अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स Aklax Plus (Akesiss) कब्ज की दवा

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स (aklax plus) कब्ज और IBS की दवा है, जानिये इसके घटक, खुराक और साइड इफेक्ट्स क्या हैं और किस स्थिति में अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स को नहीं लेना चाहिए और किन लोगों को अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स नहीं इस्तेमाल करना चाहिए।

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स को कब्ज़ में प्रयोग किया जा सकता है। इसमें लैक्टुलोज और इसबगोल की भूसी lactulose 10 g + ispaghula husk 3.5 g होती है। यह कॉम्बिनेशन आँतों में फाइबर और पानी की मात्रा को बढ़ा कर वेस्ट को निकालने में मदद करता है।

कब्ज़ यदि लम्बे समय तक रहे तो बवासीर, फिस्टुला हो जाते है। भूख नहीं लगती और बहुत गैस बनती है। पाचन की विकृति से व्यक्ति कमजोर हो जाता है। कब्ज़ को नहीं होने देना अधिक बेहतर है। आप ज्यादा फाइबर खाएं और बहुत सारे तरल पदार्थ पीयें। हल्के व्यायाम भी करें। आहार और जीवनशैली में परिवर्तन से कब्ज़ को दूर करने की कोशिश करें।

  • निर्माता: Akesiss Pharma Pvt. Ltd.
  • नाम: एक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स, अकलक्ष प्लस ग्रैनुल्स, अकलक्ष प्लस पाउडर
  • मुख्य उपयोग: कब्ज़
  • मुख्य गुण: विरचन
  • मूल्य: 120g (199 INR)

कब्ज क्या है?

कब्ज को विबंध और कोंसटिपेशन के नाम से जाना जाता है। कब्ज होने पर मल बहुत कठोर हो जाता है और कई-कई दिन तक नहीं होता। ऐसे में शौच के समय बहुत जोर लगाना पड़ता है जिससे गुदा छिल जाती है और खून तक बहने लगता है। कब्ज़ के कारण पेट में भारीपन, गैस, दबाव तथा भूख न लगना समेत अनेक समस्याएं हो जाती हैं। कब्ज़ बहुत ही आम समस्या है और हर किसी को कभी न कभी हो जाती है।

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स का जेनेरिक फार्मूला क्या है?

Composition

Aklax Plus Granules is composed of the following active ingredients (per 20 grams)

  • lactulose 10 g
  • ispaghula husk 3.5 g

इसबगोल की भूसी क्या है?

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इसबगोल (प्लांटेगो ओवाटा) भारत में गुजरात और पंजाब में अधिक उगाया जाता है। यह पेट रोगों की अच्छी दवाई है। इसके सेवन से कब्ज़-बवासीर में लाभप्रद है। यह आँतों को चिकना करता है और मलको दूर करने में सहयोग देता है। इसबगोल आँतों के घाव को ठीक कर सकता है। इसबगोल पेट में गैस, अफारा, और अपच में भी फायदा करता है।

इसबगोल का मुख्य गुण मूत्रल और विरेचक है। आयुर्वेद में इसे शीतल, शांतिदायक, और दस्त को साफ़ करने वाला कहा गया है। यह मल को आंत से दूर करने में सहायता करता है जिससे पेट के मरोड़, दर्द, मलावरोध से आराम मिलता है। पेचिश, अतिसार तथा आंतो के घाव में भी यह उपयोगी है।

  • यह फाइबर का अच्छा स्रोत है।
  • इसका सेवन कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।
  • यह मुख्य रूप से इसके विरेचक गुणों के कारण कब्ज़ के उपचार में प्रयोग किया जाता है।
  • यह पुराने कब्ज़ में स्टूल की फ्रीक्वेंसी और आउटपुट को नियंत्रित करता है।
  • इरीटेबल बाउल सिंड्रोम IBS में भी अच्छे परिणाम देता है।

