बवासीर का इलाज Piles Treatment and Recommended Diet in Hindi

जानिये बवासीर (piles) कैसे ठीक की जाती है? इसके लिए कौन सी दवाइयां इस्तेमाल होती हैं? क्या बवासीर ठीक होने के बाद फिर से हो सकता है? बवासीर का ऑपरेशन कैसे होता है और इसके नुकसान कौन कौन से होते हैं? Bawaseer treatment in hindi aur piles ki ayurvedic dawawon ke bare men.

बवासीर (bawaseer) या हेमरॉइड्स Hemorrhoids या पाइल्स (piles), गुदा या निचले मलाशय के आसपास की नसों में होने वाली सूजन को कहते हैं। इसे आयुर्वेद में अर्श कहते हैं। यह आजकल देखी जाने वाली आम समस्या है। इसमें मलाशय और गुदा की शिरायें फूल जाती है और रगड़ जाने से इनमे दर्द होता है और ब्लीडिंग भी हो सकती है।

गुदा में उतकों के समूह पाए जाते हैं जिन्हें इंग्लिश में हेमोरोइड्स कहते है। हेमोरोइड्स रक्तवाहिकाए, सहायक ऊतक, और तंतु होते हैं। पाइल्स में हेमोरोइड्स का आकार बढ़ जाता है और दर्द होता है। आम भाषा में इसे बवासीर के मस्से कहा जाता है। यह मस्से एक या अधिक हो सकते हैं। लोकेशन के हिसाब से पाइल्स आन्तरिक, बाह्य और मिश्रित हो सकती है।

आंतरिक पाइल्स में मस्से गुदा और लोअर रेक्टम के अंदर की लाइनिंग में होते हैं जबकि बाहरी पाइल्स में मस्से गुदा के पास होते हैं। मिश्रित में मस्से अंदर और बाहर दोनों होते हैं।

बाहरी या आंतरिक पाइल्स में ब्लीडिंग हो सकती और नहीं भी। इसी आधार पर इसे खूनी बवासीर या वादी बवासीर कहते हैं। खूनी बवासीर को रक्तार्श भी कहते हैं। खूनी बवासीर में समय समय पर खून गिरता है। बादी बवासीर में खून तो नहीं गिरता लेकिन बहुत दर्द होता है।

बवासीर की समस्या अक्सर पचास की उम्र के बाद, गर्भावस्था में, लम्बे समय तक बैठकर या खड़े रहकर काम करने से या शरीर के उतकों की कमज़ोरी से हो सकता है। यह मानसिक तनाव, मल-मूत्र को रोक कर रखने, स्टूल करते समय बहुत अधिक जोर लगाने से हो सकता है। पाइल्स के ऐसी समस्या है जिसका इलाज़ कठिन होता है और इसके बार-बार होने की सम्भावना अधिक होती है। इसलिए इसके होने के कारणों को पहचान कर ठीक किया जाना चाहिए।

इसे भी पढ़ें -  माइग्रेन : कारण, लक्षण, उपचार और दवा | Migraine

बवासीर के अन्य नाम क्या हैं?

Other Common Names of Piles

बवासीर को अन्य नामों से जानते हैं:

  1. हेमोरोइड्स Hemorrhoids
  2. पाइल्स Piles
  3. अर्श, रक्तार्श Arsha
  4. बवासीर Bawaseer/Bawasir
  5. बवासीर के मस्से Bawaseer ke masse

बवासीर क्या है?

Loading...

What is Bawaseer?

सभी की गुदा और मलाशय में में पिलो की तरह कुशन करने वाले हेमोरोइड्स होते हैं। ये हेमोरोइड्स म्यूकस झिल्ली के अंदर मौजूद होते हैं। लेकिन जब कोई कहता है कि उसे हेमोरोइड्स है, तो इसका  मतलब है उसे पाइल्स है। क्योंकि यह नॉर्मली मौजूद हेमोरोइड्स उनमें सूज जाते हैं जिससे लम्प या मस्से बन जाते हैं। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को हो सकती है।

हेमोरोइड्स गुदा या निचले मलाशय में सूजी हुई नसें ही हैं। वे या तो गुदा के अंदर या गुदा के आसपास त्वचा के नीचे होते हैं। इसकी उन लोगों में होने की ज्यादा संभावना है जो कब्ज़ से लम्बे समय तक पीड़ित रहते हैं। रोजाना कठोर स्टूल की रगड़ से समय के साथ पाइल्स हो जाता है।

