कान बहना लक्षण उपचार (Otorrhoea) in Hindi

जानिये कान का बहना (कान से मवाद या पीप आना) क्या होता है इसे इंलिश में otorrhoea कहते हैं? इसके क्या कारण होते हैं और बच्चों के कान बहने के क्या कारण हैं? कान बहने का कैसे इलाज किया जाता है? कान बहने का इलाज़ क्या है और क्या घरेलू उपाय करने चाहिए?

कान, सभी स्तनधारियों में सुनने के लिए आवश्यक है। यह शरीर के संतुलन और स्थिति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कभी कभी कान में से लाल-पीला मवाद बहना को कान बहना कहते हैं। इसे मेडिकल भाषा में ओटोरिया भी कहते हैं। कान के बहने के कई कारण हो सकते हैं। यह शिकायत बच्चों और बड़े सभी में देखी जाती है।

कान का बहना

कई बार बच्चे कान में नुकीली चीज़ डाल लेते हैं जिससे कान बहने लग सकता है। किसी के थप्पड़ मार दिए जाने पर भी कान में घाव हो सकता है, पर्दे को नुकसान हो सकता है और ऐसे में भी कान से डिस्चार्ज (कान बहना) होने लग सकता है। जुखाम, खांसी, गले के संक्रमण, लेट कर दूध पीने आदि से बच्चों के कान में संक्रमण हो सकता है जिससे कान बहने लगता है। कान में कोई फोड़ा-फुंसी हो, पानी, दूध, या कीड़ा जैसी कोई भी बाहरी वस्तु के जाने से संक्रमण होने पर पस बहने लग सकता है।

कान के संक्रमण का सबसे बड़ा लक्षण है, कान से कान बहना (बदबूदार स्राव), कान का फूल जाना और पस मवाद निकलना।

मानव कान The Human Ear

कान किसी भी जीव में सुनने के लिए आवश्यक हैं। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवेदी अंग है। मनुष्य के कान को रचना की दृष्टि से तीन भागों में बांटा जा सकता है:

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बाह्य कान External ear

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कान का जो भी हिस्सा हमें बाहर से ही दिखाई दे जाता है, उसे बाहरी कान या बाह्य कान कहते हैं। इसमें कर्णपल्लव अथवा पिना है जो बाहर से दिखने वाला कान का शेप है। इसके बाद कर्ण नलिका ear canal है जो 2-3 सेंटीमीटर लम्बी नली है।

इयर कैनाल के आखिरी सिरे पर एक पतली, गोलाकार झिल्ली है जिसे हिंदी में कर्णपटह या कान का परदा कहते हैं। इसे इंग्लिश में टिम्पैनम tympanum कहते हैं।

मध्य कान Middle ear

मध्य कान, बाहरी कान और अंतर कान के बीच स्थित होता है। इसमें हैमर, अन्विल, और स्टिरप नाक तीन हड्डियाँ होती है। ये आपस में मिली हुई होती हैं। मध्य कान में वायु रहती है और इस भाग का निचला हिस्सा गले को जा रही यूस्टेकी / यूस्टेचिअन eustachian tube ट्यूब से जुड़ा होता है। इस ट्यूब से मध्यकान गले से जुड़ता है। यूस्टेचिअन ट्यब, कान से तरल पदार्थ निकालने में सहायक होती है तथा कान में हवा के दबाव के सही स्तर को बनाएं रखती है।

आंतर कान inner ear

आंतरिक कान में कोक्लिया नामक एक कुंडलित नलिका होती है। कोक्लिया एक द्रव्य से भरा होता है। इसमें नर्व सेल्स होती है जो ध्वनियों को सुनने के लिए ज़रूरी होती हैं। कोक्लिया ऑडिटरी नर्वस से जुड़ा होता है जो दिमाग में जाती हैं।

कोक्लिया आंतरिक कान का एक हिस्सा है जो घोंघे के शेल (कॉक्लिया घोंघे के लिए ग्रीक शब्द है) की तरह दिखता है। कोक्लिया को कंपन के रूप में ध्वनि प्राप्त होती है, जिससे स्टीरियोइसिलिया stereocilia हिलता है। स्टीरियोइसिलिया फिर इन कंपनों को तंत्रिका आवेगों में परिवर्तित करते हैं जो कि मस्तिष्क में समझे जाते हैं।

ओटोरिया क्या है? What is Otorrhoea?