यदि इसबगोल कम मात्रा ली जाए तो यह मल को रोकता है और अधिक मात्रा में यह विरेचन कराता है। पेचिश, दस्त, आंव पड़ना, में यह बहुत ही लाभदायक है। दस्त में इसे दही के साथ सेवन करना चाहिए।

इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। अगर इसबगोल भूसी पर्याप्त तरल के बिना ली गई है तो स्टूल बहुत ड्राई और कड़ा हो सकता है। इसमें फाइबर अधिक है, इसलिए गैस बनना और पेट फूलना अधिक होता है। इससे नाक की सूजन rhinitis, नेत्रश्लेष्मलाशोथ (लाल रंग और आंखों के श्वेत की सूजन), ब्रॉन्कोस्पज़म (अत्यधिक और एयरवे की मांसपेशियों का लंबे समय तक संकुचन) और एनाफिलेक्सिस (गंभीर एलर्जी प्रतिक्रिया) हो सकती है।

इसबगोल 6 साल से छोटे बच्चे को और डिहाइड्रेशन में नहीं दिया जाना चाहिए। जिन स्थितियों में पेट और आंत का संकुचन होता है, और जिन रोगियों में निगलने में कठिनाई होती है या उनके गले में समस्याएं हैं, उन्हें यह नहीं दिया जाना चाहिए।

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लैक्टुलोज क्या है?

लैक्टुलोज सिंथेटिक डिसाइकेराइड है। इसके लिए रासायनिक नाम 4-ओ-बीटा-डी-गैलेक्टोप्राप्योरोसिल-डी-फ्राटेफोरानोस है। आणविक वजन 342.30 है यह पानी में स्वतंत्र रूप से घुलनशील है।

  • लैक्टूलोस रक्त अमोनिया के स्तर को 25-50% तक कम करता है और इसलिए
  • मानसिक स्थिति में सुधार और ईईजी पैटर्न में सुधार के लिए अनुमित है।
  • यह उन रोगीओं में नहीं इस्तेमाल होता जिन्हें कम गैलेक्टोज आहार की आवश्यकता होती है।

चूंकि लैक्टुलोज़ समाधान में गैलेक्टोज (1.6 ग्रा / 15 एमएल से कम) और लैक्टोज (1.2 ग्रा / 15 एमएल से कम) होते हैं, इसलिए इसका उपयोग मधुमेह रोगियों में सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। लैक्टुलोज प्राप्त करने वाली शिशुओं को हाइपोनैट्रियमिया और निर्जलीकरण का हो सकता है।

लैक्ट्युलोज के कारण भ्रूण को कमजोर प्रजनन या हानि का कोई प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं में पर्याप्त और सुव्यवस्थित अध्ययन नहीं हैं। क्योंकि पशु प्रजनन अध्ययन मानव प्रतिक्रिया के बारे में हमेशा सही भविष्यवाणी नहीं करते हैं, इसलिए यह दवा गर्भावस्था के दौरान तभी ली जानी चाहिए यदि इसे लेना स्पष्ट रूप से आवश्यक हो।

यह ज्ञात नहीं है कि लैक्ट्युलोज दवा मानव दूध में उत्सर्जित होता है या नहीं। क्योंकि कई दवाएं मानव दूध में उत्सर्जित होती है, इसलिए स्तनपान कराने वाली महिला में इसे लेने में सावधानी बरतनी चाहिए।

लैक्टूलोस, से पेट फूलना या डकार आना, ऐंठन और पेट की असुविधा हो सकती है। अत्यधिक खुराक से संभावित जटिलताओं जैसे दस्त, हाइपोकलिमिया, और हाइपरनेटरामीयाआदि हो सकता है। मतली और उल्टी भी हो सकती है।

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स क्यों इस्तेमाल करते हैं?

