शुक्राणु : संरचना, संख्या और सम्बंधित जानकारी

जानिये शुक्राणु क्या होता है और शुक्राणु की संरचना कैसी होती है। शुक्राणु की संख्या कितनी होनी चाहिए और शुक्राणु कैसे बनते है तथा बच्चों का लिंग शुक्राणुओं से कैसे निर्धारित होता है।

पुरुष के शुक्राणु और स्त्री के अंडाणु के मिलने पर नए जीवन की शुरुआत होती है। प्रजनन के लिए केवल एक ही शुक्राणु का अंडाणु से मिलना ज़रूरी है। लेकिन ऐसा संभव हो सके इसलिए वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या लाखों में होनी चाहिए। कम संख्या में होने या सही आकार-प्रकार के शुक्राणु नहीं होने पर संतानहीनता देखी जाती है।

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शुक्राणु

संतान के लिए स्त्री और पुरुष दोनों ही जिम्मेदार हैं। स्त्रियों में जहाँ संतान नहीं होने के कई कारण हो सकते हैं वही पुरुष में इसके केवल दो कारण संभव हैं, पहला नपुंसकता और दूसरा वीर्य में शुक्राणुओं Sperms से सम्बंधित समस्या। शुक्राणु की संख्या, शेप, साइज़ और गति सभी कुछ फर्टिलिटी को प्रभावित करते हैं।

मानव वीर्य या सीमन Semen की कई विशेषताएं हैं। सभी पुरुषों में वीर्य semen एक जैसा नहीं होता। इसकी गुणवत्ता और मात्रा हर पुरुष के लिए समान नहीं होती। पुरुषों में शुक्राणु कोशिकाओं के उत्पादन की मात्रा व्यापक रूप से अलग होती है। औसतन, हर बार जब कोई पुरुष स्खलित होता है तो लगभग 100 मिलियन शुक्राणुओं को रिलीज करता है । कुछ में इससे ज्यादा तो कुछ में इससे कम स्पर्म हो सकते हैं। कुछ में स्पर्म होते ही नहीं और इसे निल शुक्राणु की समस्या कहते हैं। स्पर्म की संख्या के बाद उनमें गति भी बहुत महत्वपूर्ण है। अच्छी मोटेलिटी नहीं होने पर शुक्राणु अंडाणु तक नहीं पहुँच सकते। स्वस्थ्य पुरुष में 80 % शुक्राणु गतियुक्त होते है।

शुक्राणु या स्पर्म क्या है?

  • शुक्राणु अत्यंत ही सूक्ष्म, जीवित पुरुष जनन कोशिकाएं हैं।
  • शुक्रकीट माइक्रोस्कोप के द्वारा हिलते डुलते देखे जा सकते हैं।
  • यह केवल एल्कलाइन / क्षारीय दशा में ही जीवित रह सकते हैं। अम्लता / एसिडिक मीडियम, इन्हें नष्ट कर देती है।
  • प्रोस्ट्रेट ग्रन्थि से वीर्य में मिलने वाला पदार्थ, एल्कलाइन, चिकना और पतला होता है जिससे शुक्रकीट आसानी से चल सकें।
  • जब तक शुक्राणु, पुरुष जनन पथ में रहते हैं इनमें गति नहीं होती। लेकिन स्खलन ejaculation के बाद यह आगे की ओर तेज़ी से बढ़ते हैं। अपनी गति के कारण ही यह शुक्राणु योनि से गर्भाशय की ग्रीवा और फिर नलिका में पहुँच जाते हैं।
  • शुक्राणु महिला के जननमार्ग में केवल कुछ घंटे से लेकर 1-2 दिन तक ही जीवित रह पाते हैं।
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 शुक्राणु कितना समय जीवित रहते हैं?

