Tapeworm टेपवर्म (फीता कृमि) जानकारी, इलाज और बचाव

जानिये टेपवर्म क्या होता है और शरीर में कृमि के लक्षण के होते हैं Symptoms of Intestinal worms. टेप वर्म का इलाज़ कैसे करते हैं Treatment of Tapeworm.

पेट में कीड़े होना एक आम समस्या है। जब हम पेट में कीड़े कहते हैं, तो उसका मतलब आँतों में होने वाले कीड़ों से होता है। जो भी भोजन हम करते हैं वह मुंह से पेट में और पेट में पेस्ट बनकर आँतों में पहुँचता है जहाँ इसका पूरा पाचन और अवशोषण होता है। आँतों में कीड़े, इसी भोजन का खाते है और यह शरीर में अवशोषित न होकर कीड़ों के द्वारा उनकी संख्या बढ़ाने में इस्तेमाल हो जाता है। परिणाम स्वरूप, अच्छा भोजन करते हुए भी व्यक्ति को पेट सम्बन्धी रोगों, अधिक गैस, कब्ज़, दर्द, ऐंठन तथा खून की कमी हो जाती है। कृमि परजीवी parasites होते हैं और अपने से पोषण करके वृद्धि न करके, आँतों में मौजूद पोषक पदार्थों को खाकर बढ़ते हैं।

इंसानों की आँतों में कई तरह के कीड़े पाए जा सकते हैं, जैसे चुन्ने या थ्रेड वर्म, गोल कृमि या राउंड वर्म, हुक वर्म और फीता कृमि या टेप वर्म। यह कृमि चावल की लम्बाई से लेकर कई फीट तक लम्बे हो सकते हैं। इनकी संख्या अधिक होने पर यह शरीर के विभिन्न हिस्सों से बाहर निकलने लगते हैं। गुदा से निकलने पर, अक्सर गुदा पर खुजली होती है। कुछ लोगों में यह कीड़े मुंह से भी निकल सकते हैं।

टेपवर्म के संक्रमण को टैनिएसिस कहते हैं। इसकी तीन मुख्य स्पीशीज हैं, टीनिया सेगीनाटा Taenia saginata, टीनिया सोलिअम Taenia solium (pork tapeworm), और टीनिया एशियाटिका Taenia asiatica (Asian tapeworm)। मनुष्य इन टेपवर्मों से कच्चे या अधपके खाने से संक्रमित हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त संक्रमित मिट्टी को छू कर, हाथ मुंह में डाल लेने या दूषित पानी जिसमें इसके अंडे हो, को पीने से भी टेप वर्म का संक्रमण हो सकता है।

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टेपवर्म क्या होता है

टेपवर्म को हिंदी में फीता कृमि कहते हैं क्योंकि यह फीते की तरह लम्बा और चपटा होता है। इस कृमि का शरीर छोटे खंडों में होता है। यह कृमि आँतों से सकर/चूषक के द्वारा चिपका रहता है और खून की कमी करता है।

टेप वर्म आमतौर पर जानवरों के मल stool में पाया जाता है। किन्ही कारणों से यह, जैसे बारिश के पानी के साथ जमीन में पहुंच जाता है और फिर कच्ची सब्जियों के जरिए मनुष्यों के पेट में पहुंचता है। आमतौर पर मूली, गाजर, पत्ता गोभी जैसी सलाद में प्रयोग होने वाली कच्चे भोज्य पदार्थों से ही यह पेट में जाता है। पेट से यह आंत में चले जाते हैं और खाने को खाकर बढ़ते हैं। इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती जाती है। यह खून के जरिए नर्वस सिस्टमऔर दिमाग तक में पहुंच सकते हैं जिससे मरीज को दौरे /ऐपीलेप्सी पड़ने लगते हैं

टेपवर्म नर्वस सिस्टम के रास्ते मस्तिष्क में पहुँच सकते हैं। इस कारण से पीड़ित व्यक्ति को ऐपीलेप्सी (मिर्गी) के दौरे पड़ने लगते हैं। दुनिया में हुए कुछ मामलों में रीढ़ की हड्डी/स्पाइन में टेपवर्म के होने के कारण लोगों को लगातार दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत का सामना करना पड़ा।

कुछ सालों पहले एक केस हुआ जिसमें एक व्यक्ति ने अस्पताल की स्पाइन ओपीडी में लोअर बैक में दर्द, कमजोरी, चलने-फिरने में परेशानी, और यूरिन और स्टूल पर कंट्रोल न होने के कारण डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने जांच कराई तो शुरुआती एक्सरे नॉर्मल आया। अस्पताल के स्पाइन सर्जरी डिपार्टमेंटद्वारा किये गए एमआरआई टेस्ट में स्पाइनल कॉड के बीच में सिस्ट का पता लगा जिससे नर्वस सिस्टम के ऊपर प्रेशर बन रहा था और मरीज को दर्द हो रहा है। इसे सिस्ट को हटाने के लिए सर्जरी का फैसला किया गया। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को स्पाइनल कॉड के हिस्से स्पाइनल एल2 और एस1 के बीच में टेप वर्म मिले जिनकी संख्या बहुत अधिक थी। इस बीमारी को मेडिकली न्यूरो सिस्टिक सरकोसिस (एनसीसी) कहा जाता है, और अब तक पूरी दुनिया में इसके केवल छह मामले ही रिपोर्टेड हैं। भारत में देखा गया यह ऐसा पहला मामला था। डॉक्टरों ने स्पाइन को ओपन कर टेप वर्म को साफ किया। जिस तरह ब्रेन में सिस्ट बनता है ठीक उसी तरह सिस्ट स्पाइन में भी बना था। यह एक रेयर बीमारी है जिसका इलाज सर्जरी करके इसे हटाना है।

