अंडकोष टेस्टिस (वृषण) की जानकारी Testes Information

अंडकोष का सही आकार कैसा होता है, नामांकित चित्र द्वारा अंडकोष का वर्णन, अन्डकोशों के कार्य, क्यों लटके हॉट है और अंडकोष का छोटापन तथा उनका ढीलापन।

पुरुषों के प्रजजन अंगों में वृषण को टेस्टिस, फ़ोता, शुक्र ग्रन्थि, टेस्टाकुलस, अंडकोष या वीर्यकोष भी कहते हैं। Testes (singular: testis),दो कोमल और अंडाकार, बॉल जैसी संरचनाएं जोड़ी में होते हैं। यह उदर गुहा के बाहर एक थैलीनुमा सैक में लटके हुए होते हैं जिसे वृषणकोष या सक्रोटम या स्क्रोटल सैक Scrotal sac कहते हैं। वृषणकोष या सक्रोटम, शरीर के कुछ दूरी पर टांगों के बीच और पेनिस के आधार पर जुड़ता है।

Loading...
अंडकोष की जानकारी

टेस्टिस में अनेक कुंडलित नालिकायें होती हैं जिन्हें शुक्रजनन नलिकाएं semniferous tubules कहते हैं। टेस्टिकल के अंदर ही स्पर्म बनते हैं। यह स्पर्म जीवित कोशिकाएं हैं और पेनिस से स्खलन होने पर बाहर आते हैं। मादा प्रजजन अंग में यह आगे बढ़ते हुए अंडाणु तक पहुँच कर उसे निषेचित करते हैं। निषेचित अंडाणु ही विकसित होकर शिशु के रूप में जन्म लेता हैं।

हालांकि वृषण का आकार भिन्न होता है, अनुमान है कि 21.9% पुरुषों में बाएं अंडकोष थोड़े ऊपर होते है, जबकि 27.3% पुरुष ने अंडकोष के समान उंचाई पर होते हैं।

टेस्टिकल के विकास के दो चरण होते हैं, जिनमें वृषण काफी हद तक बढ़ते हैं; अर्थात् भ्रूण और यौवन की आयु में। प्युबर्टी में जब शुक्राणुजनन की शुरुआत होती है टेस्टिकल तेजी से बढ़ते हैं। प्युबर्टी के बाद, वृषणों का वॉल्यूम पहले के आकार आकार की तुलना में 500% से अधिक बढ़ सकता है। यौवन तक पहुंचने से पहले टेस्टिकल पूरी तरह से उभर आते हैं।

अंडकोष (टेस्टिकल) क्या हैं?

वृषण, जिसे आमतौर पर अंडकोष के रूप में जाना जाता है, पुरुष प्रजनन प्रणाली में प्रजनन और पुरुष हॉर्मोन के लिए जिम्मेदार होती हैं।

वृषण शुक्राणु कोशिकाओं के उत्पादन और पुरुष सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन के लिए जिम्मेदार हैं। वृषण एक पुरुष के जीवनकाल में लगभग 12 खरब शुक्राणु उत्पन्न करते हैं, जिनमें से लगभग 400 मिलियन एक एकल स्खलन में जारी होते हैं।

इसे भी पढ़ें -  योनि के कैंडिडिआसिस Vaginal Candidiasis की जानकारी और इलाज

अंडकोष के खोखले थैले में स्थित, प्रत्येक वृषण 1.5 से 2 इंच लंबे और व्यास के करीब 1 इंच के होते हैं।

अंडकोष लटके हुए क्यों होते हैं?

Loading...