इसका उत्तर कई चीजों पर निर्भर करता है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि शुक्राणु कहाँ हैं।

कपड़ों या बिस्तर, पर शुक्राणु, वीर्य के सूखने के साथ ही नष्ट हो जाते हैं।

पानी में, जैसे गर्म स्नान या गरम टब, में वे कुछ अधिक समय तक जीवित रहे सकते हैं क्योंकि वे गर्म, गीली जगह पर जीवित रह सकते हैं। लेकिन पानी के टब या स्विमिंग पूल में से वे किसी महिला के शरीर में जा कर उसे प्रेग्नेंट कर देंगे ऐसा संभव नहीं है।

महिला के शरीर में जाने के बाद वे फर्टाइल ग्रीवा द्रव में करीब 5 – 7 दिन तक जीवित रह सकते हैं। इसलिए कुछ महिलाओं में जिनका मासिक कम दिनों पर आ जाता है, में पीरियड के दौरान भी अनप्रोटेक्टेड सेक्स करना सेफ नहीं रहता क्योंकि ऐसे में जब ओवुलेशन होता है, 5 दिनों से जीवित स्पर्म निषेचन कर सकता है।

अंडे तक पहुंचने के लिए शुक्राणु को कितना समय लगता है?

करीब 12 घंटे तक लग सकते हैं।

स्त्री ओवा / अंडाणु, कितनी देर तक शुक्राणु की प्रतीक्षा करता है?

लगभग 12-24 घंटे। अंडा 12-24 घंटों तक उपलब्ध रहता है, और शुक्राणु पांच से सात दिनों तक जीवित रह सकते हैं।

एक बार स्खलन के बाद आदमी के नार्मल स्पर्म काउंट पर आने में कितना समय लगता है?

हालांकि, अंडकोष हर समय नए शुक्राणु पैदा कर रहे हैं। अधिकतर पुरुषों के लिए, स्खलन करने और अपने सामान्य शुक्राणुओं की गणना में वापस आने के लिए 24 से 36 घंटों के बीच का समय लगता है।

आदमी के स्खलन होने पर पांच मिनट के बाद, कुछ शुक्राणु तैयार रहते हैं जो अगले एजाकुलेशन में जा सकते हैं।

एजकुलेशन या स्खलन के दौरान कितने मिलियन स्पर्म निकलते हैं?

एवरेज के हिसाब से यह कहा जा सकता है कि पुरुष के हर स्खलन में 2 मिलीलीटर से 5 मिलीलीटर वीर्य पेनिस से निकलता है और करीब प्रत्येक मिलीलीटर में 20 मिलियन से 300 मिलियन शुक्राणु कोशिकाओं sperm cells से हो सकती है।

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इसका मतलब है कि फर्टाइल व्यक्ति के एक बार स्खलित होने पर करीबन 40 मिलियन से 1800 मिलियन स्पर्म्स निकलते है। हालांकि मैक्सिमम मेल्स में प्रति स्खलन औसतन कुल 80 से 300 मिलियन स्पर्म पाए जाते है।

Normal range for the number of sperm per milliliter: 40 million to 300 million. Counts of 20 million or more may be fine if motility and morphology are normal.

  • Low Sperm Count: less than 20 million sperm/ml (New WHO criteria suggest that even a sperm count of more than 15 million per ml is normal and men with this count should be considered as being fertile)
  • Poor sperm count: below 10 million per ml.
  • Very Low Sperm Count: less than 5 million per ml.

लेकिन केवल स्पर्म की संख्या ही केवल एकमात्र कारक नहीं है जो प्रजनन क्षमता निर्धारित करती है।

क्या सभी शुक्राणु कोशिकाएं समान होती हैं?

नहीं।

शुक्राणु एक काशाभिक कोशिका Flagellated Cell है जिसमें शिर, ग्रीवा, मध्य भाग और पूँछ होती है।

सिर Head: शुक्राणु का सिर वाला हिस्सा, एक सिरे पर अंडाकार और दूसरे सिरे चपटा होता है। अंडाकार सिरे की आगे की तरफ, ऐक्रोसोम हिस्सा होता है जो की एक प्रकार का एंजाइम छोड़ता है जिससे निषेचन हो सके। पिता की जेनेटिक जानकारी भी इसी हिस्से में होती है।

मध्य भाग Mid Piece: यह स्पर्म का पॉवर हाउस है। इसमें माइटोकोनड्रीया होता है जो स्पर्म को तैरने के लिए ताकत देता है।

पूँछ Tail: इसमें माइक्रोट्यूब्स होती है जो की स्पर्म को आगे की ओर धक्का देती हैं।

सभी मानव शुक्राणु कोशिकाओं समान नहीं दिखती। कुछ के पास दो सिर या कोई सिर नहीं होता। कुछ में बड़े सिर होते हैं, कुछ में छोटी पूंछ होती हैं या कोई पूंछ नहीं होती है। कुछ मुड़ें हुए होते है जबकि कुछ की पूँछ स्पाइरल होती है।

असामान्य शेप के स्पर्म फर्टाइल नहीं होते।

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शुक्राणुजनन Spermatogenesis क्या है?