कान बहना, बाह्य कान या मध्य कान से हो सकता है। इससे अक्सर सुनाई देने में परेशानी हो सकती है। कान से जो डिस्चार्ज हो रहा होता है उसमें सॉफ्ट वैक्स, म्यूकस जैसा पदार्थ या ऐसे द्रव्य का स्राव हो सकता है जिसमें बदबू आती हो।

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ओटोरिया के लक्षण

  1. अंदरूनी या बाहरी कान में गंभीर एडिमा Severe edema in the inner and or outer ear
  2. कान के अंदर या चारों ओर दबाव लगना Pressure like feeling in or around the ear
  3. कान से स्राव discharge from the ear
  4. कानों में दर्द Pain in one or both ears
  5. चक्कर आना या अस्थिर होना Dizziness or being unsteady
  6. थोड़ा या आंशिक रूप से कम सुनाई देना Slight or partial hearing loss
  7. सूजन swelling or inflammation

कान बहना के क्या कारण हो सकते हैं?

कान बहने के कई कारण हो सकते हैं जो बाह्य या मध्य कान से जुड़े होते हैं जैसे कैनाल में सूजन या संक्रमण, मध्य कान में संक्रमण, कान का पर्दा फट जाना आदि।  कान से ब्लड डिस्चार्ज का मतलब है कान में चोट लग जाना।

मध्य कान, कान का वो हिस्सा है जो इयरड्रम के बाद middle part of the ear lies behind the eardrum होता है। मध्य कान में इन्फेक्शन middle ear infection तब होता है जब नाक और गले के बैक्टीरिया/वायरस वहां पहुँच जाते हैं। ऐसा बच्चों में देखा जाता है। इसे ओटिस मीडिया otitis media कहते हैं। अक्सर ऐसा कोल्ड, एलर्जी, या श्वशन रोगों से हो सकता है। कान के इन्फेक्शन में मध्य कान फ्लूइड से भर जाता है जिससे दर्द, कम सुनाई देना, प्रेशर, बुखार आदि लक्षण हो जाते हैं।

बाह्य कान External ear canal से जुड़े कारण

1- कान की नली में सूजन Acute otitis externa:

बैक्टीरिया Pseudomonas aeruginosa और Staphylococcus aureus से कान में इन्फेक्शन हो जाता है। इसमें कान बहना मुख्य लक्षण होता है। इसमें external auditory canal में सूजन होती है। कान लाल हो जाता है और एडिमा से सूजन दिखती है।

इसमें सुनाई देने में आम तौर पर कोई परिवर्तन नहीं होता है, जब तक संपूर्ण नहर बाधित नहीं हो जाती। ओटॉस्कोपी में कैनाल पतली, सूजी हुई और इन्फेक्टेड लगती है। इसमें मरीज को सलाह दी जानी चाहिए कि वे कानों में कुछ भी न डालें या उन्हें गीला न करें। उन्हें तैराकी से भी बचा जाना चाहिए और उनका सिर गीला नहीं होना चाहिए।

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एंटीमाइक्रोबियल दवा और स्टेरॉयड वाली क्रीम से इसे ठीक करने में मदद होती है।

यदि बैक्टीरियल और फंगल इन्फेक्शन हो तो Locorten-Vioform जैसी ड्रॉप्स का प्रयोग किया जा सकता है। Locorten Vioform ear drops contain the active ingredients Flumetasone pivalate and Clioquinol. Locorten Vioform ear drops are used to treat infection and inflammation of the external ear. The drops contain an antibacterial and antifungal ingredient to combat infection and a steroid which acts to reduce inflammation.

