लेट्रोजोल Letrozole जानकारी हिंदी में

लेट्रोज़ोल का उपयोग आमतौर पर एक बांझपन infertility उपचार के रूप में किया जाता है। लेट्रोजोल एक कंट्रोवेर्शिअल दवा है। अमेरिका में दवा के लेबल पर लिखा है कि इससे बिर्थ डिफेक्ट हो सकते हैं। लेट्रोजोल को किन रोगों में प्रयोग करते हैं? लेट्रोजोल के साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं?

लेट्रोजोल Letrozole 2.5 मिलीग्राम या फेमरा, Letrozole in Hindi एक ओरल दवाई है जिसे ओवुलेशन समस्याओं वाली महिलाओं या अस्पष्टीकृत बांझपन में दिया जाता है। यह दवा एरोमाटेज़ इनहिबिटर aromatase inhibitors नामक दवाओं की श्रेणी में आती है। लेट्रोजोल का मुख्य रूप से स्तन कैंसर के कुछ मामलों का इलाज करने के लिए उपयोग किया जाता है।

लेट्रोज़ोल का उपयोग आमतौर पर एक बांझपन infertility उपचार के रूप में किया जाता है। क्लॉमिड, सेरोफेनी, clomiphene citrate कई वर्षों तक ओव्यूलेशन प्रेरण या सुपरोवलेशन के लिए पहली पसंद की दवा रही है। सामान्य तौर पर, क्लोमिड एक अपेक्षाकृत प्रभावी दवा रही है लेकिन इसके शरीर में लंबे समय तक रहने वाले असर से गर्भाशय ग्रीवा के म्यूकस और गर्भाशय के अस्तर cervical mucus and uterine lining पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। पीसीओएस – पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम, में क्लोमिफिन साइटट्रेटसे अच्छे रिजल्ट नहीं मिलते। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के लिए गए अध्ययन में पाया गया कि 6 माह से अधिक समय में, 4 में से एक मामले में क्लोमिफिन देने से ओवुलेशन नहीं हुआ। क्लॉमिड से गर्भावस्था नहीं ठहरने का कारण गर्भाशय की लाइनिंग पर खराब असर हो सकता है।

लेट्रोजोल एक कंट्रोवेर्शिअल दवा है। अमेरिका में दवा के लेबल पर लिखा है कि इससे बिर्थ डिफेक्ट हो सकते हैं।

लेट्रोजोल को 2011 से पहले तक इनफर्टिलिटी के उपचार में प्रयोग किया जाता था। 2011 तक, स्त्रीरोग विशेषज्ञ इसे एक फर्टिलिटी ड्रग की तरह इस्तेमाल इसका कर रहे थे, ताकि उन महिलाओं में जो ओवुलेशन नहीं होने के कारण इनफर्टिलिटी से जूझ रही हैं, में बच्चा हो सके। दवा से होने वाले दुष्प्रभावों के कारण 2011 में इसे भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया। कैनेडियन ड्रग रेगुलेटर और नोवार्टिस ने स्त्रीरोग विशेषज्ञों को चेतावनी दी कि वे महिला बांझपन के लिए इस दवा का दुरुपयोग न किया जाए। 150 गर्भावस्था पर शोध से पता चला कि Letrozole के सेवन के बाद हुए बच्चों को हड्डियों के विकृतियों, कार्डियक स्टेनोसिस और कैंसर से पीड़ित थे। ऐसा संदेह है कि इस दवा के दुष्प्रभावों के कारण फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बाद महिला से जन्मे बच्चों में गंभीर आनुवंशिक असामान्यताओं हो सकती है।

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लेट्रोजोल का भारत में 37 करोड़ रुपये का बाजार है जो सालाना 35% से बढ़ रहा है। सन फार्मा द्वारा बनाई जाने वाली लेट्रोज़ और लिटोवल Letroz and Letoval जैसे ब्रांड काफी मांग में हैं। अन्य फार्मा कम्पनी Oreta (Dr Reddys), Letz (Chemech) and Shantroz (Shantha Biotech) भी इसे बना रही हैं।

उस समय 2011 की केंद्र सरकार ने इस बात को मानते हुए कि ओवुलेटरी बांझपन में, गर्भधारण के लिए इस दवा का उपयोग करने से मनुष्य को रिस्क है और इस दवा के सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं, लेट्रोजोल को बैन कर दिया। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस विचार तक पहुँचने के लिए एक समिति ने निर्णय लिया जिसमें स्त्रीरोग विशेषज्ञ, प्रजनन जीवविज्ञानी, फार्माकोलॉजिस्ट और शोध विशेषज्ञ शामिल थे।