टेस्टिकल शरीर के अंदर नहीं होते बल्कि यह सैक में लटकते रहते है। शरीर के अधिक ताप से स्पर्म उदर गुहा में परिपक्व नहीं हो सकते। इन स्पर्म सेल्स के मेचुरेशन के लिए कम तापमान चाहिए। इसलिए मेल्स में टेस्ट्स शरीर के बाहर थैले में होते हैं।

वृषण कोष का तापमान शरीर के नार्मल तापमान से 3 डिग्री कम बना रहता हैं। स्क्रोटल सैक तापक्रम को नियमित करने का काम करते हैं।

स्क्रोटल सैक, सर्दियों में सिकुड़ जाते हैं और गर्मियों में ढीले हो जाते हैं।

सर्दियों में तापमान कम हो जाता जिससे डारटॉस पेशी सिकुड़ जाती है और वृषणकोष छोटा हो जाता है जिससे त्वचा मोटी हो जाती हैं, साथ ही क्रीमेस्टर पेशियाँ स्क्रोटम को शरीर के पास खीच लेती हैं जिससे शरीर का ताप भी टेस्ट्स तक जाता है और सैक का तापमान सही बना रहता है।

गर्मियों में पेशियाँ ढीली होजाती हैं और तापमान समान बना रहता है।

टेस्टिकल क्यों होते हैं, क्या काम करते हैं, इनका महत्व क्या है?

टेस्टिकल शुक्राणु और एण्ड्रोजन दोनों का उत्पादन करते हैं।  वृषण के प्राथमिक कार्य में शुक्राणु (शुक्राणुजनन) का उत्पादन करना और एण्ड्रोजन का उत्पादन करना है।

यह दोनों कार्य एंटीरियर पिट्यूटरी द्वारा निर्मित गोनोडोट्रोपिन हार्मोन से प्रभावित होते हैं। ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच) Luteinizing hormone (LH) से टेस्टोस्टेरोन रिलीज होता है। टेस्टोस्टेरोन से वृषण का वॉल्यूम नियंत्रित testicular volume होता है। शुक्राणुजनन होने के लिए टेस्टोस्टेरोन और फोलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (एफएसएच) follicle-stimulating hormone(FSH) दोनों की उपस्थिति की आवश्यकता है।

टेस्टोस्टेरोन

टेस्टोस्टेरोन, मेल सेक्स हॉर्मोन है जो की पुरुष के शरीर में बहुत ही महत्वपूर्ण काम करता है। यह पुरुष के शरीर में बालों का डिस्ट्रीब्यूशन, बोन मॉस, मसल्स मास, फैट का डिस्ट्रीब्यूशन, आवाज़, समेत सेक्स ड्राइव, और स्पर्म के बनने का भी कारण है।

इसे भी पढ़ें -  प्रेगा न्यूज़ - प्रेगनेंसी पता लगाने के लिए

लड़कों में यौवनावस्था में होने वाले परिवर्तन जैसे की मूंछ, दाढ़ी आना, आवाज़ बदल जाना, अचानक से हाइट बढ़ जाना, इन्द्रिय का आकार बढ़ जाना आदि इसी हॉर्मोन के कारण होता है।

  • यह पुरुषों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • यह मांसपेशियों-हड्डियों की ताकत के लिए अनिवार्य है।
  • यह सेक्स ड्राइव को बनाये रखने, स्पर्म काउंट और फर्टिलिटी के लिए आवश्यक है।

शुक्राणुजनन Spermatogenesis

शुक्राणुजनन या स्परमेटोजेनिसिस, सेमिनीफेरौस ट्यूब्यूल में होता है। सेमिनीफेरौस ट्यूब्यूल प्रत्येक वृषण का मुख्य भाग होते हैं। शुक्राणुजनन की प्रक्रिया यौवन से शुरू होती है, जिसके बाद एक आदमी में पूरे जीवनभर शुक्राणु लगातार उत्पन्न होते है।

स्पर्मेटोजोआ उन वेसेल में बनते हैं जो टेस्टिकल के अंदर सोमनीफेरस ट्यूबयूल में होते हैं।

शुक्राणु का उत्पादन हार्मोनली संचालित होता है। मस्तिष्क हार्मोन द्वारा शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करता है जबकि शुक्राणुओं का निर्माण पुरुष जननांग के अंदर होता है ।