2- कान की त्वचा में सूजन Dermatitides

कान बहने के साथ एक्जिमा, सोराइसिस हो सकता है।

3- कान की नली में पुरानी सूजन Chronic otitis externa / swimmer’s ear

ऐसा दोनों कानों में हो सकता है और इसमें कान में दर्द नहीं होता। ऐसा बार बार हो सकता है। इसमें कान की नली थिक होती है और उसे आसानी से चोट लग सकती है।

4- कान में फोड़ा Furunculosis

इसमें कान में दर्द भी रहता है और फोड़े के फटने पर बहुत स्राव (कान बहना) हो सकता है।

मध्य कान Middle ear canal से जुड़े कारण

1- मध्य कान में सूजन और स्राव Chronic suppurative otitis media (tubotympanic)

एक्यूट ओटिटिस मीडिया में मध्य कान में इन्फेक्शन से सूजन हो जाती है। इससे टिम्पैनिक मेम्ब्रेन या टिम्पैनिक झिल्ली या इयरड्रम फट जाती है जिससे म्यूकस के साथ स्राव होने लगता है। अगर सूजन रहती है और टिम्पैनिक मेम्ब्रेन या टिम्पैनिक झिल्ली या इयरड्रम ठीक नहीं हो पाती तो बार बार म्यूकस वाला स्राव होने लगता है।

2- Chronic suppurative otitis media (attico-antral)

लम्बे समय तक यूस्टेचिअन (Eustachian) ट्यूब के सही काम नहीं करने से एटिक रीजन में छेद हो सकता है।

इसमें कोलेस्टेटोटामा cholesteatoma और कम, बदबूदार स्राव कान से होता है। इसमें सुनाई देने में भी समस्या हो जाती है।

3- मस्टोइड कैविटी से डिस्चार्ज Discharging mastoid cavities

मास्टॉयड सर्जरी के बाद, कुछ रोगियों को में ओटोरिया हो सकता है।

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4- टेम्पोरल बोन का फ्रैक्चर होना Fractured temporal bone:

इसमें कान का पर्दा फट सकता है जिससे सुनाई देना बंद हो जाता है। इससे स्राव में रक्त आ सकता है।

5- वेंटिलेशन ट्यूब (ग्रोमेट) लगाने के बाद कान बहना Otorrhoea after grommets (a tube inserted through the tympanic membrane for drainage of the middle ear)

ग्रोमेट में इन्फेक्शन हो सकता है जिससे म्यूकस वाला डिस्चार्ज हो सकता है।

कान बहने का इलाज़ क्या है?

कान बहने का इलाज़ मुख्य रूप से एंटीबायोटिक्स से किया जाता है।

बाहरी कान से स्राव External ear

  • टोपिकल / लगाने वाले एंटीबायोटिक दिए जाते हैं।
  • इसमें कान को साफ़ ear toilette भी किया जा सकता है।
  • लगाने के लिए 1% hydrocortisone cream भी दी जा सकती है।

मध्य कान Middle ear

  • इसमें टोपिकल एंटीबायोटिक दिए जाते हैं और कान की सफाई की जाती है।
  • यदि cholesteatoma होता है तो सर्जरी की जाती है।

टेम्पोरल बोन का फ्रैक्चर होना

इसमें कारण टेम्पोरल बोन का फ्रैक्चर हो जाना है इसलिए इसमें एंटीबायोटिक का दिया जाना बहुत फायदेमंद नहीं है।

ग्रोमेट Grommets

  • सक्शन के द्वारा ग्रोमेट साफ़ किये जा सकते है और एंटीबायोटिक ड्रॉप्स डाली जा सकती हैं।
  • बार बार होने पर ग्रोमेट हटाए जा सकते हैं।

बच्चों में कान बहना

बच्चों में कान का बहना अक्सर देखा जाता है। उनका इलाज़ भी एंटीबायोटिक और इयर ड्राप से किया जाता है।