5 वर्षों के बाद, अब नई बनी केंद्र सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के उच्चतम फैसले लेने वाली तकनीकी निकाय ने लेट्रोजोल के निर्माण, बिक्री और वितरण पर से बैन हटाने की सिफारिश की है। ऐसा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) Indian Council for Medical Research (ICMR), के वैज्ञानिक पैनल की सिफारिश पर किया जा सकता है। जिसके अनुसार उन्होंने ने विस्तृत विज्ञान-आधारित अध्ययन किया है और पाया है की दवा के दुष्परिणाम की तुलना में इसके लाभ अधिक हैं।

डॉक्टर्स के अनुसार लगभग सभी एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव हैं और यह देखना होगा कि वे कितने गंभीर हैं। लेट्रोजोल बांझ महिलाओं के लिए आश्चर्यजनक औषध wonder drug कहा। विशेषज्ञों का कहना है कि 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत महिलाओं में क्लोमिड या लेट्रोज़ोल का के साइड इफेक्ट होते हैं जिनमें से अधिकतर मामूली और अस्थायी होते हैं, जैसे की हॉटफ़्लैश, धुंधला दृष्टि, मतली, सूजन और सिरदर्द आदि। गंभीर दुष्प्रभाव शायद ही दवा के साथ देखे जाते हैं। इसलिए दवा से प्रतिबंध हटा दिया जाना चाहिए।

Letrozole की 2.5 mg की गोली, को आमतौर पर प्रति दिन एक बार लिया जाता है, या हर दूसरे दिन एक बार। इसे बिना या भोजन के साथ ले सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह दवा आपकी स्थिति में मदद कर रही है, आपके रक्त को अक्सर परीक्षण करने की आवश्यकता हो सकती है तथा आपकी हड्डी के खनिज घनत्व को भी जांचने की आवश्यकता हो सकती है। लेट्रोजोल के बहुत से साइड इफ़ेक्ट हो सकते हैं। लेट्रोजोल के सामान्य रूप से रिपोर्ट किए गए साइड इफेक्ट्स में शामिल हैं,हड्डी फ्रैक्चर, एडिमा, चक्कर आना, थकान, हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया, ऑस्टियोपोरोसिस, और फ्लशिंग।

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लेट्रोजोल को किन रोगों में प्रयोग करते हैं?

लेट्रोजोल को इनफर्टिलिटी के इलाज़ में प्रयौग किया जा सकता। इसे मुख्य रूप से निम्न में देते हैं:

  • Adjuvant treatment of oestrogen-receptor-positive early breast cancer in postmenopausal women
  • Advanced breast cancer in postmenopausal
  • Women (including those in whom other anti-estrogen Therapy has failed)
  • Early invasive breast cancer in postmenopausal women after standard adjuvant tamoxifen therapy
  • Pre-operative treatment in postmenopausal women with localized hormone-receptor-positive breast cancer to allow subsequent breast conserving surgery

लेट्रोजोल को किन लोगों को देने में विशेष सावधानी Cautions की ज़रूरत है:

  1. Renal impairment
  2. Susceptibility
  3. To osteoporosis (assess bone mineral density
  4. Before treatment and at regular intervals)

लेट्रोजोल को किन लोगों को नहीं Contra-indications दिया जाना चाहिए?

  1. Severe hepatic impairment
  2. Not indicated for premenopausal women
  3. Pregnancy and breast-feeding

लेट्रोजोल के साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं?

यह साइड इफेक्ट्स की पूरी सूची नहीं है:

  1. पेट में दर्द abdominal pain
  2. खालित्य alopecia
  3. एनोरेक्सिया anorexia
  4. चिंता anxiety
  5. भूख वृद्धि appetite increase
  6. धमनी घनास्त्रता arterial thrombosis
  7. गठिया arthritis
  8. धुंधली दृष्टि blurred vision
  9. हड्डी फ्रैक्चर bone fracture
  10. ब्रेस्ट दर्द breast pain
  11. मोतियाबिंद cataract
  12. सेरेब्रोवास्कुलर रोधगलन cerebrovascular infarction
  13. कब्ज constipation
  14. खांसी cough
  15. डिप्रेशन depression
  16. दस्त diarrhoea
  17. चक्कर आना dizziness
  18. तंद्रा drowsiness
  19. रूखी त्वचा dry skin
  20. छूने पर ठीक नहीं लगना dysaesthesia
  21. अपच dyspepsia
  22. सांस लेने में दिक्कत dyspnoea
  23. आंख में जलन eye irritation
  24. थकान fatigue
  25. सामान्य एडिमा general oedema
  26. सरदर्द headache
  27. गर्मी लगना hot flushes
  28. उच्च कोलेस्ट्रोल hypercholesterolaemia
  29. पसीने में वृद्धि हुई increased sweating
  30. अनिद्रा insomnia
  31. कम सामान्यतः उच्च रक्तचाप less commonly hypertension
  32. ल्यूकोपीनिया leucopenia
  33. स्मृति हानि memory impairment
  34. श्लेष्म सूखापन mucosal dryness
  35. मस्कुलोस्केलेटल दर्द musculoskeletal pain
  36. जी मिचलाना nausea
  37. ऑस्टियोपोरोसिस osteoporosis
  38. घबराहट palpitation
  39. परिधीय एडिमा peripheral oedema
  40. खुजली pruritus
  41. बुखार pyrexia
  42. शायद ही कभी फुफ्फुसीय अन्त: शल्यता rarely pulmonary embolism
  43. लाल चकत्ते rash
  44. मुंह की सूजन stomatitis
  45. क्षिप्रहृदयता tachycardia
  46. स्वाद न पता लगना taste disturbance
  47. थ्रोम्बोफ्लेबिटिस thrombophlebitis
  48. ट्यूमर दर्द tumour pain
  49. मूत्र आवृत्ति urinary frequency
  50. मूत्र संक्रमण urinary-tract infection
  51. पित्ती urticaria
  52. योनि से ब्लीडिंग vaginal bleeding
  53. योनि स्राव vaginal discharge
  54. उल्टी vomiting
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लेट्रोजोल के ड्रग इंटरेक्शन क्या हैं?

कुछ दवाएं जो इस दवा के साथ इंटरैक्ट कर सकती हैं उनमें शामिल हैं: एस्ट्रोजेन (जैसे एथिनिल एस्ट्रैडियोल, संयुग्मित एस्ट्रोजेन), एस्ट्रोजन ब्लॉकर (जैसे एनास्ट्रोज़ोल, टेमॉक्सीफ़ेन)।

Letrozole tablets for oral administration contains 2.5 mg of letrozole, a nonsteroidal aromatase inhibitor (inhibitor of estrogen synthesis). It is chemically described as 4,4′-(1H- 1,2,4-Triazol-1-ylmethylene) dibenzonitrile.

Letrozole is a nonsteroidal competitive inhibitor of the aromatase enzyme system. It inhibits the conversion of androgens to estrogens. Letrozole causes reduction of estrogen biosynthesis in all tissues. Treatment of women with letrozole significantly lowers serum estrone, estradiol and estrone sulfate. It is used in fertility treatment for ovulation. letrozole is a prescription drug.

Letrozole sold under various brand names in India such as Letroz and Letoval is internationally approved for treatment of breast cancer in post-menopausal women.

India banned manufacture, sale and distribution of controversial drug Letrozole in year 2011.  Earlier, on October 12, 2011, the Union health ministry, on the recommendation of DTAB (Drugs Technical Advisory Borard), had banned the manufacture for sale, sale and distribution of letrozole, after taking note of the fact that the use of the drug letrozole for induction of ovulation in anovulatory infertility was likely to involve risk to human beings and safer alternatives are available. The DTAB is reported to have expressed the view then that it was necessary and expedient to regulate by way of suspension of the drug for the indication of induction of ovulation in anovulatory infertility in public interest.

A 16-member committee, under special director general of health services Dr D C Jain, decided to ban the drug. “In exercise of the powers conferred by Section 26A of the Drugs and Cosmetic Act, 1940, the Central government has suspended the manufacture for sale, sale and distribution of Letrozole for induction of ovulation in anovulatory infertility with immediate effect. The Central government is satisfied that it is necessary and expedient to regulate by way of suspension of manufacture, sale and distribution of the drug for the said indication in the public interest.” Over the years, there has been a growing suspicion that the drug’s side-effects have led to severe genetic abnormalities among babies born to infertile women.

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Five years after suspending the manufacture, sale and distribution of controversial drug Letrozole, citing side-effects, the Union Health Ministry’s highest decision-making technical body on drugs has recommended lifting the restrictions and allowing the medicine to be used for administering in young infertile women to help them conceive.

Letrozole appears to be more effective than the standard drug Clomiphene for helping women with polycystic ovary syndrome (PCOS) to achieve pregnancy. Current available evidence supports that letrozole may have a promising role in stimulated IVF cycles.

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