एक्यूपंक्चर पद्धति से चिकित्सा और साइड इफेक्ट

एक्यूपंक्चर पद्धति से चिकित्सा किन किन बिमारियों को ठीक कर सकती है और की एक्यूपंक्चर चिकित्सा के साइड इफ़ेक्ट भी होते हैं? जानिये एक्यूपंक्चर से उपचार कैसे कराया जाता है और इसके फायदे कौन कौन से हैं।

एक्यूपंक्चर पद्धति (acupuncture therepy) चीन की ट्रेडिशनल चिकित्सा पद्धति है। इस विशेष चीनी चिकित्सा प्रणाली में शरीर के विभिन्न अंगों में एक्यूपंक्चर बिंदुओं को लंबी एवं पतली सुइयों needles की मदद से स्पन्दित किया जाता है। कुछ वैज्ञानिक शोध एक्यूपंक्चर के मेडिकल असर को सिद्ध करते हैं। इसे बहुत से रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। चीन समेत यह दुनिया के बहुत से देशों में आजकल प्रयोग की जा रही है।

एक्यूपंक्चर पद्धति को मानसिक तनाव, कान में आवाज़े आना, पीरियड्स की समस्याम, जोड़ों के दर्द-सूजन, और मांसपेशियों से सम्बंधित दिक्कतों में प्रयोग किया जा रहा है। आजकल एक्यूपंक्चर को सुइयों के द्वारा Classical acupuncture के आलावा अन्य कई तरीकों Electroacupuncture, Laser acupuncture, Cupping, Acupoint injection, Moxibustion से किया जा रहा है।

अनुसंधान दिखाते हैं कि एक्यूपंक्चर पद्धति, सर्जरी और कीमोथेरेपी के बाद मतली और उल्टी को कम कर देता है। यह दर्द को दूर भी कर सकता है। शोधकर्ताओं को पूरी तरह से समझ नहीं आता कि एक्यूपंक्चर कैसे काम करता है। यह शरीर के दर्दनिवार रसायनों की गतिविधि को बढ़ा कर सहायता कर सकता है। यह शरीर में उन केमिकल के स्राव को भी प्रभावित कर सकता रक्तचाप और प्रवाह को नियंत्रित करते हैं।

एक्यूपंक्चर चिकित्सा (Acupuncture treatment), सभी के लिए फायदेमंद नहीं हैं। डॉक्टर से ज़रूर पूछें की यह आपकी समस्या में कितना लाभ कर सकता है और प्रयोग की जाने वाली सुइयां क्या डिस्पोजेबल हैं।

Acupuncture एक्यूपंक्चर चिकित्सा क्या है?

एक्यूपंक्चर पद्धति चाईनीज मेडिसिन traditional Chinese medicine का हिस्सा है। यह वह तरीका है जिससे शरीर के एक्यूपॉइंट्स को स्टिमुलेट करते हैं। इस काम के लिए पतली नीडल प्रयोग होती हैं।

चीनी चिकित्सा में ची Qi, यिन और यांग yin and yang का संतुलन शरीर के सही काम करने के ज़रूरी है।

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ची का मतलब ऊर्जा है। यह निरंतर प्रवाह की स्थिति में है। ची के विरोधी लेकिन समान गुणों वाले यिन और यांग है। यिन और यांग, ची के रिश्तेदार हैं और विपरीत गुणों या अभिव्यक्तियों का वर्णन करते हैं। यिन, ची की वो स्थिति है जिसमें यह अपेक्षाकृत निष्क्रिय, भौतिक, पर्याप्त, ठोस, भारी, अवरोही, ठंडा, नम, शीतलन, गहरा, निष्क्रिय और चुपचाप है।

यांग, ची के उन पहलुओं या अभिव्यक्तियों को संदर्भित करता है जो कि तुलनात्मक रूप से  विस्तारित, खोखले, हल्के, आरोही, गर्म, शुष्क, गर्म, चमकीले, आक्रामक, और सक्रिय हैं। जब शरीर में ची के यिन और यांग, एक दूसरे के साथ संतुलन में होते हैं, तो स्वास्थ्य अच्छा होता है। लेकिन जब यिन और यांग में संतुलन नहीं होता तो शरीर में रोग होते हैं।

एक्यूपंचर चिकित्सा

एक्यूपंचर चिकित्सा कैसे की जाती है

एक्यूपंक्चर पद्धति के द्वारा शरीर में यिन और यांग के संतुलन को ठीक करते हैं। एक्यूपंक्चर में कुशल चिकित्सक पतली और तेज सुइओं को शरीर में चुभोता है। इन सुइयों को चुभोने से शरीर में उर्जा के प्रवाह (ची Qi vital energy) के रास्ते में आने वाली रुकावट दूर होती है जिससे शरीर में ऊर्जा आती है और सेहत ठीक होती है।

