Low Sperm Count शुक्राणुओं की कमी जानकारी, दवाएं, उपचार

Learn how to increase sperm count naturally in hindi and what is low sperm count? Know some fast sperm increasing Ayurvedic medicines. जानिये लो स्पर्म काउंट क्या होता है, कम शुक्राणु का इलाज कैसे कराएँ, क्या आयुर्वेदिक दवाएं लो स्पर्म काउंट को ठीक कराती हैं।

अल्पशुक्राणुता को ऑलिगॉस्पर्मिया ( Oligospermia ), वह स्थिति है जिसमें पुरुष के वीर्य में कम शुक्राणु low sperm count पाए जाते हैं। वीर्य को सीमन semen और शुक्राणु, को इंग्लिश में स्पर्म कहा जाता है।

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स्पर्म्स जीवित सेल्स हैं जो की स्त्री में अंडाणु ova को निषेचित कर नए जीवन की शुरुवात करते हैं। शुक्राणु अत्यंत ही सूक्ष्म, जीवित पुरुष जनन कोशिकाएं हैं। यह एक काशाभिक कोशिका Flagellated Cell है जिसमें शिर, ग्रीवा, मध्य भाग और पूँछ होती है। जब तक शुक्राणु, पुरुष जनन पथ में रहते हैं इनमें गति नहीं होती। लेकिन स्खलन ejaculation के बाद यह आगे की ओर तेज़ी से बढ़ते हैं। अपनी गति के कारण ही यह शुक्राणु योनि से गर्भाशय की ग्रीवा और फिर नलिका में पहुँच जाते हैं।

ऑलिगॉस्पर्मिया, में वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या 20 मिलियन प्रति मिलीलीटर से कम पायी जाती है। इस स्थिति का तब पता चलता है जब एक साल तक असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने के बाद भी बच्चा नहीं ठहरता और दम्पति डॉक्टर की सलाह से टेस्ट कराते हैं। एक बार के परीक्षण से यह नहीं मान लिया जाता की पुरुष को अल्पशुक्राणुता है बल्कि दुबारा टेस्ट करवा जाता है। कम से कम तीन महीने में तीन टेस्ट कराए जाते हैं।

अल्पशुक्राणुता में कम वसा लेकिन उच्च प्रोटीन वाला आहार लेना चाहिए। ढीले-ढाले अंडरवियर पहनने चाहिए और मोबाइल को नीचे पॉकेट में नहीं रखना चाहिए।

पर्याय: अल्पशुक्राणुता, वीर्य में शुक्राणुओं की कमी होना

Oligospermia, a male fertility issue can be defined as a low sperm concentration or low sperm count in the ejaculate. World Health Organization (WHO) defined sperm count less than 20 million sperm/ml as Oligospermia. This condition can be due to varicoceles, testicular trauma, vasectomy, obstruction of the normal flow of sperm, infection, sexually transmitted diseases, hormonal disorders, diseases of the testicles, obesity, smoking, drug or alcohol use, some medications, toxins, malnutrition or stress।

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What is Low Sperm count अल्पशुक्राणुता क्या है?

What is Oligospermia?

अल्पशुक्राणुता या ऑलिगॉस्पर्मिया, वीर्य में कम शुक्राणुओं की संख्या के लिए मेडिकल टर्म है। यह पुरुषों में बांझपन के सबसे सामान्य कारणों में से एक है।

माइल्ड अल्पशुक्राणुता Mild Oligospermia: यदि शुक्राणु की एकाग्रता 10 मिलियन मिलियन हो। 10 million – 15 million sperm/mL

मध्यम अल्पशुक्राणुता Moderate Oligospermia: यदि शुक्राणु की एकाग्रता पांच से 10 मिलियन प्रति मिलिलिटर हो। 5 million – 10 million sperm/mL

गंभीर अल्पशुक्राणुता Severe Mild Oligospermia: यदि शुक्राणु की एकाग्रता पांच लाख प्रति मिलिलिटर से कम हो। less than 5 million sperm/mL

Symptoms of Low Sperm Count अल्पशुक्राणुता के क्या लक्षण हैं?

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What are the symptoms?

कारण के अनुसार कुछ अन्य लक्षण हो सकते हैं

  1. कम लिबिडो
  2. इरेक्शन में दिक्कत
  3. टेस्टिकल में दर्द
  4. शरीर पर बालों का कम होना

अल्पशुक्राणुता के क्या कारण है Reasons of Low Sperm Count?

What are the reasons for Oligospermia?