जगह के अनुसार यह दो प्रकार के होते हैं:

1- Internal Piles (Piles in lower rectum)

आंतरिक पाइल्स या इंटरनल हेमोरोइड्स जोकि मलाशय के अंदर होती हैं। इसमें उतना दर्द नहीं होता लेकिन ब्लीडिंग होती है। अंदर जब इसका आकार बढ़ जाता है तो यह गुदा से बाहर भी आ सकती है। गुदा के बाहर होते ही समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसमें खुजली होती है और खुजली करने से घाव हो सकता है।

2- External Piles (Piles around the anus)

बाह्य पाइल्स या एक्सटर्नल हेमोरोइड्स जोकि गुदा के छेद के आसपास होती है। बाहरी बवासीर, होने से व्यक्ति असहज महसूस करता है क्योंकि त्वचा रगड़ती रहती है और छिल जाती है। अगर बाहरी बवासीर के अंदर खून का थक्का बन जाता है तो दर्द अचानक और गंभीर हो सकता है। व्यक्ति को छूने से गुदा के आसपास एक लम्प महसूस होता है। थक्का जब गुल जाता है तो बढ़ी हुई चमड़ी (त्वचा टैग) है, पर खुजली या जलन हो सकती है।

इसे भी पढ़ें -  रिएक्टिव आर्थराइटिस: लक्षण, कारण और उपचार | Reactive Arthritis

बवासीर किन कारणों से होती है?

Causes of Piles/Hemorrhoids

बवासीर में मलाशय के आसपास की रक्त वाहिकाएं जोर पड़ने से खिंच कर सूज जाती है। यह फूली हुई शिराएँ ही हेमेरोइड्स या मस्से हैं। यह मुख्य रूप से कब्ज़ और पेट का रोग है। लगातार रहने वाला कब्ज़ से मलाशय में घाव हो सकता है और कब्ज़ से आराम पाने के लिए खाए गए जुलाब से मलाशय की दीवारे कमजोर हो जाती है। इन सबसे शिराएँ सूज जाती है और म्यूकस झिल्ली में खून भर जाता है।

विशेषज्ञों को वास्तव में बवासीर के होने के स्पष्ट कारण नहीं पता हैं। परंपरागत रूप से, बवासीर को पुरानी कब्ज, मल त्याग के दौरान तनाव, और शौचालय पर बैठे लंबे समय तक बैठेने से जोड़ कर देखा जाता है। बवासीर गर्भावस्था के दौरान आम बात है, क्योंकि उस समय बढ़ता हुआ गर्भाशय नसों को दबाता है और कब्ज़ भी रहती है।

बवासीर होने के कई कारण हैं, जैसे:

  1. पुराना कब्ज़। कब्ज़ में मल कठोर हो जाता है और इसे निकालने में बहुत जोर लगाना पड़ता है जिससे गुदा की लाइनिंग छिल जाती है। लगातार ऐसा होने से बवासीर हो सकती है।
  2. बार-बार विरेचल / लेक्सेटिव लेने से
  3. ज्यादा मसालेदार भोजन करना
  4. व्यायाम नहीं करना
  5. जंक फ़ूड अधिक खाना
  6. रात को कम सोना
  7. लगातार बैठने का काम करना
  8. लीवर का कमजोर होना
  9. शौच के दौरान जोर लगना
  10. टॉयलेट में लम्बे समय तक बैठे रहना
  11. लम्बे समय तक दस्त होना
  12. पचास से अहिक उम्र
  13. भारी वज़न उठाना
  14. गर्भावस्था

बवासीर के लक्षण क्या हैं?

Symptoms of Piles

बवासीर का सबसे प्रमुख लक्षण है शौच के दौरान दर्द।

आंतरिक बवासीर में गुदा से खून जाता है, मस्से बाहर निकल सकते है और दर्द होता है। खून की मात्रा कम, ज्यादा या बिलकुल नहीं हो सकती है। कुछ सप्ताह पर ख्हों नहीं आता और फिर गिरने लगता है। शरीर में कमजोरी होने से आंतरिक मस्से बाहर निकल आते हैं। इसं मस्सों में इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

इसे भी पढ़ें -  टीबी के प्रकार - टीबी के लक्षण Tuberculosis in hindi

बवासीर के लक्षण में शामिल हैं:

  1. गुदा के आस पास मस्से महसूस होना
  2. स्टूल के दौरान आंव गिरना
  3. कब्ज़ होना
  4. शौच के दौरान दर्द होना
  5. गुदा में जलन होना
  6. गुदा में खुजली होना
  7. पेट साफ़ नही होना

बवासीर का निदान कैसे किया जाता है?