स्पर्म के शरीर में बनने को स्पर्मेटोजेनेसिस कहते हैं।

पुरुष में स्पर्म शुक्राणु कोशिकाओं के साथ पैदा नहीं होते हैं। उनमें यौवन के बाद से स्पर्म बनने लगते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि, एक फीमेल निश्चित संख्या में एग के साथ पैदा होती है जो ओवरी में रहते हैं और यौवन आने पर हर महीने एक की मात्रा में यह ओवरी से निकलते हैं।

स्पर्मेटोजोआ उन वेसेल में बनते हैं जो टेस्टिकल के अंदर सोमनीफेरस ट्यूबयूल में होते हैं।

शुक्राणु का उत्पादन हार्मोनली संचालित होता है। मस्तिष्क हार्मोन द्वारा शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करता है जबकि शुक्राणुओं का निर्माण पुरुष जननांग के अंदर होता है ।

मस्तिष्क के भीतर, हाइपोथैलेमस और एंटीरियर पिट्यूटरी, शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करते हैं। हाइपोथैलेमस गोनैडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन (जीएनआरएच GnRH) का स्राव करता है, जो एंटीरियर पिट्यूटरी ग्रंथि पर काम करता है,उसे उत्तेजित करता है और फोलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (एफएसएच) और लूटिनिंग हार्मोन (एलएच) follicle stimulating hormone (FSH) and leutinizing hormone (LH) को स्रावित करने के लिए प्रेरित करता है। एफएसएच और एलएच खून में जाकर केवल टेस्ट्स की वीर्यकारक नलिकाओं seminiferous tubules पर काम करते हैं और स्पर्म के निर्माण को शुरू कराते हैं। यही टेस्ट्स की लेडिग सेल्स से टेस्टोस्टेरोन का निर्माण भी कराते हैं।

स्पर्म बन जाने पर, एपिडाइमिस और वास डिफरेंस में परिपक्व होने लगते हैं।

यह ट्यूबें अंततःपेनिस की मूत्रमार्ग की नली से शरीर से बाहर निकलते हैं। स्पर्म स्खलन के दौरान मूत्रमार्ग से स्त्री के प्रजनन पथ में डाले जाते हैं।

पुरुष शरीर के भीतर उत्पादन और परिपक्वता की पूरी प्रक्रिया में करीब 74 दिनों तक का समय लगता है। लेकिन इसका सामान्य औसत समय लगभग 9 सप्ताह है।

शुक्राणु लगातार अंडकोष के भीतर बन रहे हैं, तो क्या होगा अगर या आदमी के शरीर से बाहर नहीं निकाले जा रहे?

कुछ नहीं होगा। शुक्राणु शरीर में फिर से अवशोषित कर लिए जायेंगे।

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यह पुरुष नसबंदी के रोगियों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी बस ‘ट्यूब कट’ हुई होती है और शुक्राणु अभी भी बन रहे होते हैं, बस वे शरीर के बाहर नहीं आते और शरीर में भी अब्सोर्ब हो जाते है।

एक स्वस्थ्य आदमी दिन में कितनी बार औसतन सेक्स कर सकता है?

ऐसे तो यह व्यक्ति पर निर्भर है। लेकिन एक पुरुष में एक दिन में तीन या चार बार लिंग सेक्स संतुष्टि के साथ कर सकता है।

एक स्खलन में कितना ml वीर्य निकलता है?

औसतन 2 and 5 ml वीर्य। किसी व्यक्ति के शुक्राणु नमूने में, सारे शुक्राणु कोशिकाओं में 30 से 70 प्रतिशत स्पर्म गतिशील होते हैं (अर्थात, वे आगे बढ़ते हैं)।

क्या ओरल सेक्स से प्रेगनेंसी हो सकती है?

नहीं, ऐसा संभव नहीं है।

बच्चे का लिंग कैसे निर्धारित होता है?