अल्पशुक्राणुता के लिए यूरोलोजिस्ट, प्रजनन विशेषज्ञ को दिखाते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं।

  1. कम टेस्टोस्टेरोन
  2. अंडकोष पर चोट
  3. अन्य संक्रमण जैसे मलेरिया और मम्प्स
  4. किसी सर्जरी से अंडकोष को नुकसान
  5. आयु और आनुवंशिक कारक
  6.  वासा डिफरेंस में रुकावट
  7. यौन संक्रमण
  8. वेरिकोसील
  9. प्रोस्ट्रेट में सूजन prostatitis
  10. नसबंदी
  11. ड्रग का उपयोग, अत्यधिक शराब पीना
  12. सिगरेट धूम्रपान
  13. कुछ प्रकार की दवाइयों का उपयोग
  14. बाइकिंग या घोड़े की सवारी
  15. गर्म स्नान या अंडरवियर के गलत प्रकार के चयन के कारण अंडकोष के अत्यधिक ताप
  16. मोटापा

अल्पशुक्राणुता से प्रजनन क्षमता कैसे प्रभावित होती है?

How Does Oligospermia Affect Fertility?

ऑलिगोस्पर्मिया (low sperm count ) से बच्चा होने में दिक्कत होती है। फर्टिलिटी की निर्भरता ऑलिगोस्पर्मिया की डिग्री और महिला साथी के स्वास्थ्य पर निर्भर होती है।

ऑलिगॉस्पर्मिया से पीड़ित कुछ पुरुषों में बच्चा होने में कोई दिक्कत नही होती लेकिन कुछ मामलों में फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की सहायता प्रजनन तकनीक, जैसे आईवीएफ और आईसीएसआई का सहारा लेना पड़ता पड़ता है।

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ऑलिगोस्पर्मिया का निदान कैसे किया जाता है?

How Is Oligospermia (low sperm count )Diagnosed?

प्रजनन विशेषज्ञ के साथ परामर्श के बाद, दंपती को कुछ मेडिकल टेस्ट लेने के लिए कहा जाता है। स्पर्मोग्राम spermogram जो कि प्राथमिक शुक्राणु परीक्षा है, में शुक्राणु और वीर्य की मात्रा, शुक्राणु एकाग्रता प्रति मिलीमीटर के रूप में मापी जाती है।

अक्सर, मूत्र विशेषज्ञ एक निश्चित अवधि के बाद परीक्षा दोहराते हैं क्योंकि कई बार शुक्राणुओं की संख अस्थायी रूप सेकम हो सकती है और बाद में यह सामान्य स्तर पर वापस आ जाती है।

उपचार के क्या विकल्प हैं?

What Are the Treatment Options?

  1. शुक्राणुओं की कमी का इलाज़ क्या होगा यह इसके कारण पर निर्भर है। शुक्राणु की कमी के विभिन्न कारणों में शामिल है:
  2. दवा के कारण Oligospermia due to drug therapy
  3. इन्फेक्शन के करण Oligospermia due to infection
  4. डक्ट में रुकावट के कारण Oligospermia due to obstruction of efferent ducts
  5. विकिरण के कारण Oligospermia due to radiation
  6. रोगों के कारण Oligospermia due to systemic disease
  7. टेस्ट्स में किसी प्रकार की दिक्कत Oligospermia due to other extratesticular causes
  8. यदि कारण की पहचान कर ली जाती है तो निवारण आसान हो सकता है।
  9. उपचार के लिए निम्न निर्देश दिए जा सकते हैं:
  10. धूम्रपान छोड़ना
  11. शराब न पीना
  12. कैफीन न पीना
  13. वज़न कम करना
  14. ढीले अंडरवियर पहनना
  15. जीवनशैली में बदलाव
  16. पोषण में सुधार
  17. उच्च प्रोटीन आहार
  18.  कम टेस्टोस्टेरोन से ग्रस्त पुरुषों के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी
  19.  वैरिकोसेले के मामले में सर्जरी

दवाएं जो लाभप्रद हैं:

  1. एसिटाइल एल कार्नीटाइन Acetyl-L-carnitine
  2. कार्नीटाइन Carnitine
  3. क्लोमिफेन साइट्रेट Clomiphene citrate
  4. एफएसएच उत्तेजक हार्मोन FSH Follicle-Stimulating Hormone
  5. एचसीजी Human chorionic gonadotropin HCG
  6. मेनोट्रॉपिंस Menotropin
  7. टेस्टोस्टेरोन Testosterone
  8. विटामिन ई, विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट Vitamin E, Vitamin C, anti-oxidants
  9. जस्ता Zinc

क्लोमिफेन साइट्रेट Clomiphene citrate एक नॉन स्टेरायडल प्रजनन दवा है। यह पिट्यूटरी ग्रंथि को उत्तेजित कर अंडाणु और स्पर्म के बनने के लिए आवश्यक हार्मोन को स्राव कराता है

