जापानी बुखार Japanese encephalitis क्या होता है?

जापानी बुखार के क्या लक्षण है? इससे शरीर पर क्या असर होता है? जापानी बुखार का उपचार क्या है? जापानी बुखार से बचाव के उपाय prevention of Japanese encephalitis क्या है?

जापानी बुखार एक दिमागी बुखार है। यह फ्लैविवायरस के संक्रमण से फैलता है। ये वायरस इंसानों में मच्छरों के जरिए आता है। साल 1871 में जापान में इस वायरस का पहला केस देखा गया था और इसलिए इसे जैपनीज इन्सेफ्लाइटिस कहते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दुनिया में 68 हजार जापानी बुखार के मामले सामने आते हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्वी इलाके और बिहार में इसका प्रकोप सबसे ज्यादा देखा जाता है। सरकारी आंकड़ों के साल 2005 में करीब 1500 लोग जापानी बुखार के चलते मारे गए। 2005 के बाद इसके प्रति सरकार ने कदम तो उठाए लेकिन जापानी बुखार फिर भी उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, बुखार, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और नागालैंड में फ़ैल रहा है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर माह में यह ज्‍यादा फैलता है।

जापानी बुखार बचाव से और इसके प्रति जागरूकता ज़रूरी है। इसके लक्षण दिखते ही डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए जिससे समय पर उपचार किया जा सके। इसके अलावा टीकाकरण, मच्छरों से बचाव, घर के आसपास पानी जमा न होने देने आदि से इससे बचा जा सकता है।

अन्य नाम: जापानी बुखार, जापानी इन्सेफेलाइटिस, जापानीज इन्सेफेलाइटिस, जापानी इंसेफ्लाइटिस, जापानी इंसेफेलाइटिस,जापानी एनसिफेलिटिस

  1. रोग का प्रकार: वायरल रोग
  2. लक्षण: बुखार, सिर में दर्द, दिमागी लक्षण
  3. संचार: वायरस से ग्रस्त मच्छरों के काटने से
  4. इलाज: कोई विशिष्ट चिकित्सा नहीं है। गहन सहायक चिकित्सा दी जाती है।
  5. रोकथाम: मच्छरों के काटने से बचें

जापानी बुखार क्या है?

What is Japanese encephalitis/Japani fever/Dimagi bukhar?

जापानी बुखार, इन्सेफेलाइटिस एक दिमागी बुखार है जिसमें दिमाग में सूजन आ जाती है। यह एक वायरल रोग है जोकि मच्छरों के काटने से हो सकता है। यह वायरस शरीर के संपर्क में आकर सीधे दिमाग को अपना निशाना बनाता है।

एशिया में वायरल एन्सेफलाइटिस के सबसे आम रूपों में से एक जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस Japanese encephalitis virus है, जो मच्छर से उत्पन्न फ्लैवियरस flavivirus के कारण होता है। यह रोग डेंगू, येलो और पश्चिम नाइल वायरस के जीनस से संबंधित है।

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जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस कुलेक्स प्रजातियों के संक्रमित मच्छरों (मुख्यतः क्यूलेक्स ट्राटायनहिन्चस) के काटने से मनुष्यों में प्रेषित होता है। संक्रमित मनुष्य में दूसरे फीडिंग मच्छरों में फैलने लायक वायरस नहीं होते इसलिए यह वायरस मच्छरों, सूअरों और / या पानी के पक्षियों (एनज़ुटिक चक्र enzootic cycle) से अपना साइकिल पूरा करता है। केवल घरेलू सूअर और जंगली पक्षी जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस के वाहक हैं।

इस कारण से यह रोग मुख्य रूप से ग्रामीण और ग्रामीण इलाकों के पास के क्षेत्रों में पाया जाता है, जहां मनुष्य इन कशेरुक मेजबानों के करीब रहते हैं।

एशिया के अधिकांश समशीतोष्ण क्षेत्रों में, जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस गर्म सीजन के दौरान ज्यादा फैलता है। उष्णकटिबंधीय इलाकों में इसका संचरण वर्ष भर हो सकता है लेकिन अक्सर बरसात के मौसम में यह तेजी से फैलता है और चावल उगाने वाले हिस्सों में अधिक देखा जाता है।