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एक अन्य मामले में डॉक्टरों ने एक पुरुष के पेट से 6 फीट लंबा टेप्वर्म (कीड़ा) निकाला। मरीज के पेट में पाए गए इस कीड़े की लम्बाई करीब 2 मीटर (6.6 feet) थी। 48 वर्षीय इस मरीज को दो महीने से पेट में दर्द की शिकायत थी जिसके लिए इसमें डॉक्टरों को दिखाया। शुरूआती जांच में मरीज में खून की कमी anemia पायी गई। लेकिन बाद में बाकी टेस्‍ट में कीड़े के होने का पता चला। कोलनस्कोडपी के बाद जब एंडोस्को‍पी की गई तो पता चला कि इस आदमी के पेट में एक लंबा कीड़ा है। यह 6 फीट लम्बा कीड़ा मरीज की छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में था।

आँतों में पाए गए उस टेप वर्म का सांइटिफिक नेम टेनिया सोलियम (Taenia solium) है। यह कीड़ा 3.5 मीटर तक यानि 11.5 फीट तक लंबा हो सकता है और पेट में कुछ साल तक जिंदा रह सकता है। इसके होने के कोई लक्षण नहीं होते। लोगों को इसके होने से कोई इंफेक्शन भी महसूस नहीं होता। लेकिन कुछ मामलों में पेट में दर्द शुरू हो जाता है।

टेनिएसिस का निदान मुश्किल होता है, इसके बारे में जाँच नहीं की जाती और इसलिए इसके होने की सटीक संख्या ज्ञात नहीं है। संभावना है, की इसके मामले तो अधिक होते हैं लेकिन उनकी रिपोर्टिंग नहीं हो पाती।

शरीर में कृमि के लक्षण Symptoms of Intestinal worms

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करीब 50 तरह के कृमि मनुष्य की आँतों में पाए जा सकते है। कृमि के अनुसार लक्षण हो सकते हैं। जी मिचलाना, उलटी होना, पेट में दर्द, दस्त होना कृमियों के आम लक्षण हैं। कुछ मामलों में सांस फूलना, खांसी-कफ होना, शरीर पर एलर्जी के लक्षण दिखना जैसे की रात में शरीर पर चक्कते होना और उनमें खुजली होना, आदि लक्षण देखे जाते हैं। रात के समय गुदा के आस-पास खुजली भी होती है। गिनीवर्म पैर में छाला करके धागे की तरह शरीर से बाहर आता है।

  1. पेट में दर्द रहना
  2. गुदा पर खुजली होना
  3. भूख न लगना
  4. कमजोर होना
  5. बच्चों का विकास कम होना या रुक जाना
  6. खून की कमी होना
  7. बहुत गैस बनना
  8. सोते समय दांत किटकिटाना
  9. बुखार
  10. आंतरिक गांठ (अल्सर)
  11. एलर्जी के लक्षण
  12. सिर दर्द , चक्कर आना
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टेपवर्म संक्रमण का अधिकांश लोगों में कोई विशेष लक्षण नहीं पाया जाता। टी सागिनता टेनिएसिस वाले रोगियों को अक्सर अधिक लक्षणों का अनुभव होता है क्योंकि यह टैपवार्म आकार में बड़ा होता है (10 मीटर तक)।

दूसरे दो टेपवर्म (आमतौर पर 3 मीटर) के होते हैं और अक्सर इनसे पेट दर्द, भूख की कमी, वजन घटाना, और पेट सहित पाचन समस्यायें हो सकती हैं। टैनेनीसिस का सबसे अधिक दिखाई देने वाला लक्षण गुदा और मल के माध्यम से प्रोग्लोटिड (टैपटवार्म सेगमेंट) या टेप वर्म के टुकड़े निकलना है। दुर्लभ मामलों में, टेपवार्म के टुकड़े, पित्त और अग्नाशयी नलिकाएं में फंस सकते हैं।

टेपवर्म आकार में बहुत बड़े हो सकते हैं इसलिए इनसे विशेष दिक्कतें हो सकती है। यह दिमाग में पहुँच कर सूजन कर सकते हैं जिससे दौरे पड़ने लगते हैं। इसके मिर्गी जैसे लक्षण होते है। टेपवर्म से आँखों की रौशनी भी कम हो सकती है। स्पाइन में इसके होने पर चलना-फिरना सब कुछ दिक्कत भरा हो जाता है।

कौन से भोजन से टेपवर्म होने की सम्भावना अधिक होती है?