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कार्नीटाइन, का सेवन फर्टिलिटी को बढ़ाता है। यह शुक्रानी की गति में वृद्धि करता है। इसके सप्लीमेंट्स उपलब्ध है।

एचसीजी, एक हार्मोन है जो पुरुष और महिला यौन विकास में विभिन्न भूमिका निभाता है। महिलाओं में एचसीजी, ओवुलेशन और प्रजनन क्षमता को प्रभावित करती है। पुरुषों में, चिकित्सक टेस्टोस्टेरोन उत्पादन को बढ़ाने या पुनर्स्थापित करने के लिए एचसीजी लिख सकते हैं।

मेनोट्रॉपिंस स्वाभाविक रूप से पाए जाने वाले फोलिकल स्टीमुलेटिंग हार्मोन (एफएसएच FSH) और ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (एलएच LH) को मिलाकर बनाया गया है। एफएसएच और एलएच स्त्री में अंडाशय से अंडों के विकास और पुरुष में शुक्राणु के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मेनोट्रॉपिंस का प्रयोग पुरुषों के शुक्राणुओं के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए किया जाता है, जिनमें टेस्टीस तो सही काम कर रहे होते हैं, लेकिन जिनमे हार्मोनल उत्तेजना FSH,LH कम है।

जिंक | जस्ता, फर्टिलिटी को बढ़ाता है। जिंक सप्लीमेंट (100 से 200 मिलीग्राम प्रतिदिन) खाने से टेस्टोस्टेरोन के स्तर, शुक्राणुओं की संख्या और शुक्राणु गतिशीलता बढ़ती है। प्रक्रितक रूप से जिंक कद्दू के बीजों, लहसुन, तिल के बीज, तरबूज के बीज, दूध-दही, काजू, खजूर आदि में पाया जाता है। आयुर्वेदिक दवा यशद भस्म भी जिंक की दवा है।

प्रक्रियाएं जो ऑलिगोस्पर्मिया का इलाज नहीं करती हैं, लेकिन गर्भावस्था प्राप्त करने में सहायता करती हैं:

  1. अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान
  2. अधिक गंभीर मामलों में आईवीएफ और आईसीएसआई

यदि टेस्टोस्टेरोन कम हो तो कौन सी जड़ी बूटियां लेनी चाहिए?

  1. टेस्टोस्टेरोन के निम्न स्तर से पीड़ित पुरुषों में निम्न के सेवन से बहुत सुधार हो सकता है:
  2. गोखरू काँटा Tribulus terrestris
  3. सॉ पालमेटो Saw Palmetto
  4. अश्वगंधा Ashwagandha
  5. कौंच Kaunch
  6. जिन्सेंग Ginseng
  7. मूसली Indian Ginseng | Musli
  8. चोप चीनी Chop Chini
  9. सरिवा Sariva
  10. आयुर्वेदिक दवाएं जैसे की Ashwagandha Churna, Vanari Kalpa, Himalaya Speman, Kevanch, आदि का सेवन भी किया जा सकता है।

कौन सा भोजन टेस्टोस्टेरोन सामान्य करने के लिए लाभकारी है?

  1. जिंक युक्त आहार लें।
  2. कद्दू, सूर्यमुखी के बीजों का सेवन करें।
  3. सोयाबीन खाएं।
  4. लहसुन, मशरूम को भोजन में शामिल करें।
  5. विटामिन बी 6, बायोटिन लें।
  6. चवनप्राश खाएं।
  7. उच्च प्रोटीन आहार खाएं।
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कुछ अन्य उपयोगी सुझाव

  1. दूध, घी, मक्खन, केला, खजूर आदि वीर्यवर्धक आहारों का सेवन अवश्य करें।
  2. जंक फ़ूड न खाएं।
  3. तले, भुने, खट्टे, मसालेदार भोजन न खाएं।
  4. खूब पानी पियें।
  5. एक्सरसाइज करें।
  6. तनाव कम करें।
  7. कब्ज़ न रहने दें। इसके लिए हरीतकी चूर्ण अथवा त्रिफला चूर्ण का रात को सोने समय सेवन करें।
  8. पाचन सही रखें।

पाचन की कमजोरी है, तो उसे अवश्य ठीक करें। यदि पाचन कमजोर होगा तो पौष्टिक, परन्तु भारी, स्निग्ध और मधुर बलवर्धक उपायों का सही से अवशोषण नहीं हो पायेगा। अपने पाचन की स्थिति के अनुसार ही उपायों की मात्रा तय करें।

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