  • पुरुष और स्त्री में क्रोमोजोम के 23 जोड़े होते है। 23 जोड़े में से एक जोड़ा जिव के जेंडर का निर्धारण करता है।
  • पुरुष में एक X और एक Y क्रोमोजोम होता है।
  • महिला में दो X क्रोमोजोम होते हैं।
  • सेक्स के दौरान पुरुष के स्खलन से लाखों स्पर्म स्त्री के जननागों में छोड़े जाते हैं। इन लाखों स्पर्म से केवल एक ही स्त्री के अंडाणु तक पहुँच पाता है। स्त्री के अंडाणु में केवल X क्रोमोजोम होता है। पुरुष के स्पर्म में से कुछ X क्रोमोजोम वाले और कुछ Y क्रोमोजोम वाले होते है।
  • बच्चे का जेंडर पिता से आने वाले स्पर्म पर निर्भर है। यदि अंडाणु को निषेचित करने वाला:
  • स्पर्म X है तो रिजल्ट XX होगा = लड़की
  • स्पर्म Y है तो रिजल्ट XY होगा = लड़का

बच्चे का जेंडर फर्टिलाइजेशन के समय ही निर्धारित हो जाता है। अब इसे बदला नहीं जा सकता। ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे प्रेगनेंसी शुरू होने के बाद बच्चे का जेंडर बदला जा सके।

स्‍पर्म डोनर कौन होता है?

स्पर्म डोनर वह पुरुष है जो अपने स्खलित वीर्य को स्पर्म बैंक में देता है ताकि इस वीर्य का इस्तेमाल उस कपल के लिए किया जा स्के जिसके स्पर्म नहीं होने के कारण बच्चे नहीं हो पा रहे या कोई औरत आर्टिफीशियल इनसेमीनेशेन से प्रेग्नेंट होना चाहती हो।

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स्‍पर्म डोनेशन Sperm donation क्या है?

स्‍पर्म डोनेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक पुरुष अपने स्खलन के दौरान निकले द्रव का दान करता है जिससे एक कपल को बच्चा पैदा करने में मदद हो सके।

मैं अपने शुक्राणुओं को स्वाभाविक रूप से कैसे बढ़ा सकता हूं?

शुक्राणुओं की संख्या में सुधार करने के लिए:

  • रासायनिक एक्सपोजर कम करें।
  • आहार में सुधार करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें।
  • पोषण की खुराक लें ।
  • पुरुष प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए हर्बल सहायकों जैसे दूध, घी, मक्खन, अश्वगंधा, कौंच, कद्दू के बीज, आदि लेने की कोशिश करें।

शुक्राणुओं को जीवनशैली के द्वारा कैसे प्रभावित किया जा सकता है?

खराब जीवन सहिली और भोजन पूरे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। यह फर्टिलिटी को भी प्रभावित करते हैं। शोधों में अंडे और शुक्राणु की गुणवत्ता को कम करने के लिए कई कारक बताए गए हैं। जनन कोशिकाओं को बनने में लंबा समय लगता है, इसलिए फर्टिलिटी को ठीक करने के लिए जीवन शैली में बदलाव तुरंत बदलाव लाएं।

धूम्रपान

धूम्रपान करने से महिला और पुरुष दोनों की ही फर्टिलिटी कम हो जाती है। शुक्राणु की गुणवत्ता (शुक्राणु डीएनए क्षति में वृद्धि) के लिए धूम्रपान हानिकारक है और इससे निषेचन की क्षमता कम हो जाती है। इसलिए स्मोकिंग नहीं करें।

एनाबॉलिक स्टेरॉयड नहीं लें।

शराब

शराब नहीं पिएं इससे वीर्य फंक्शन प्रभावित होते हैं।

वजन

वजन अगर ज्यादा होता है तो फर्टिलिटी कम हो सकती है। उच्च बीएमआई से हार्मोनल गड़बड़ी हो सकती है।

वैज्ञानिक रूप से यह भी प्रमाणित किया गया है कि उच्च बीएमआई वाले पुरुषों में स्वस्थ वजन के पुरुषों की तुलना में कम संख्या में शुक्राणु या निल शुक्राणु होने की अधिक सम्भावना है।

भोजन

भोजन में जंक फ़ूड या नॉन हेल्थी खाना खाने से वज़न बढ़ता है और भोजन में मौजूद केमिकल शरीर में नेगेटिव असर डालते हैं। इससे कब्ज़ और पाचन की कमजोरी हो सकती है। इसलिए स्वास्थ्यवर्धक भोजन का सेवन करें। तले, भुने, खट्टे, मसालेदार भोजन न खाएं। पाचन की कमजोरी है, तो उसे अवश्य ठीक करें। यदि पाचन कमजोर होगा तो पौष्टिक, परन्तु भारी, स्निग्ध और मधुर बलवर्धक उपायों का सही से अवशोषण नहीं हो पायेगा। अपने पाचन की स्थिति के अनुसार ही उपायों की मात्रा तय करें।