Diagnosis of Piles

बवासीर को आमतौर पर चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षा से निदान किया जा सकता है। बाहरी बवासीर आम तौर पर स्पष्ट होती है।

  1. पाइल्स में डिजिटल रेक्टल एग्जाम किया जा सकता है।
  2. ऐनल कैनाल को अनोस्कोप से जांचा जा सकता है। अनोस्कोप लाइट वाली छोटी प्लास्टिक ट्यूब है जो गुदा में डाली जाती है।
  3. कोलोनोस्कोप colonoscope भी किया जा सकता है।

बवासीर का इलाज Treatment of Piles

बवासीर के इलाज़ के लिए आपको घर पर अपनी जीवनशैली और खान-पान में ज़रूरी बदलाव लाने चाहिए Hemorrhoids home treatment:

  1. ऐसा भोजन करें जिसमें फाइबर अधिक हो। उच्च फाइबर खाद्य पदार्थ ब्रोकोली, सेम, गेहूं और जई चोकर, पूरे अनाज खाद्य पदार्थ, और ताजे फल शामिल हैं।
  2. कब्ज़ के लिए फाइबर का कोई सप्लीमेंट जैसे की इसबगोल की भूसी ले सकते हैं।
  3. पानी और तरल अधिक मात्रा में पियें।
  4. शौच के दौरान जोर नहीं लगाएं। टॉयलेट सीट पर बहुत देर तक न बैठे रहें।
  5. गर्म पानी के टब में बैठे।
  6. चीज़, चिप्स, फ़ास्ट फ़ूड, आइस क्रीम, मात, फ्रोजेन फ़ूड, और प्रोसेस्ड फ़ूड न खाएं।
  7. ज्यादा फल-सब्जी और सलाद का सेवन करें।

कुछ लोगों में फाइबर को अचानक से बढ़ाने ब्लोटिंग या गैस हो जाती है। धीरे-धीरे फाइबर की मात्रा बढ़ाएं और प्रतिदिन फाइबर के 25-30 ग्राम फाइबर तक बढ़ा लें। इसके अलावा, अपने तरल पदार्थ का सेवन बढ़ाएं।

रोज व्यायाम करें। रोजाना 20-30 मिनट तक ब्रिस्क वाक करें। एरोबिक व्यायाम, आंत के कार्यों को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

Sitz bath में बैठने से खुजली, जलन, और मांसपेशियों की ऐंठन दूर हो सकती है। ज्यादातर विशेषज्ञों प्रत्येक मल त्याग तथा इसके आलावा दिन में दो या तीन, 20 मिनट की sitz bath की सलाह देते हैं। नहाने के बाद गुदा को रगड़ कर नहीं साफ़ करें। हो सके तो हेयर ड्रायर का प्रयोग करें।

इसे भी पढ़ें -  खांसी (khansi): दवा, उपचार और कफ निकालने के उपाय

ज्यादातर मामलों में पाइल्स के लक्षणों में कुछ दोनों में आराम हो जाता है। इसके लिए कुछ ऑइंटमेंट और क्रीम उपलब्ध हैं जो की लगा सकते हैं। बिना पर्ची के बिकने बवासीर स्थानीय एनेस्थेसिया युक्त क्रीम अस्थायी रूप से दर्द को कम कर सकते हैं। क्रीम और hydrocortisone युक्त सपोजिटरी भी प्रभावी है, लेकिन, एक समय में एक सप्ताह से अधिक समय के लिए उन्हें का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकिइससे स्किन atrophy हो सकती है।

आइस पैक को लगाने से सूजन और दर्द में आराम हो सकता है। कड़ी सतह के बजाय कुशन पर बैठें।