मस्तिष्क के भीतर, हाइपोथैलेमस और एंटीरियर पिट्यूटरी, शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करते हैं। हाइपोथैलेमस गोनैडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन (जीएनआरएच GnRH) का स्राव करता है, जो एंटीरियर पिट्यूटरी ग्रंथि पर काम करता है,उसे उत्तेजित करता है और फोलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (एफएसएच) और लूटिनिंग हार्मोन (एलएच) follicle stimulating hormone (FSH) and leutinizing hormone (LH) को स्रावित करने के लिए प्रेरित करता है। एफएसएच और एलएच खून में जाकर केवल टेस्ट्स की वीर्यकारक नलिकाओं seminiferous tubules पर काम करते हैं और स्पर्म के निर्माण को शुरू कराते हैं। यही टेस्ट्स की लेडिग सेल्स से टेस्टोस्टेरोन का निर्माण भी कराते हैं।

स्पर्म बन जाने पर, एपिडाइमिस और वास डिफरेंस में परिपक्व होने लगते हैं।

यह ट्यूबें अंततःपेनिस की मूत्रमार्ग की नली से शरीर से बाहर निकलते हैं। स्पर्म स्खलन के दौरान मूत्रमार्ग से स्त्री के प्रजनन पथ में डाले जाते हैं।

पुरुष शरीर के भीतर उत्पादन और परिपक्वता की पूरी प्रक्रिया में करीब 74 दिनों तक का समय लगता है। लेकिन इसका सामान्य औसत समय लगभग 9 सप्ताह है।

इसे भी पढ़ें -  जी-पिल का उपयोग और नुकसान g pill Emergency Contraceptive

शुक्राणुजनन को प्रभावित करने वाले कारक

  • शुक्राणुओं की संख्या Sperm counts 35 वर्ष की उम्र से धीरे-धीरे घट जाती है।
  • कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान शुक्राणुओं की संख्या को कम कर सकता है।
  • टेस्टिकल शरीर के तापमान से थोड़ा कम तापमान पर सबसे अच्छा काम करता है। कम और उच्च तापमान पर शुक्राणुजनन कम हो जाता है।

शुक्राणुओं की संख्या में सुधार करने के लिए:

  • रासायनिक एक्सपोजर कम करें।
  • आहार में सुधार करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • पोषण की खुराक लें ।

पुरुष प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए हर्बल सहायकों जैसे दूध, घी, मक्खन, अश्वगंधा, कौंच, कद्दू के बीज, आदि लेने की कोशिश करें।

अंडकोश की बीमारियाँ और समस्याएँ

1- टेस्टिकुलर टॉर्जन: टेस्टिकुलर टॉर्जन होने के कई कारण हैं जिसमें से चोट लगना, संयोजी ऊतक में दोष, भारी व्यायाम आदि प्रमुख हैं। शिशु के पहले वर्ष और किशोरावस्था (यौवन) की शुरुआत में स्थिति अधिक आम है। हालांकि, यह वृद्ध पुरुषों में हो सकता है।

वृषण में अचानक गंभीर दर्द, वृषण के अंदर सूजन, वीर्य में रक्त, उलटी अथवा मितली, चक्कर आना, सामान्य से अधिक उंचाई पर अंडकोश, टेस्टिकुलर टॉर्जन के लक्षण है। वृषण के लिए चोट से बचने के लिए कदम उठाएं। कई मामलों को रोका नहीं जा सकता।

2- हाइड्रोसील: पुरुषों का वह रोग जिसमें एक या दोनों अंडकोषों testes में पानी भर जाता है उसे हाइड्रोसील कहते हैं। नवजात शिशुओं में हाइड्रोसील होना आम है। गर्भ में बच्चे के विकास के दौरान, अंडकोष Testicle पेट से ट्यूब के माध्यम से अंडकोश की थैली (वृषणकोश scrotum) में उतरते हैं। हाइड्रोसील तब होता है जब यह ट्यूब बंद न हो।

3- वेरिकोसील: किशोरावस्था के दौरान सबसे ज्यादा देखा जाता है जब टेस्ट्स सबसे अधिक विकसित होते हैं और वृषण को अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक रक्त की आवश्यकता होती है। चूंकि अधिक रक्त टेस्टेस में जा रहा होता है, इसलिए अधिक खून को यहाँ से निकाला भी जाना चाहिए।

इसे भी पढ़ें -  स्टेसिस डार्माटाइटिस (gravitational eczema) क्या है?

