ दवाएं, जैसे कुछ उच्च रक्तचाप दवाएं या नींद की गोलियां
  8. कुछ व्यक्तित्व लक्षण, जैसे कम आत्मसम्मान और बहुत अधिक निर्भर, स्व-आलोचनात्मक या निराशावादी होना
  9. शराब या ड्रग्स का सेवन

अवसाद होने के क्या कारण हो सकते हैं?

  1. नेगेटिव मूड
  2. निराशा, दुःख, स्ट्रेस, होपलेसनेस
  3. आनुवांशिक कारण genetic factors
  4. तंत्रिका रसायन कारक neurochemical factors
  5. तंत्रिका संरचनात्मक कारक neuroanatomical factors
  6. अंतः स्रावी ग्रंथियों से हॉर्मोन का असंतुलन endocrine gland hormones
इसे भी पढ़ें -  पैनिक डिसऑर्डर में घबराहट या बेचैनी : लक्षण, कारण और उपचार | पैनिक अटैक

अवसाद किसे हो सकता है?

यह किसी को, कभी भी हो सकता है।

डिप्रेशन के लक्षण क्या हैं?

Loading...
  1. उदासी, रोना, शून्यता या निराशा की भावनाएं
  2. गुस्सा, चिड़चिड़ापन या हताशा
  3. सामान्य गतिविधियों, सेक्स, शौक या खेल आदि में रूचि न रह पाना या खुशी न मिल पाना
  4. नींद की गड़बड़ी, अनिद्रा या बहुत अधिक सोना
  5. थकान, ऊर्जा की कमी
  6. चिंता, बेचैनी
  7. धीमा सोचना, बोलना
  8. अयोग्यता या अपराध की भावनाएं
  9. सोचने, ध्यान केंद्रित करने, निर्णय लेने और चीजों को याद रखने में समस्या
  10. आत्महत्या के विचार अक्सर आना
  11. अस्पष्टीकृत शारीरिक समस्याएं जैसे पीठ दर्द या सिर दर्द

बच्चों और किशोरों में अवसाद के लक्षण

  1. बच्चों और किशोरों में सामान्य लक्षण और अवसाद के लक्षण वयस्कों के समान हैं, लेकिन कुछ अंतर हो सकते हैं
  2. छोटे बच्चों में, अवसाद के लक्षणों में उदासी, चिड़चिड़ापन, स्टिफनेस, चिंता, और दर्द हो सकता है
  3. स्कूल जाने से इनकार करना या कम वजन वाला होना
  4. किशोरावस्था में लक्षणों में शामिल है उदासी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, खराब प्रदर्शन या स्कूल में खराब उपस्थिति, बेहद संवेदनशील होना, ड्रग्स या शराब का उपयोग करना, बहुत ज्यादा खाना या सोना, सामाजिक संपर्क से बचाव।

डिप्रेशन से जुड़ी जटिलताएं क्या हैं?

  1. अवसाद से जुड़े जटिलताओं के उदाहरणों में शामिल हैं:
  2. अत्यधिक वजन या मोटापा, जिससे हृदय रोग और मधुमेह हो सकता है
  3. दर्द या शारीरिक बीमारी
  4. शराब या नशीली दवाओं का सेवन
  5. चिंता, एंग्जायटी या सामाजिक भय
  6. पारिवारिक संघर्ष, रिश्ते में कठिनाइयाँ, और काम या स्कूल की समस्याएं
  7. सामाजिक अलगाव
  8. आत्महत्या के प्रयास या आत्महत्या
  9. आत्म-विकृति आदि।

अवसाद का मॉडर्न मेडिसिन में क्या उपचार है? Depression treatment in hindi

  1. मॉडर्न मेडिसिन में अवसाद के लिए निम्न उपचार उपलब्ध है:
  2. मनोवैज्ञानिक उपचार
  3. कॉम्प्लिमेंटरी थेरेपी (जीवनशैली में परिवर्तन, व्यायाम, डाइट चेंज, प्राणायाम)
  4. डिप्रेशन की दवा या अवसादरोधी अथवा एंटीडिप्रेसेंट दवाएं

डिप्रेशन की दवा क्या हैं?

अवसादरोधी या एंटीडिप्रेसेंट दवाएं, डिप्रेशन के उपचार में प्रयोग होने वाली दवाएं हैं जो की मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमिटर्स की मात्रा सामान्य करती हैं। शरीर में न्यूरोट्रांसमीटर्स के कमी को दूर करके अवसाद के लक्षणों को दूर करने में सहायता होती है।

इसे भी पढ़ें -  अवसाद या डिप्रेशन, उदासी को कम करने वाली डाइट Diet to Reduce Depression

डिप्रेशन की दवा के प्रकार क्या है?

