ओटाइटिस एक्सटर्ना (बाहरी कान में सूजन) Otitis externa in Hindi

जानिये कान का इन्फेक्शन ओटाइटिस एक्सटर्ना (otitis externa)क्या है? क्या है और इसके क्या लक्षण होते हैं? ओटाइटिस एक्सटर्ना क्या है? के क्या कारण हो सकते हैं और इसका ट्रीटमेंट कैसे किया जाता है?

जब कान की नलिका इयर यानिकी कैनाल ear canalया एक्सटर्नल ऑडीटरी मेटस, में सूजन हो जाती है तो इसे ओटाइटिस एक्सटर्ना Outer Ear Infection (Swimmer’s Ear) कहते हैं। यह सूजन संक्रमण, एलर्जी या जलन के कारण हो सकती है। इसे आमतौर पर इयर ड्राप से ठीक किया जाता है।

कान एक बहुत ही महत्वपूर्ण सेंसरी ऑर्गन है। यह ध्वनियों को सुनने का काम करता है। मनुष्य का कान तीन भागों में बांटा जा सकता है। बाहरी कान, मध्य कान और आंतरिक या आभ्यंतर कान।

बाह्य कान में कर्णपल्लव ear pinna होता है जो लचीले फाईब्रो कार्टिलेज fibro cartilage और एडिपोज टिश्यू adipose tissue से बना होता है। पिना चपटा, फैला हुआ और कूपीनुमा होता है।

पिना से जुडी हुई नलिका इयर कैनाल ear canal या एक्सटर्नल ऑडीटरी मेटस external auditory meatus कहलाती है। यह पिना के बेस के भीतर जाती हुई एक नली है। इसकी लम्बाई करीब 25 मिलीमीटर की होती है। इसके आंतरिक भाग के छोर पर टिम्पेनिक झिल्ली tympanic membrane होती है। यह झिल्ली पतली, दृढ और तिरछी होती है। इसी झिल्ली को कान का परदा या ear drum कहते हैं। यह त्वचा की एपिडर्मिस में बनी होती है और इसके बाद मध्य कान शुरू हो जाता है।

बाहरी ऑडीटरी मेट्स external auditory meatus की त्वचा में स्वेट ग्लैंड्स पायी जाती हैं। ये स्वेट ग्लैंड्स मोम स्रावित करती है जो गाढ़ा, पीला रंग का पदार्थ होता है। इस मोम ear wax या सेरुमेन cerumen का काम कान में धूल, पानी, या बाहरी वस्तुओं को रोकने का होता है जिससे यह कान के अंदर जा कर नुकसान न करें।

ओटिटिस एक्सटर्ना ज्यादातर मामलों में एक हफ्ते में ठीक हो जाता है। जब यह कम दिनों के लिए रहता है तो इसे एक्यूट ओटिटिस एक्सटर्ना कहा जाता है। हालांकि, यह स्थिति कभी-कभी तीन महीने या उससे अधिक के लिए बनी रहती है और तब इसे क्रोनिक ओटिटिस एक्सटर्ना कहा जाता है।

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ओटाइटिस एक्सटर्ना क्या है?

बाहरी कान में सूजन को ओटाइटिस एक्सटर्ना कहा जाता है। सूजन संक्रमण के कारण होती है।

ओटाइटिस एक्सटर्ना में सूजन बाहरी कान तक सीमित रहती है और इयर ड्रम तक नहीं जाती।

ओटाइटिस एक्सटर्ना क्यों होता है?

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ओटाइटिस एक्सटर्ना, कान की नली में होता है जो हमें बाहर से दिखती है। यह नली पतली, गर्म, होती है और कई बार इसमें बैक्टीरिया, जर्म्स, यीस्ट, फंगस पैदा हो जाते हैं जो संक्रमण का कारण बन जाते है और संक्रमण से सूजन हो जाती है।

कुछ परिस्थितियाँ में कान में इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

कानों में पानी, शैम्पू आदि का जाना

नहाते या तैराकी से कान में पानी चला जाता है। कान में शैम्पू, हेयर स्प्रे, या दूसरे कुछ बाहरी प्रोडक्ट भी जा सकते हैं।