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व्यायाम और प्राणायाम

रोज की जाने वाली एक्सरसाइज़ से स्ट्रेस कम होता है, वज़न कम होता है और ब्लड सर्कुलेशन ठीक से होता है। प्राणायाम से शरीर को ऑक्सीजन मिलती है जिससे बॉडी सेल्स पर एंटीऑक्सीडेंट असर होता है।

कीटनाशकों और भारी धातुओं जैसे विषाक्त पदार्थों के संपर्क से बचें। अंडकोष को ठन्डे रखें, क्योंकि गर्मी से शुक्राणु निर्माण धीमा हो जाता है। ऐसा करने के लिए, गर्म स्नान से बचें, ढीला कच्छा पहने। मोबाइल पैंट की जेब में नहीं रखें।

एक बार स्खलन होने के बाद, शुक्राणु स्त्री के जननअंगों में अंडे तक कैसे पहुँचते हैं, ये सही से कोई नहीं जानता है।

स्पर्मेटोजोआ जो सबसे स्वस्थ्य होते हैं वही आगे बढ़ते हैं। लाखों में निकले स्पर्म में से कोई एक एग तक पहुच पर इसे निषेचित करता है। निषेचित होते समय ही बच्चे का लिंग sex of child boy or girl और गुण निश्चित हो जाते हैं। महिलाओं में केवल XX तथा पुरुष स्पर्म में XY क्रोमोजोम होते हैं। यदि X क्रोमोजोम वाले स्पर्म से अंडाणु निषेचित होता है और लड़की XX Girl होती है और यदि यही Y क्रोमोजोम से हो तो लड़का Boy XY होता है।

महिला की योनि के आंतरिक छोर पर सर्विक्स होता है जो गर्भाशय की एंट्री है। योनि में म्यूकस होता है जो स्पर्म को आगे बढ़ने में मदद करता है। यह म्यूकस बहुत जटिल है। म्यूकस में हजारों फाइबर होते हैं जो अनगिनत संकीर्ण चैनलों द्वारा जटिल संरचना बनाते हैं। शुक्राणु कोशिका चैनलों के माध्यम से अपना रास्ता बना सकते हैं। शुक्राणु अपने पुच्छ भाग की कशाभीय गतियों (Flagellar movements) के द्वारा लगभग 5 मिमी प्रति मिनट की गति से अण्डवाहिनियों में ऊपर बढ़ते हैं। गर्भाशय ग्रीवा के म्यूकस की रासायनिक संरचना महिला चक्र के साथ बदलती रहती है, जिससे शुक्राणु का एग तक पहुंचना आसान या मुश्किल हो सकता है।

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10 Comments

  1. Sir mera spram 10 million h esey pragnancy ho skti h kya esey kese bhadu plz halp me sir

  2. क्या पुरुष मे X और Y दोनो होते है या केवल Y भी हो सकते हैं

  3. Active motile-39
    Sluggishly Motile-17
    Non motile-44
    Licocities other 4~5 hf
    Hai to kya sar kabhi mai bacha paida kar sakta hun please ansewer sar

  4. agar kisika 30 saal ke umra me sperm count 2 mil ho, to kya agar harroj milk,lasun,pyaj.akrod,shilajit……..ye sab khane se kya count bhadhane ke chances he?please ansewer.our kitana time lagega sperm count badhane ke liye.

  5. Sir me pichale teen mahine se pregnancy plan bana raha hun lekin nahi ho raha . Main pichle ek sal tak plan nahi kiya tha pichle teen mahine se hi plan kiye hai lekin meri wife pregnent nahi ho rahi. Upay batayiye

    • शालिनी

      कम से कम आप १ साल और तरी करिए, अगर फिर भी न हो तो किसी स्त्री रोग के डॉ को दिखाइए.

  6. sir ovary k ander sperm 1 hour rhne k baad bhar kyu aa jata h

  7. Sar mai aapne sex time ko kaise thik karu mera sex karte time andar karane me hi ho jata hai so please help me sar….. name subhash age 22 year

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