अवसाद या डिप्रेशन, एंग्जायटी से सम्बंधित लक्षणों जैसे की खाने के डिसऑर्डर, ऑब्सेसिव डिसऑर्डर, स्ट्रेस डिसऑर्डर  के उपचार के लिए एलॉपथी में अवसाद रोधी दवाएं दी जाती है जिन्हें इंग्लिश में एंटीडिप्रेसेंट कहते हैं।

एंटीडिप्रेसेंट दवाए कई प्रकार की होती है:

1- ट्राईसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स TCAs tricyclic antidepressants: amitriptyline, nortriptyline, clomipramine, dothiepin, doxepin, imiprimine, trimipramine

2- टेट्रासाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स Tetracyclic antidepressants: mianserin

3- माओमाईन ओक्सिडेज़ इन्हिबिटर्स Monoamine oxidase inhibitors (MAOIs)): phenelzine, tranylcypromine

4- रेपूटेट इन्हिबिटर्स: SSRIs, SNRIs, and NDRIs

  1. Selective serotonin reuptake inhibitors (SSRIs): citalopram, escitalopram, fluoxetine, fluvoxamine, paroxetine, sertraline
  2. Serotonin and norepinephrine reuptake inhibitors (SNRIs): duloxetine, venlafaxine, desvenlafaxine
  3. Norepinephrine and dopamine reuptake inhibitors (NDRIs): reboxetine

सभी के लिए एक ही डिप्रेशन की दवा नहीं होती। सही डिप्रेशन की दवा कारणों और लक्षणों को देख कर दी जाती है।

  1. एंटीडिप्रेसेंट क्या सभी के लिए काम करते हो?
  2. एंटीडिप्रेसेंट माइल्ड डिप्रेशन में ज्यादा इफेक्टिव नहीं है। यह मुख्य रूप से मॉडरेट और बहुत अधिक डिप्रेशन में लाभप्रद हैं।
  3. यदि डिप्रेशन बहुत कम है तो उसे मनोवैज्ञानिक उपचार से ठीक किया जा सकता है।

क्या मैं एंटीडिप्रेसेंट को बिना डॉक्टर के निर्देश के ले सकता हूँ?

नहीं, केवल डॉक्टर के निर्देशानुसार ही यह दवा शुरू की जानी चाहिए।

एंटीडिप्रेसेंट कैसे काम करते हैं ?

एंटीडिप्रेसेंट दवाएं दिमाग पर काम करते हैं। यह उन केमिकल्स पर असर डालती हैं जो की भावनाओं, मूड और मोटिवेशन के लिए जिम्मेदार हैं।

एंटीडिप्रेसंट के क्या दुष्प्रभाव है?

सभी एंटीडिप्रेसंट का कोई न कोई साइड इफेक्ट है। सबसे ज्यादा कॉमन साइड-इफ़ेक्ट हैं, सिर में दर्द, उलटी, थकावट, सेक्सुअल समस्याएं, नींद न आना, पाचन समस्याएं, चक्कर आना, कब्ज़, दस्त, पसीना आना, हृदयगति बढ़ जाना, मुंह का स्वाद खराब होना, कम्पन, पेशाब रुकना, आदि।

नीचे अवसाद में प्रयोग की जाने वाली दवाओं की कुछ दुष्प्रभाव दिए गए हैं:

Duloxetine: व्यवहार में बदलाव, आत्महत्या के विचार आना, सिरदर्द, शोक, थकान, चक्कर आना, अनिद्रा, ट्रेमर, कंपन, चिंता, अनिद्रा, सुस्ती, असामान्य सपने, मतली, एक्सरोस्टोमिया, धड़कन, हाइपरहाइडोसिस, कामेच्छा कम होना, यौन रोग, उल्टी, कब्ज, दस्त, अपच, पेट में दर्द, भूख, इरेक्शन दोष, यकृत एंजाइमों का बढ़ जाना, मांसपेशियों की ऐंठन, टिनिटस, धुंधला दृष्टि, मायडायसीस, नेसोफरींजिटिस, हाइपोनैत्रियामिया, प्लेटलेट एकत्रीकरण को कमजोर कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें -  बाइपोलर डिसऑर्डर: लक्षण और उपचार | Bipolar Disorder

Mirtazapine: भूख और वज़न का बढ़ जाना, एडिमा में वृद्धि, नींद बहुत आना, चक्कर आना, सिरदर्द, जिगर एंजाइम के स्तर में वृद्धि, पीलिया। आर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन, दाने, दुःस्वप्न, उन्माद, मतिभ्रम, पैरासेस्थीसिया, आक्षेप, कंपन, माइकोलोनस, अकिथीसिया, बेचैन पैरों सिंड्रोम, आर्थरालिया, मायलागिया, प्रतिवर्ती एगर्रोनलोकीटोसिस, ल्यूकोपैनिआ, ग्रैन्युलोसिओटेपेनिया, हाइपोनैट्रेमिया।