ऐसे बाहरी पदार्थों के कान में जाने पर खुजली होती है। इसे साफ़ करने की कोशिश के दौरान कान में खरोंच लग सकती है। खरोंच से कान चोट और सूजन हो सकती है। सूजन युक्त त्वचा पर बैक्टीरिया का हमला हो सकता है तथा कान की गर्म, अँधेरी और गीली नली में जर्म्स तेजी से ग्रोथ कर सकते हैं।

तैराकी नियमित करने वाले लोगों में अक्सर यह समस्या पायी जाती है। इसलिए इस कंडीशन को स्विमर्स इयर otitis externa is also called swimmer’s ear भी कहते हैं।

त्वचा की समस्याएं

एक्जिमा या सोराइसिस में कान की नली भी प्रभावित हो सकती है और त्वचा सूखी और परतदार बन सकती है। यदि ऐसा होता है तो ओटिटिस एक्सटर्ना अधिक होने की संभावना है।

गर्म मौसम

गर्म, आर्द्र और ‘पसीने वाला’ मौसम में ओटाइटिस एक्सटर्ना होने की अधिक संभावना है।

कान में बहुत अधिक वैक्स होना

कुछ लोगों में कान में बहुत अधिक वैक्स बनता है। यह वैक्स वैसे तो कान की सुरक्षा करता है लेकिन अधिकता में होने पर कान में पानी तथा अन्य बाहरी पदार्थ फंस सकते हैं। किसी भी बाहरी चीज़ के कान के अंदर फंस जाने से इन्फेक्शन हो सकता है।

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मध्य कान में संक्रमण

मध्य काम ने होने वाला संक्रमण otitis media डिस्चार्ज पैदा करता है। जब यह डिस्चार्ज कान में फंस जाता है तो ओटाइटिस एक्सटर्ना हो सकता है।

ओटाइटिस एक्सटर्ना के लक्षण क्या हैं?

आम लक्षणों में खुजली, कान बहना, अस्थायी रूप से कम सुनाई देना और दर्द शामिल हैं। कान ब्लॉक्ड लग सकता है। इसमें अक्सर एक कान ही प्रभावित होता है।

  • कान में दर्द ear pain, which can be severe
  • कान में खुजली itchiness in the ear canal
  • कान बहना discharge of liquid or pus from the ear
  • सुनाई कम देना some degree of temporary hearing loss

ओटाइटिस एक्सटर्ना के लिए उपचार क्या है?

ओटाइटिस एक्सटर्ना के लिए प्रायः कोई जांच नहीं की जाती क्योंकि यह देखने से ही सपष्ट हो जाता है कि केवल बाहरी कान की दिक्कत है।

इसके लिए स्वयं से कुछ इयर ड्रॉप्स डाली जा सकती हैं। ये इयर ड्रॉप्स बिना प्रिस्क्रिप्शन के उपलब्ध हैं जैसे ऐसे ड्रॉप्स जिनमे 2% एसिटिक एसिड acetic acid। हो।

प्रभावित कान में ड्रॉप्स डालने के लिए बिस्तर पर करवट कर लेट जाएँ जिससे कान जिसमें दवा डालनी हो वो सीधा हो जाए।

  • कुछ ड्रॉप्स को कान में डलवायें और कुछ मिनट लेते ही रहें।
  • पिना को 2-3 बार दबाएँ जिससे ड्रॉप्स अंदर चली जाएँ।
  • ड्रॉप्स को जितनी बार बताया हो नीम से डालें।

अगर कान में दर्द और सूजन हो, कान बिलकुल ब्लॉक्ड हो जाए या कंडीशन क्रोनिक या पुरानी हो जाए और बार-बार होती रहे तो इयर ड्रॉप्स के अलावा और उपचार की ज़रूरत हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर इसके लिए कई और दवाएं दे सकते हैं जो कंडीशन के ऊपर निर्भर करता है।

ओटाइटिस एक्सटर्ना के उपचार के लिए चार प्रमुख प्रकार के ईयर ड्रॉप्स उपलब्ध हैं:

  • एंटीबायोटिक ईयर ड्रॉप्स  – यह बैक्टीरिया संक्रमण का इलाज कर सकता है।
  • कॉर्टिकोस्टोरिएड  ईयर ड्रॉप्स – यह सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।
  • एंटिफंगल  ईयर ड्रॉप्स  – यह एक कवक संक्रमण का इलाज कर सकता है।
  • एसिडिक ईयर ड्रॉप्स  – यह बैक्टीरिया को मारने में मदद कर सकता है।
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कभी-कभी उपरोक्त दवाओं का एक संयोजन दिया हजा सकता है, जैसे कि एंटीबायोटिक और कॉर्टिकोस्टोराइड ईयर ड्रॉप्स।