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Indications and Usage

  • कब्ज़ Constipation
  • आईबीएस Inflammatory bowel disease
  • गर्भावस्था में कब्ज़ Pregnancy-associated constipation
  • गुदा में दरार Small tear in the tissue that lines the anus
  • गुदा में सूजन Swollen vein in anus regions
  • पुरानी या बार-बार होने वाली कब्ज Chronic or habitual constipation
  • लिवर की विफलता से दिमागी दिक्कत Abnormal brain function due to liver failure
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अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स की दवाई की मात्रा क्या है?

Dose

इसे 10-20 ग्राम की मात्रा में लिया जा सकता है। यह मात्रा दिन में एक ही बार या बाँट कर दो बार ले सकते हैं। 40 ग्राम से ज्यादा की मात्रा नहीं ली जानी चाहिए। इसे खाने के साथ या बिना खाने के लिया जा सकता है। अगर पेट में दिक्कत होती हो, इसे खाना खाने के बाद लें।

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स की प्रेगनेंसी केटेगरी क्या है?

केटेगरी बी B – गर्भवती महिलाओं पर कोई पर्याप्त, नियंत्रित अध्ययन नहीं किया गया है। पशु प्रजनन पर किये गए अध्ययन भ्रूण के लिए खतरा नहीं दिखा सके।

Either animal-reproduction studies have not demonstrated a foetal risk but there are no controlled studies in pregnant women or animal-reproduction studies have shown an adverse effect (other than a decrease in fertility) that was not confirmed in controlled studies in women in the 1st trimester (and there is no evidence of a risk in later trimesters).

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स के संभावित दुष्प्रभाव Side-effects क्या हो सकते हैं?

Aklax PlusSide-effects

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूलस में मौजूद पदार्थों के अनुसार दवा से हो सकने वाले कुछ संभावित दुष्प्रभावों की सूची निम्नलिखित है। यह एक व्यापक सूची नहीं है और इसमें सभी साइड इफेक्ट्स शामिल नहीं हैं। यह दुष्प्रभाव संभव हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है। कुछ दुष्प्रभाव दुर्लभ लेकिन गंभीर हो सकते हैं। यदि आपको दवा के साइड इफेक्ट्स होते हैं तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें, खासकर यदि वे ठीक नहीं हो रहे हों:

  • जी मिचलाना
  • पेट में दर्द
  • उल्टी
  • दस्त
  • गैस
  • दस्त के कारण इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन आदि।

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स लेने से पेट में दर्द होना, गैस और पेट फूलना सबसे कॉमन साइड इफेक्ट्स हैं।

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स को कब प्रयोग न करें?

Aklax Plus Contraindications

  • एलर्जी
  • आँतों में रुकावट
  • 6 वर्ष से कम आयु के बच्चे
  • मधुमेह
  • निगलने में कठिनाई
  • पानी की कमी
  • दस्त आदि।
  • दवा को लेने के दौरान पानी ज्यादा मात्रा में पियें।
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अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स लेने में क्या सावधानी रखें?

Cautions and Warnings

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स का उपयोग करने से पहले डॉक्टर को अपने वर्तमान में लिए जाने वाले सप्लीमेंट या हर्बल दवा, एलर्जी, बीमारियों और वर्तमान स्वास्थ्य स्थितियों (जैसे गर्भावस्था, आगामी सर्जरी, आदि) के बारे में बताएं। यदि अल्कोहल लेते हैं तो भी बताएं।

  • एलर्जी
  • बच्चे या बुजुर्ग
  • दस्त
  • गर्भवती या स्तनपान
  • गर्भवती होने की योजना बना रही है आदि।

कब्ज़ की दवा लेते समय पानी की मात्रा अधिक लेनी चाहिए। यदि इसबगोल की भूसी ले रहे हैं लेकिन पानी नहीं पी रहे तो स्टूल हार्ड और ड्राई हो सकता है जिससे कंडीशन ठीक होने के बजाए बढ़ सकती है। इसलिए पानी अधिक पियें। यह दवा 6 साल से छोटे बच्चों को नहीं दें।