चावल के खेतों व अन्य रुके हुए पानी में पैदा हुए मच्छर (मुख्यतः कुलेक्स Culex tritaeniorhynchus group ग्रुप) स्थानीय सूअरों और जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस से ग्रस्त जंगली पक्षियों पर को काट कर संक्रमित हो जाते हैं। संक्रमित मच्छरो जब मानव और जानवरों को काटते हैं तो जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस उसके शरीर में चला जाता है। जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस घरेलू सुअरों और जंगली पक्षियों के रक्त प्रणालियों में विस्तारित होता है।

जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस व्यक्ति से व्यक्ति को प्रेषित नहीं किया जाता है। स्पर्श या चुंबन से वायरस नहीं फैलता।

जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस प्राथमिक रूप से बच्चों को प्रभावित करता है क्योंकि वयस्को में इसके प्रति इम्युनिटी होती है जो बच्चों में नहीं पायी जाती।

यह रोग आम तौर पर बुखार और सिरदर्द जैसे हल्के लक्षण के साथ शुरू होता है। 250 मामलों में से लगभग 1 मामले में रोग बहुत बिगड़ जाता है और अचानक बुखार, सिरदर्द, कड़ापन, भटकाव, कोमा और दौरे पड़ने लगते हैं।

जापानी बुखार के क्या लक्षण है? इससे शरीर पर क्या असर होता है?

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Symptoms of Dimagi Bukhar

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जापानी बुखार, दिमागी बुखार है और इसलिए जब यह होता है तब सीधे दिमाग के फंक्शन पर असर पड़ता है। इससे सुनने, देखने, सोचने, और भूख सभी पर असर हो जाता है।

  1. शुरुआती लक्षण में बुखार, सिरदर्द, गर्दन में जकड़न, कमजोरी और उल्टी होना आदि होता है।
  2. बाद में, भूख नहीं लगना, तेज बुखार, भ्रम, पागलपन के दौरे आना, लकवा मारना तथा अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं।
  3. छोटे बच्चों में बुखार, दूध न पीना, ज्यादा देर तक रोना, और उल्टी होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।

जापानी बुखार से कौन लोग ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं?

जापानी बुखार अधिकतर 1 से 14 साल की उम्र के बच्‍चों में के बच्चों या 65 वर्ष से ऊपर के लोगों को चपेट में लेता है।

क्या जापानी बुखार का असर लम्बे समय तक रह सकता है?

  1. हाँ, इससे दिमाग को क्षति हो सकती है और दिमागी फंक्शन पर असर हो सकता है।
  2. इससे सोचने, समझने, व्यवहार, और न्यूरोलॉजिकल समस्या, लकवा, दौरे पड़ना आदि देखे जाते हैं।

जापानी बुखार का उपचार क्या है?

Japanese encephalitis treatment

  1. इसकी कोई विशेष चिकित्सा नहीं है।
  2. इसके लिए गहन सहायक चिकित्सा supportive to relieve symptoms and stabilize the patient की जाती है

जापानी बुखार से बचाव के उपाय prevention of Japanese encephalitis क्या है?

  1. समय से टीकाकरण कराएं साफ-सफाई से रहें।
  2. पानी न इकट्टा होने दें।
  3. मच्छरों के काटने से repellents, long-sleeved clothes, coils and vaporizers बचें।
  4. बारिश के मौसम मच्छरों से ज्यादा बचाव करें।

Japanese encephalitis is a life-threatening viral disease spread by mosquitoes-transmitted viruses, Japanese encephalitis virus (JEV), a flavivirus related to dengue, yellow fever and West Nile viruses. It is vaccine-preventable encephalitis. This mosquito-transmitted virus cause inflammation of the brain (encephalitis). It usually occurs in rural or agricultural areas, often associated with rice farming. It takes 5 to 15 days after the bite of an infected mosquito to develop symptoms.

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Japanese encephalitis diagnosis is based on a combination of clinical signs and symptoms and specialized laboratory tests of blood or spinal fluid. These tests typically detect antibodies that the immune system makes against the viral infection.

Permanent neurologic or psychiatric sequelae can occur in 30%–50% of those with encephalitis. Of those who survive, 20%–30% suffer permanent intellectual, behavioural or neurological problems such as paralysis, recurrent seizures or the inability to speak.

There is no specific treatment. Severe illnesses are treated by supportive therapy which may include hospitalization, respiratory support, and intravenous fluids.

Japanese encephalitis vaccine is recommended for people living in an area with repeated outbreak.

24 countries in the WHO South-East Asia and Western Pacific regions have endemic JEV transmission, exposing more than 3 billion people to risks of infection. There is no cure for the disease. Treatment is focused on relieving severe clinical signs and supporting the patient to overcome the infection.

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