यदि स्राव थिक, प्रचुर या म्यूकोइड है तो यह मध्य कान से आ रहा हो सकता है, ऐसे में इलाज़ ओरल एंटीबायोटिक दवाओं से होना चाहिए। बैक्टीरियल इन्फेक्शन में बच्चों को एमोक्सिसिलिन Oral Amoxycillin 45mg/kg/dose 12 hrly; Duration: < 2 years of age: 10 days > 2 years of age: 5-7 days दी जा सकती है।

सिलोक्सन इयर ड्रॉप्स Ciloxan Ear Drops: 5 drops into the affected ear canal(s) twice daily for up to nine days सीप्रोफ्लॉक्सासिन, को बाहरी कान से डिस्चार्ज में दिया जा सकता है। सिलोक्सन ड्रॉप्स  उपयोग करने के लिए सबसे सुरक्षित ड्रॉप हैं अगर स्राव का कारण कान के पर्दे में छेद हो सकता है।

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अगर डिस्चार्ज केवल कुछ दिन से है तो केवल ओरल एंटीबायोटिक दवाओं से इसे ठीक किया जा सकता है।

एंटीबायोटिक ड्रॉप्स का प्रयोग तब किया जाता है जब बाहरी कान Pinna में दर्द हो, स्राव में बदबू हो, और एक्सटर्नल ऑडिटरी कैनाल में सूजन हो। स्टेरॉयड इयर ड्रॉप्स डालने से दर्द में आराम हो सकता है।

अगर एक्सटर्नल ऑडिटरी कैनाल में दर्द नहीं है लेकिन खुजली हो रही है तो यह फंगल / यीस्ट इन्फेक्शन fungal/ yeast से हो सकता है। इसमें Kenacomb or Locacorten Vioform drops डाली जा सकती हैं।

कान में किसी भी समस्या के होने पर घरेलू उपचार नहीं करें। डॉक्टर को दिखाएँ, यदि:

  1. स्राव सफेद, पीला, या लाल है।
  2. यह किसी तरह की चोट के बाद से होने लगा है।
  3. स्राव 5 दिनों से अधिक दिन तक हो रहा है।
  4. इसके साथ बुखार और सिर दर्द भी है।
  5. सुनाई देने में दिक्कत है।
  6. कान में लाल है और सूजन दिख रही है।

कई मामलों में कान में इन्फेक्शन अपने आप ही 1-2 सप्ताह में ठीक हो जाता है। लेकिन सावधानी के लिए पहले ही किसी कान के ENT विशेषज्ञ को दिखाएँ, राय लें और इलाज़ शुरू करें।

थोड़ी सी असावधानी से कान को आंतरिक नुकसान हो सकता है जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। बाह्य कान से संक्रमण आगे फ़ैल सकता है जिससे जटिलताएं बढ़ सकती हैं। कान के इन्फेक्शन में कान में कुछ भी नहीं डालना चाहिए। कान को सूखा रखना चाहिए और बच्चों में, लेटते समय भी सिर को ऊँचा रखना चाहिए। घर पर कान पर गर्म सेंक दी जा सकती है।

ऊपर दी गई जानकार को स्वयं इलाज़ के लिए इस्तेमाल नहीं करें। हमारा उद्देश्य केवल जानकारी देना है जिससे आप रोग को अच्छे से समझ सकें और डॉक्टर से सही राय ले सकें।

Otorrhoea is a common ear, nose, and throat (ENT) symptom. It requires accurate assessment for proper treatment. Otorrhoea can be defined as discharge from the ear and may originate from the ear canal or the middle ear.

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It is often associated with hearing loss and there is frequently no pain associated.

The discharge, ranges from soft wax (yellow/white and mistaken for pathological discharge) through clear, mucoid and frankly purulent fluid that may have an offensive odour.

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One Comment

  1. मेर कान एक साल से बहे रह हे मेए काय करु

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