फर्स्ट और सेकंड डिग्री की पाइल्स में कब्ज़ को दूर करने से लाभ हो जाता है। अगर इन घरेलू बदलाव से फायदा नहीं होता और पाइल्स की समस्या अधिक है तो डॉक्टर सर्जरी के लिए कह सकते हैं।

बवासीर के इलाज के लिए सर्जिकल  प्रक्रिया

Surgical Process for Piles

कुछ बवासीर अकेले घरेलू उपचार के साथ ठीक नहीं किए जा सकते, क्योंकि तो लक्षण जारी रहते है या आंतरिक बवासीर prolapsed हो गया होता है। पारंपरिक बवासीर हटाने (hemorrhoidectomy) से कम दर्दनाक कुछ विकल्प उपलब्ध हैं जो सर्जन के कार्यालय में या एक अस्पताल में आउट पेशेंट सर्जरी के रूप में किये जा सकते हैं। सर्जरी के द्वारा मस्से या तो हटा दिए जाते हैं या उन्हें बाँध दिया जाता है।

Rubber band ligation

रबर बैंड बंधाव, में एक छोटा सा लोचदार बैंड मस्से पर लगा दिया जाता है, जिससे यह सिकुड़ जाए और आसपास के टिश्यू ठीक होने लगे। ऐसे 2-4 प्रोसीजर के बाद। जो की डेढ़ से दो महीने के गैप पर किये जाते हैं, पाइल्स के मस्से को ठीक कर देते हैं।

अन्य तरीके जो मस्से को हटाने में इस्तेमाल होते हैं: infrared coagulation, sclerotherapy, and cryosurgery.

Hemorrhoidectomy

यदि, बाहर निकला हुआ एक बड़ा पाइल्स का मस्सा है तो हेमेरोइडक्टमी Hemorrhoidectomy

इसे भी पढ़ें -  अपच : dyspepsia ilaj, symptoms, treatment in hindi

की जाती है। इसमें अंदर और बाहर दोनों ही जगह चीरा लगाया जाता है और ऊतक तथा रक्त वाहिकाओं को निकाल देते हैं। यह प्रक्रिया 95% मामलों में पाइल्स का इलाज कर देती है और इसे जनरल एनेस्थीसिया दे कर किया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद कुछ समय दर्द रहता है।

Stapled hemorrhoidopexy

सर्जन एक स्टैपल डिवाइस द्वारा बवासीर को सामान्य स्थिति में एंकर करता है। परंपरागत बवासीर को हटाने की तरह, स्टेपल hemorrhoidopexy भी जनरल एनेस्थीसिया देकर की जाती है। लेकिन यह कम दर्दनाक है और इसमें रिकवरी जल्दी होती है।

यदि पाइल्स के कारणों को दूर नहीं किया जाता तो हो सकता हैं सर्जरी करवाने के बाद फिर से मस्से हो जाएँ। सर्जरी तभी ठीक रहती है जब कारणों को दूर कर दिया जाए या मस्से का आकार बहुत बड़ा हो और ठीक नहीं हो पा रहा हो।

बवासीर की आयुर्वेदिक दवाएं कौन सी हैं?

Ayurvedic Medicines

बवासीर के लिए क्लासिकल और पेटेंटेड दोनों तरह की दवाएं उपलब्ध हैं।

Classical Ayurvedic Medicines for Piles

  1. अभयारिष्ट Abhyarishtha
  2. अर्श कुठार रस Arshakuthar Ras
  3. अर्शोघ्नी वटी Arshoghni Vati
  4. कांकायन गुटिका Kankayan Gutika
  5. बाहुशाल गुड़ Bahushal Gud
  6. सूरन मोदक Sooran Modak

Patented Medicine From various Ayurvedic Pharmacies

  1. पिरोइड्स Baidyanath Pirrhoids
  2. पेलोविन Bhardwaj Pharmaceutical Works Pailovin
  3. पिलोचेक Dabur Pilochek Tablet and Gel
  4. अर्श्कल्प वटी Divya Arshkalp Vati
  5. पाइल्स ऑफ Green Remedies Ayurvedic Medicine Division Piles – Off
  6. पाइलेप्सोल Hashmi Pilepsole Capsules
  7. अर्शोहिल्स Herbal Hills Arsohills Piles Support Tablets
  8. पाईलेक्स Himalaya Pilex
  9. वसेर Jolly Vaseir Anti Piles Capsules
  10. पिलोसिड Kottakkal Ayurveda Pilocid Tablet
  11. पाइल्स क्योर Kudos Piles Cure
  12. पाइल ऑफ Planet Ayurveda Pile Off Capsules
  13. पी गो Riddhi Healthcare P Go Tablet
  14. पायलोविन Sharangdhar Pylowin
  15. टेकपाइल्स Technopharm Private Limited Tecpiles
  16. अर्श कल्प VaidRishi Arsh Kalp Tablets and Gel
  17. आयुरोइड्स Welex AyuRhoids For Piles

बवासीर की होम्योपैथिक दवाएं कौन सी हैं?