4- अंडकोषों की चोट: अन्य दुर्घटनाओं से कट या अंडकोश की थैली में छेद हो सकता है और अंडकोष घायल हो सकते हैं। ये चोटें जानवर के काटने, गोली के घाव, और मशीनरी की दुर्घटनाओं में शामिल हैं।

5- मोनोरचिज़म: मोरोज विज्ञान एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुष का केवल एक वृषण होता है। इसमें कई कारण हो सकते हैं। इस स्थिति में भंग भ्रूण के विकास का नतीजा हो सकता है, या विभिन्न कारणों से जीवन में बाद में एक वृषण निकल सकता है।

6- अनोर्चिया: अनोर्चिआ एक जन्मजात स्थिति है जिसमें एक मेल फीटस में गर्भ के भीतर ठीक से टेस्टिकल का निर्माण ही नहीं होता। इसमें प्युबर्टी से पहले सब नार्मल कगता है लेकिन समय पर प्युबेर्टी के लक्षण जैसे पेनिस का विकास होना, प्यूबिक बाल आना, आवाज़ बदल जाना और मांसपेशियों का विकास होना आदि नहीं होते।

Loading...

23 Comments

  1. Mam mere andkosh ki right goli niche latak gyi hai usme koi sujan vgera nhi hai kai baar bahut dard hota hai

  2. hello mam mera right andkosh thoda bada h koit problm to nahi h?

    • शालिनी

      nahin

      • Shrikant Manjrekar

        हॅलो मॅम,
        मेरे अंडकोष के दोनों व्रुषणों की साईज बढती नहीं है तथा वह बहुत छोटे हैं। कुछ साल पहले उंची जगह से छलांग मारने पर वहाॅं बहुत दर्द हुआ था। कई दिनों तक मुझे दर्द होता रहा। इसपर मैने कोई भी दवा नहीं की थी। लेकिन मॅम मेरी समस्या यह है के व्रुषण छोटे होने के कारणवश वीर्य तैय्यार नहीं होता है और अगर वह होता है तो पतला और बहुत कम मात्रा में होता है। इस वजह से मैं अबतक शादी नहीं कर पा रहा हूं। क्रुपा करके मेरे इस समस्या का समाधान किजिएगा, कोई भी आयुर्वेदिय उपाय सुझाएॅं। और एक बात मै आपको बताना चाहता हूं के मेरे टेस्टेस्टेराॅन का लेवल भी बहुत ही कम मात्रा में घट चुका है। उपाय बताएॅं।

  3. Mam mere undkos ladke hue he meri age 24 he kya esse muje koi problem ho Sakti he

  4. Madam mera aund ek niche hai usme pani bhara huvaa hai isse sex kam hota hai kyaa
    Or sex karte time jaldhi hi veer llik hota hai
    Iska upay bata o

  5. i have no testes but sperm made. what should i do.

  6. Madam mera andakosh hamesha niche hi latakta rahata hai usse muze bohot pareshani hoti hai koi uppay bat plz…

  7. My left testis is big in size

  8. Mere varicocele kA operation hua h Lekin operation k bad bhi mere dard rahta he or andkosh ka dilapan iska ilaj batao sir

  9. Sir ji mera sukranu bilkul nil aa rahe hai me kone si dawa lu jisse shukranu ki sandhiya bad jaye please bataye sir ji please

  10. varicocele ka opresance karwane ke kitne din bad mw tik ho jauga plz mem bta dena

  11. mera ek aandkos ucha h ek nicha me kya karu

  12. My left testis is very small in size

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!