गर्भावस्था में कोई दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। पानी ज्यादा मात्रा में पियें। पीने के लिए हल्का गर्म पानी लें। दवा के साथ साथ खाने-पीने पर नियंत्रण और व्यायाम आवश्यक है। कब्ज़ के कारण को जानने का प्रयत्न करें। कई बार शरीर में किसी प्रकार का रोग जैसे की डायबिटीज, के कारण भी कब्ज़ हो जाता है। अच्छे प्रभाव के लिए दवा के साथ-साथ जीवन शैली में भी परिवर्तन करें।

अक्लैक्स प्लस ग्रैन्यूल्स आपके लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकती है लेकिन आपकी स्थिति का इलाज नहीं करती। दवा को लेने से पहले, अपने चिकित्सक को आपके द्वारा लिए जा रहे उत्पादों (जैसे विटामिन, हर्बल सप्लीमेंट, आदि), व एलर्जी, अन्य कोई रोग, बीमारियों और वर्तमान स्वास्थ्य स्थितियों (जैसे गर्भावस्था, सर्जरी, आदि) के बारे में बताएं। चिकित्सक द्वारा निर्देशित या उत्पाद प्रविष्टि पर मुद्रित दिशा का पालन करें। खुराक आपकी स्थिति पर आधारित है। अपने चिकित्सक को बताएं यदि आपकी स्थिति वैसे ही बनी रहती है या और बुरी हो जाती है। दवा को दृष्टि और बच्चों की पहुंच से बाहर रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

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Akesiss Aklax Plus contains lactulose 10 g, ispaghula husk 3.5 g/20 g.

Lactulose, is a disaccharide (double-sugar) formed from one molecule each of the simple sugar (monosaccharides) fructose and galactose. This synthetic sugar is used to get relief from the symptoms of constipation and hepatic encephalopathy. It is commercially produced by isomerization of lactose.

Lactulose is indicated for constipation, conditions requiring facilitated bowel movements and for the treatment of hepatic encephalopathy(HE), hepatic coma. It is contraindicated in patients with hypersensitivity to lactose or to any of the excipients and suffering from Galactosaemia and bowel obstruction. The dose normally used in constipation should not pose a problem for diabetics. However, the dose used in the treatment of hepatic encephalopathy(HE), hepatic coma is usually much higher and should be taken into consideration for diabetics. Lactulose can be used during pregnancy. No effects on the breastfed newborn/infant are anticipated since the systemic exposure of lactulose to the breast-feeding woman is negligible. Lactulose oral solution can be used during breastfeeding.

Ispaghula husk is the seed coats of the plant Plantago ovata Forssk. The husk is obtained by powdering the seed coats. Ispaghula husk is generally used for the treatment of habitual constipation (constipation not caused by a physical change to an organ) and as a stool softener to reduce pain while motion (as in anal fissures, hemorrhoids and after surgery to the anus or rectum). It can be used in people requiring more dietary fiber, such as patients with irritable bowel syndrome who are suffering from constipation or in combination with diet in patients with hypercholesterolemia (high blood cholesterol levels).

Ispaghula husk should be taken with plenty of liquid. It should be taken during the day at least half an hour to one hour before or after taking other medicines and not immediately before bedtime. It should only be used in adults and children over the age of 12 years.

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Side effects have been reported with ispaghula husk medicines, including flatulence and abdominal distension (swelling of the belly). There is a risk of a build-up of hard, dry stool, particularly if Ispaghula husk is swallowed without enough liquid. Allergic reactions including rhinitis (runny nose), conjunctivitis (reddening and inflammation of the white of the eye), bronchospasm (excessive and prolonged contraction of the airway muscles) and anaphylaxis (severe allergic reaction) may also occur.

Laxatives (of any kind) should be used in children only when deemed absolutely necessary and only under medical supervision.

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