Homeopathic Medicines for Piles

  1. Allen A26 Homeopathy Drops
  2. Bakson Pilgo
  3. BBP Pilorin Tablets
  4. BHP Haemor Rid Syrup for Piles
  5. Reckeweg Biochemic Combination Tablets BC 17 for Piles
  6. Reckeweg R13 Hemorrhoidal (Piles) drops
  7. SBL FP Tabs Tablets, FP Ointment
  8. SBL Homeopathy Bio-Combination 17 PILES
  9. Schwabe Aesculus Pentarkan drops for symptoms of varicose veins and piles
  10. Wheezal WL 28 Homeopathic Piles Drops
इसे भी पढ़ें -  रुमेटाइड आर्थराइटिस: लक्षण, कारण और उपचार | Rheumatoid Arthritis

बवासीर के लिए लगाने की दवा

Ointments and Creams

  1. Anovate Cream Beclomethasone Dipropionate Hemorrhoids & Piles
  2. Dhootapapeshwar ARSHA HITA Ointment for Piles
  3. Himalaya Drug Company Pilex Ointment
  4. Uniroyal Herbals Pylno

बवासीर में उपयोगी टिप्स Home Remedies for Piles

  1. मूली का एक कप रस निकाल लें। इसमें एक चम्मच देसी घी मिलाकर पियें। ऐसा सुभ और शाम करें।
  2. चटपटा मसालेदार, जंक फ़ूड, मैदा, भारी भोजन न करें।
  3. कब्ज़ न होने दें। मट्ठा में लवणभास्कर चूर्ण मिलाकर पियें।
  4. खाने में सूरन, बथुआ, चौलाई, कच्चे पपीते की सब्जी खाएं।
  5. एक कप गाय के दूध में नीबू निचोड़कर तुरंत पी जाएँ।
  6. पपीते और मूली को डाइट में शामिल करें।
  7. मूली का रस Radish juice पियें।
  8. आंवले का रस Indian Gooseberry Juice पियें या आवले का पूव्दर को आधे चम्मच की मात्रा में सेवन करें।
  9. मुनक्का 5 को दूध में उबाल कर खाने और इस दूध को पीने से कब्ज़ दूर होती है।
  10. किशमिश, अंजीर खाएं।
  11. अंजीर Anjeer or Dried Figs in Piles 3-4 को रात में पानी में भिगो दें। सुबह यह पानी पी लें और अंजीर खा लें।
  12. दलिया, दूध खाएं।
  13. कब्ज़ बढ़ाने वाला भोजन न करें। मांसाहार, अंडा, चीनी, मिठाई, मैदा, चाय-काफी न लें।

Piles or Hemorrhoids are swollen, inflamed veins around the anus or inside the lower rectum. They can occur due to straining to have a bowel movement, pregnancy, aging and chronic constipation or diarrhea.

Internal hemorrhoids involve the veins inside rectum. They may bleed painlessly.

Prolapsed hemorrhoids may stretch down until they bulge outside anus. A prolapsed hemorrhoid may go back inside rectum on its own, or can gently push it back inside.

External hemorrhoids involve the veins outside the anus. They can be itchy or painful and can sometimes crack and bleed.

Hemorrhoids are very common in both men and women. The most common symptom of hemorrhoids inside the anus is bright red blood covering the stool. Symptoms usually go away within a few days. Painful hemorrhoids usually stop hurting on their own in 1 to 2 weeks. For problem causing chronic pile one should consult doctor. The doctor may recommend lifestyle change and surgery if needed. Rubber band ligation, or hemorrhoidectomy (surgical removal of the hemorrhoid) may be needed if internal hemorrhoids are prolapsed or very large.

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!