चीनी चिकित्सा के अनुसार ची के पॉइंट्स हाथों और पैरों से होकर गर्दन के नीचे और सिर में जाते हैं। एक्यूपंक्चर, को आप घर में नहीं कर सकते। यह आपको किसी चिकित्सक से करवानी होगी। यह एक महंगी चिकित्सा है जिसके कुशल जानकार बहुत अधिक उपलब्ध नहीं है। इसमें प्रयोग की जाने आली सुइयां डिस्पोजेबल होनी चाहिए और सुइयों के चुभने से दर्द भी होता है।

एक्यूपंक्चर पद्धति का प्रयोग किन रोगों में अधिक होता है?

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एक्यूपंक्चर (acupuncture) का प्रयोग मुख्य रूप से निम्न प्रकार के बीमारियों में किया जा सकता है:

श्वशन रोग RESPIRATORY DISEASES

  • एक्यूट साइनस Acute sinusitis
  • एक्यूट राइनाइटिस Acute rhinitis
  • सामान्य जुखाम Common cold
  • एक्यूट टोंसिलाइटिस Acute tonsillitis
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ब्रोंकापोल्मोनरी रोग BRONCHOPULMONARY DISEASES

  • एक्यूट ब्रोंकाइटिस Acute bronchitis
  • दमा Bronchial asthma

नेत्र विकार EYE DISORDERS

  • एक्यूट कोन्जक्टीवाईटिस Acute conjunctivitis
  • मोतियाबिंद (जटिलताओं के बिना) Cataract (without complications)
  • निकट दृष्टि दोष Myopia
  • सेंट्रल रेटिनिटिसिस Central retinitis

मुंह के विकार DISORDERS OF THE MOUTH CAVITY

  • दांत दर्द Toothache
  • दांत निकालना के बाद दर्द Pain after tooth extraction
  • मसूड़े की सूजन Gingivitis
  • अन्न-नलिका का रोग Pharyngitis

आर्थोपेडिक विकार ORTHOPEDIC DISORDERS

  • पेरीआर्थ्राइटिस हामिरोसपुलारिस Periarthritis humeroscapularis
  • कोहनी की अंग विकृति Tennis elbow
  • कटिस्नायुशूल Sciatica
  • निचला कमर दर्द Low back pain
  • संधिशोथ Rheumatoid arthritis
  • जठरांत्र विकार GASTROINTESTINAL DISORDERS
  • घुटकी और कार्डिया की कटाई Spasm of the esophagus and cardia
  • हिचकी Hiccups
  • गैस्ट्रोटोसिस Gastroptosis
  • एक्यूट और पुरानी गैस्ट्रेटिस Acute and chronic gastritis
  • गैस्ट्रिक अस्थिरता Gastric hyperacidity
  • क्रोनिक डोडायनल अल्सर Chronic duodenal ulcer
  • एक्यूट और क्रोनिक बृहदांत्रशोथ Acute and chronic colitis
  • एक्यूट बैक्टीरिया पेचिश Acute bacterial dysentery
  • कब्ज Constipation
  • दस्त Diarrhea
  • लकवाग्रस्त आन्त्रावरोध Paralytic ileus

न्यूरोलॉजिक विकार NEUROLOGIC DISORDERS

  • सरदर्द Headache
  • माइग्रेन Migraine
  • चेहरे की नसो मे दर्द Trigeminal neuralgia
  • चेहरे का पक्षाघात Facial paralysis
  • एपलेक्टिक फिट होने के बाद पक्षाघात Paralysis after apoplectic fit
  • परिधीय न्यूरोपैथी Peripheral neuropathy
  • पोलियोमाइलाइटिस के कारण पक्षाघात Paralysis caused by poliomyelitis
  • मेनियर के सिंड्रोम Meniere’s syndrome
  • न्यूरोजेनिक मूत्राशय की शिथिलता Neurogenic bladder dysfunction

एक्यूपंक्चर चिकित्सा कैसे करते हैं?