जो सब्जियां जमीन के एकदम ऊपर या अंदर होती हैं उनमें टेपवर्म होने की अधिक संभावना हो सकती है। निम्न सब्जियों को कच्चा खाने से टेपवर्म के अंडे शरीर में पहुँच सकते हैं:

  1. पत्तागोभी
  2. गाजर
  3. ब्रोकली
  4. मिट्टी के आस पास उगने वाली अन्य सब्जियां
  5. दूषित पानी से

कुछ लोग वज़न कम करने के लिए पत्तागोभी cabbage को लंच में खाते हैं। उनका यह मानना होता हैं कि यह तेज़ी से वज़न कम करने में मदद कर सकती है। इसी प्रकार बर्गर, सैंडविच में भी इसे सलाद की तरह डाल देते हैं। लेकिन यह खतरनाक है। पत्तागोभी के विशेष आकार और इसके मिट्टी के पास होने से इसमें कीड़ों के अंडे होने की सम्भावना बहुत ज्यादा होती है। बारिश के दिनों में इन्फेक्शन के होने की संभावना और अधिक हो जाती है जब इसमें पानी रुक जाता है।

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पत्तागोभी को ऐसे ही बिना गर्म किये न खाएं। खाना भी है ती इसकी सब्जी खाएं या अच्छे से उबाल कर खाएं। पका देने से टेपवर्म के अंडे और कृमि नष्ट हो जाते हैं।

जो लोग मांसाहारी होते हैं, उनमें टेपवर्म का संक्रमण पशुओं का मांस खाने से होता है। अधपके मांस में यह कृमि होते हैं और इन्हें खाने से इंसान भी इन्फेक्ट हो जाता है।

मांस जो ठीक से नहीं पका

ताज़े पानी की बिना सही से पकी मछली

टेप वर्म का इलाज़ Treatment of Tapeworm

डॉक्टर मल के नमूने और शायद एक खून का परीक्षण के द्वारा टेपवर्म होने का पता लगाते हैं। टेनिएसिस के इलाज़ Praziquantel, Niclosamide  के लिए दवाएं उपलब्ध हैं। समस्या के अनुसार कुछ मामलों में दवा के साथ साथ सर्जरी की भी ज़रूरत पड़ती है। सिस्ट को हटाने के लिए अन्य परीक्षण, कुछ और दवा और शल्य चिकित्सा की आवश्यकता हो सकती है।

टेप वर्म से बचाव Preventing Tapeworm Infection

किसी भी कृमि से बचने के लिए स्वच्छता सबसे अच्छा उपाय है। व्यक्तिगत साफ़ सफाई से कृमियों को हाथों से माध्यम से शरीर में जाने से रोका जा सकता है। नाखूनों को काट कर रखने से, टॉयलेट से आकर अच्छे से हाथ दोने से, हर खाने-पीने से पहले हाथ धोने और साफ़ सुथरे बर्तन में खाना खाने से बहुत फर्क पड़ सकता है।

  1. फल, सब्जियों और सलाद को अच्छे से धोएं।
  2. सब्जियों और फलों को पानी में डुबो कर 2-3 बार साफ़ करें। फिर नल के नीचे तेज धार में रखकर धो दें।
  3. सलाद खाने से पहले से अच्छे से गर्म पान से साफ़ करें। पत्तागोभी को बिना अच्छे से पकाए नहीं खाएं।
  4. साफ़ पानी पियें। गन्दा पानी, दूषित पानी, सड़कों के किनारे मिलने वाला बिना बोतल वाला पानी न पियें।
  5. बाहर नंगे पैर न घूमें।
  6. शौचालय का उपयोग करने के बाद हाथ अच्छे से धोएं।
  7. भोजन पकाने से पहले अपने हाथों को धोएं।
  8. मांस न खाएं।
  9. हर 6 महीने पर कृमिनाशक दवा का सेवन करे।
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Taeniasis is a parasitic infection caused by the tapeworm species Taenia saginata (beef tapeworm), Taenia solium (pork tapeworm), and Taenia asiatica (Asian tapeworm). In taeniasis, praziquantel is used. It kills adult intestinal taenia worms in a single dose. Praziquantel also kills T. solium cysticerci when taken for 14 days in high doses. It thus offers the prospect of a cure for neurocysticercosis, which has been treatable only by surgery, anti-inflammatory corticosteroids and anticonvulsants. But as the dying and disintegrating cysts may induce localized cerebral oedema, treatment with praziquantel must always be undertaken in a hospital setting. In addition, a corticosteroid is usually given to reduce the inflammatory response. Albendazole also kills neurocysticerci when given daily for one month. a corticosteroid or an antihistamine is also given to reduce any inflammatory reaction. The longer established niclosamide acts only against the adult intestinal worms. Cestode infections due to T. solium, occurring during pregnancy should always be treated immediately (with praziquantel or niclosamide, but not with albendazole) because of the risk of cysticercosis.

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One Comment

  1. Sir mere ander tape warm infection ka poora lakchad hai please mujhe koi dava batayen apka bahot aabhari rahunga.

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