डॉक्टर ओटाइटिस एक्सटर्ना में 7 दिनों तक चलने वाला इयर ड्राप का कोर्स दे सकते हैं जिसमें एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड हो। एंटीबायोटिक बैक्टीरिया को नष्ट करता है और स्टेरॉयड flumetasone and clioquinol सूजन को कम करता है।

दर्द के लिए, दर्द निवारक जैसे की पेरासिटामोल या आईबुप्रोफेन दी जा सकती है।

कई बार कान की सफाई ज़रूरी हो जाती है जिससे दवा ठीक से कान के अंदर जा सके और इलाज हो सके। इसके लिए डॉक्टर सिरिंज से या स्वैबिंग से कान साफ़ करते हैं।

यदि संक्रमण विशेष रूप से गंभीर है या कान के आसपास त्वचा में संक्रमण (सेल्युलाइटिस) है तो ओरल एंटीबायोटिक खाने के लिए भी दी जा सकती हैं।

कुछ मामलों में दवा डालने से भी लाभ नहीं होता क्योंकि:

कुछ लोगों को इयर ड्रॉप्स से एलर्जी हो सकती है जिससे दवा के डालने पर खुजली कम होने के बजाए बढ़ जाती है। ऐसे में डॉक्टर से बात करें। हो सकता है दवा बदलने की ज़रूरत हो।

कुछ मामलों में संक्रमण फंगस के कारण होता है न कि बैक्टीरिया के कारण। ऐसे में एंटीबायोटिक का प्रयोग लाभ नहीं करता। डॉक्टर इसके लिए एंटीफंगल ईयर ड्रॉप्स दे सकते है जिनके इस्तेमाल से कुछ सप्ताह में इन्फेक्शन साफ़ हो सकता है।

हो सकता है, बाहरी कान में इन्फेक्शन का कारण मध्य कान में हुआ इन्फेक्शन हो। अगर कान की नली डिस्चार्ज से भरी होती है तो डॉक्टर के लिए कई बार यह बताने में मुश्किल हो सकता है कि यह बाहरी कान (ओटिटिस एक्टर्ना) से है या मध्य कान के संक्रमण (ओटिटिस मीडिया) से है। इस स्थिति में ओरल एंटीबायोटिक दवाओं की आवश्यकता होती है।

ओटाइटिस एक्सटर्ना को होने से कैसे रोकें?

कई स्टेप्स हैं जो ओटाइटिस एक्सटर्ना को प होने से रोकने में मदद करती हैं, इलाज के बाद तथा दुबारा होने से बचाती हैं।

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कान को कॉटन बड्स से साफ़ नहीं करें। इससे वैक्स कान के अंदर जा सकता है। रगड़ से कान की नली में खरोच या सूजन आ सकती है। किसी भी चीज से कान की बहुत अधिक सफाई नहीं करें। इससे कान की लाइनिंग खुरच सकती है।

कान को साफ़ और सूखा रखें। तैराकी करते समय ईयर प्लग का इस्तेमाल कर सकते हैं। पानी से निकलने के बाद, कूदने से भी पानी ढीला होकर निकल सकता है।

साबुन या शैम्पू को कान में न जाने दें।

अगर कान में बहुत अधिक वैक्स बनता हो तो इसको कम करने के लिए वैक्स ड्रॉप्स या ओलिव आयल का प्रयोग कर सकते हैं।

Otitis externa is a inflammatory condition of the external ear canal causing redness and swelling of the tube between the outer ear and eardrum. This condition is also known as swimmer’s ear because repeated exposure to water can make the ear canal more vulnerable to inflammation. This condition can be caused due to irritation, bacterial, fungal infections and allergies.

The symptoms include pain and itching in the ear, ear discharge and loss of hearing.

With treatment, these symptoms should clear up within a few days. However, some cases can persist for several months or longer.

Otitis externa sometimes gets better without treatment, but it can take several weeks. Doctor can prescribe ear drop medication that usually improves the symptoms within a few days.

To reduces chances of developing external ear infections or Otitis externa, avoid inserting cotton wool buds and other things into ears.

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