Paroxetine: उदासी, अनिद्रा, सिरदर्द, चक्कर आना, कामेच्छा में कमी, मतली, एक्सरोस्टोमिया, कब्ज, डायरिया, स्खलन में गड़बड़ी, कमजोरी, कंपन, डायपरोसिस, सीने में दर्द, व्याकुलता, उच्च रक्तचाप, टैचीकार्डिया, घबराहट, चिंता, असामान्य सपने, एकाग्रता में गड़बड़ी, भूलने की बीमारी, चक्कर, भ्रम, ठंड लगना, ऑर्गैजिकिक अशांति, डिस्मानोरेहोआ, आहार, भूख, अपच, पेट फूलना, पेट में दर्द, भूख में वृद्धि, उल्टी, स्वाद में विकृति, वजन बढ़ना, नपुंसकता, जननांग विकार, मूत्र आवृत्ति, यूटीआई, पेरेस्टेसिया, मायलागिया, पीठ दर्द, माइकोलोनस, मिओपैथी, मायस्थेनिया, आर्थरालिया, धुंधला दृष्टि, असामान्य दृष्टि, टिनिटस, श्वसन विकार, ग्रसनीशोथ, साइनसिसिस, राइनाइटिस, संक्रमण आदि।

Sertraline: हेपेटाइटिस, यकृत की विफलता, पीलिया, अग्नाशयशोथ, स्टेटामाइटिस, हाइपरकोलेस्ट्रोलाइमिया, टाचीकार्डिया, ब्रोन्कोस्पासेम, पोर्शियल हाइपोटेंशन, भूलने की बीमारी, पैरेस्टेसिया, आक्रामकता, हाइपोथायरॉडीज़्म, लियूकोपैनिआ, हाइपोग्लाइसीमिया, मासिक अनियमितताएं, मूत्र असंयम, हाइपरप्रोलेक्टिनाइमिया, टिनिटस।

Venlafaxine: व्यवहार में बदलाव, आत्महत्या के विचार आना, झटके, घबराहट, चिंता, अनिद्रा, भ्रम, असामान्य सपने, मितली, सिरदर्द, चक्कर आना, सूखे मुंह, उल्टी, कब्ज, दस्त, अपच, पेट दर्द, आहार, यौन रोग, मूत्र आवृत्ति, दृश्य गड़बड़ी, वैसोडिलेटेशन, पैरासेथेसिया, हाइपरटोनिया, ठंड लगना या बुखार, धड़कनना, मायलाजिया, टिनीटस, डिस्पनिया, जलन, चक्कर, पसीना, सीरम कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि, प्लेटलेट जमाना खराब हो सकता है।

  1. एंटीडिप्रेसंट लेने के बाद कब से असर दिखाते हैं?
  2. कुछ लोगों को 2-3 सप्ताह में में और कुछ को 2-3 महीने बाद असर दिखता है।
  3. मुझे कब तक एंटीडिप्रेसंट लेना चाहिए?
  4. यह डॉक्टर की सलाह के बाद ठीक से बताया जा सकता है। ज्यादातर लोगों को 6 से 12 महीने तक डिप्रेशन की दवा लेने की सलाह दी जाती है।

एंटीडिप्रेसंट लेना छोड़े कैसे?

एंटीडिप्रेसंट दिमाग पर काम करते हैं। आप इन्हें ऐसे ही एकाएक बंद नहीं कर सकते। ऐसा करने से चक्कर आना, उलटी, दस्त, बीमार लगना आदि लक्षण हो सकते हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर मात्रा में कम करते हुए इसे बंद करें।

इसे भी पढ़ें -  अल्जाइमर रोग : कारण, लक्षण और उपचार | Alzheimer's Disease

डिप्रेशन हो जाए तो क्या करें?

  1. हमारे दिमाग में खुश रहने पर अच्छे केमिकल और उदास रहने पर बुरे केमिकल्स बनने लगते हैं। इसलिए कोशिश करें कि खुश रहें।
  2. लोगों से मिले जुलें और बात करें।
  3. घूमने जाएँ और उजाले वाले घर में रहें। सूरज की प्राकृतिक रौशनी भी डिप्रेशन को कम करती है।
  4. योगासन और प्राणायाम करने से, सकारात्मक सोच रखने से जीवन में खुश रहने से तथा बेहतर आत्मविश्वास से डिप्रेशन को दूर करने में मदद होती है।
  5. अपने को व्यस्त रखने से और वे काम करने से जिनसे ख़ुशी मिलती हो, से भी डिप्रेशन से दूर रहा जा सकता है।
Loading...

2 Comments

  1. Hello please muje depression se bhar niklne ki mediations btao. M bhut presan hu itni presan ki muje jine ka birkul maan nhi h. Mera kisi se baat krne ka maan ni hota jo baate hoyi nhi ya hogyi h m unko soch soch k presan rehti hu imagination ki duniya m kho jatihu kabhi kabhi maan krta h sosaid krlu ye sb soch k mere sir pe dard hota h. Bhut dukhi hu zindgi se.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!