एक्यूपंक्चर उपचार (Acupuncture treatment) से पहले आपको कुशल चिकित्सक की आवश्यकता होती है जिसने इसके लिए ज़रूरी सर्टिफिकेशन किया हो, जिसे इसकी पूरी जानकारी हो और पर्याप्त एक्सपीरियंस हो। आपको उससे पूछना चाहिए कि

  • आपको उपचार से कितना लाभ हो पाएगा। इसे कराने को कोई फायदा होगा भी की नहीं।
  • यह भी पूछें की इस ट्रीटमेंट की कॉस्ट क्या आएगी।
  • ट्रीटमेंट से पहले प्रैक्टिशनर आप से ज्यादा जानकारी लेगा, जैसे कहाँ दर्द है, कब से है, अन्य समस्या क्या हैं, जीभ का आकार, कोटिंग और रंग, चेहरे का रंग तथा कलाई में नाड़ी की ताकत, लय और गुणवत्ता क्या है।
  • एक सप्ताह में एक या दो उपचार किये जा सकते हैं। उपचार की संख्या, रोग की स्थिति और इसकी गंभीरता पर निर्भर करती है, लेकिन छह से आठ उपचार कॉमन हैं।
  • एक्यूपंक्चर के दौरान प्रैक्टिशनर, इलाज़ के दौरान पहनने के लिए गाउन या शीट दे सकता है। शरीर के जिन हिस्सों पर यह ट्रीटमेंट किया जाएगा वहां से कपड़े हटा दिए जायेंगे।
  • एक्यूपंक्चर बिंदु शरीर के सभी क्षेत्रों में स्थित होते हैं।
  • उपचार के लिए एक गद्देदा रटेबल पर लेटने को कहा जाएगा।
  • एक्यूपंक्चर सुइयों बहुत पतली और तेज होती हैं, इसलिए चुभने पर दर्द और असुविधा होती है। एक विशिष्ट उपचार में पांच और 20 सुइयों का उपयोग किया जाता है। जब एक सुई सही गहराई तक पहुंचती है, तो दर्द महसूस हो सकता है।
  • सुई चुभोने के बाद, प्रैक्टिशनर सुइओं को घुमा सकता है या गर्मी-हल्की इलेक्ट्रिकल पल्स लगा सकता है।
  • ज्यादातर मामलों में, सुई 10 से 20 मिनट तक लगा कर रखी जाती है। जब सुइयों को निकाल दिया जाता है तो आमतौर पर कोई परेशानी नहीं होती है।
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एक्यूपंक्चर साइड इफेक्ट क्या हो सकते हैं?

  • यह बहुत ज़रूरी है की नीडल डिस्पोजेबल हों तथा एक व्यक्ति पर लगाने के बाद किसी दूसरे पर नहीं लगाई जाए। ऐसा नहीं करने से ब्लड से ब्लड कांटेक्ट से संक्रामण के रोग हो सकते हैं।
  • एक्यूपंक्चर से आपको नीडल लगाने की जगह पर दर्द, ब्लीडिंग या ब्रूज़िंग हो सकती है।
  • यदि यह छाती की तरफ से लगाई जाती हैं तो यह इंटरनल ऑर्गन को छेद सकती हैं, जैसे की फेफड़े।
  • खून बहना bleeding or bruising at puncture sites
  • संक्रमण infection at puncture sites
  • त्वचा की समस्या contact dermatitis
  • नर्व को नुकसान nerve damage
  • संक्रमित खून से फैलने वाले रोग transmission of blood-borne diseases, such as hepatitis C and HIV/AIDS
  • अंगों में चोट लगना puncture of organs

आपको यह नहीं कराना चाहिए। यदि:

  • ब्लीडिंग आसानी से होती है।
  • खून पतला करने की दवा लेते हैं।
  • पेसमेकर लगा है।
  • गर्भवती हैं।
  • अच्छा कुशल प्रैक्टिशनर उपलब्ध नहीं है। इसे करवाने के बाद कोई लाभ नहीं हो रहा है।

एक्यूपंक्चर के फायदे को नापना कभी-कभी मुश्किल होता है। कुछ लोग एक्यूपंक्चर के बाद आराम महसूस करते हैं। कुछ को एक्यूपंक्चर उपचार के बाद एनर्जी भरा महसूस होता है। लेकिन हर किसी को एक्यूपंक्चर से फायदा नहीं होता। यदि लक्षणों में एक सप्ताह के भीतर कोई फायदा नहीं लगता तो एक्यूपंक्चर आपके लिए सही नहीं है।

Acupuncture is defined as insertion of metal needles through the skin at certain points on the body, with or without the use of herbs, with or without the application of electric current, and with or without the application of heat to the needles, skin, or both, in an attempt to relieve pain or improve bodily function. Acupuncture points are distributed throughout the body including ear, hand, nose, face, foot and/or scalp and back.

By the use of needles the points are stimulated. This technique helps in prevention of migraine, knee osteoarthritis, low back pain and sciatica.  It is safe when done by a trained practitioner with disposable needles.  But puncturing of skin with needle carries some risk such as infection or bleeding or bruising at puncture sites, contact dermatitis, nerve damage, transmission of blood-borne diseases, such as hepatitis C and HIV/AIDS and puncture of organs etc.

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One Comment

  1. Sir mai 3 salo se writer cramp bimari se gunj rahu. Plzz help me . Sir

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